
#पलामू #अधिवक्ता_विवाद : राजनीतिक प्रचार से जुड़ी डायरी वितरण को लेकर बार अध्यक्ष पर गंभीर आरोप लगे।
पलामू जिला बार एसोसिएशन में उस समय विवाद गहराया जब वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने अध्यक्ष रामदेव प्रसाद के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया। आरोप है कि अध्यक्ष ने भाजपा के पूर्व मेयर अरुण शंकर के प्रचार से जुड़ी डायरी अधिवक्ताओं के बीच वितरित करवाई। अधिवक्ताओं ने इसे बार की गरिमा के खिलाफ बताते हुए डायरी वापस कर दी। यह मामला वकालत पेशे की निष्पक्षता और संस्थागत मर्यादा से जुड़ा माना जा रहा है।
- पलामू जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रामदेव प्रसाद के खिलाफ निंदा प्रस्ताव।
- भाजपा के पूर्व मेयर अरुण शंकर के प्रचार से जुड़ी डायरी वितरण का आरोप।
- वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने डायरी लौटाकर आपत्ति दर्ज कराई।
- अधिवक्ताओं ने कहा, इससे बार एसोसिएशन की गरिमा को ठेस पहुंची।
- कई वरिष्ठ व युवा अधिवक्ता बैठक में रहे एकजुट।
पलामू जिला बार एसोसिएशन में मंगलवार को उस समय असहज स्थिति बन गई जब बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं ने एसोसिएशन के अध्यक्ष रामदेव प्रसाद के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित कर दिया। यह पूरा मामला अधिवक्ताओं के बीच राजनीतिक प्रचार सामग्री के वितरण से जुड़ा है, जिसे लेकर बार के वरिष्ठ सदस्यों में भारी नाराजगी देखी गई।
अधिवक्ताओं का आरोप है कि बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ने अपनी पद की मर्यादा को दरकिनार करते हुए भाजपा के पूर्व मेयर अरुण शंकर के प्रचार-प्रसार से जुड़ी डायरी को अधिवक्ताओं के बीच बंटवाने का काम किया। इसे न केवल अनुचित बल्कि बार एसोसिएशन की निष्पक्ष छवि के खिलाफ बताया गया।
क्या है पूरा विवाद
वरिष्ठ अधिवक्ताओं के अनुसार, हाल ही में पलामू जिला के अधिवक्ताओं के बीच एक डायरी वितरित की गई, जिसमें भाजपा के पूर्व मेयर अरुण शंकर से जुड़ा प्रचारात्मक कंटेंट शामिल था। अधिवक्ताओं का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया में बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रामदेव प्रसाद की भूमिका रही, जो एक संवैधानिक पद पर रहते हुए राजनीतिक प्रचार से दूरी बनाए रखने की अपेक्षा के विपरीत है।
इस मामले को लेकर अधिवक्ताओं ने आपसी बैठक कर गंभीर चर्चा की और सर्वसम्मति से अध्यक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया।
वरिष्ठ अधिवक्ताओं की तीखी प्रतिक्रिया
इस अवसर पर वरिष्ठ अधिवक्ता रूचिर कुमार तिवारी ने कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि अधिवक्ताओं के बीच किसी भी राजनीतिक दल या नेता के प्रचार का माध्यम बनना बेहद निंदनीय है।
रूचिर तिवारी ने कहा: “भाजपा के पूर्व मेयर के प्रचार-प्रसार की डायरी अधिवक्ताओं के बीच बंटवाना न केवल गलत है, बल्कि इससे बार एसोसिएशन की साख और गरिमा को नुकसान पहुंचा है।”
अन्य वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने भी एक स्वर में कहा कि बार एसोसिएशन एक गैर-राजनीतिक और स्वतंत्र संस्था है, जहां सभी विचारधाराओं के लोग कार्य करते हैं। ऐसे में किसी एक राजनीतिक दल के प्रचार से जुड़ना पूरी संस्था को कटघरे में खड़ा करता है।
डायरी लौटाकर जताया विरोध
बैठक के दौरान अधिवक्ताओं ने अध्यक्ष द्वारा भिजवाई गई डायरी को औपचारिक रूप से वापस लौटा दिया। अधिवक्ताओं का कहना था कि यह कार्य पलामू जिला बार एसोसिएशन की मर्यादा, परंपरा और निष्पक्षता के खिलाफ है।
वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने स्पष्ट किया कि वे व्यक्तिगत राजनीतिक विचार रखने के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन बार एसोसिएशन जैसे संवैधानिक मंच का उपयोग किसी भी राजनीतिक प्रचार के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
निंदा प्रस्ताव पारित करने वाले अधिवक्ता
इस निंदा प्रस्ताव में बड़ी संख्या में वरिष्ठ और युवा अधिवक्ताओं ने समर्थन दिया। जिन अधिवक्ताओं ने प्रस्ताव का समर्थन किया, उनमें सूर्यपत सिंह, नंदलाल सिंह, सौकत अली खान, सच्चिदानंद सिंह, रूचिर कुमार तिवारी, गौरव कुमार सिंह, जीशान अली, सोहेल अख्तर, अल्ताफ अंसारी, शिव कुमार तिवारी, चंद्रशेखर तिवारी, अभय कुमार भूइंया, प्रदीप नारायण, अजीत चौहान, रंजीत कुमार सिंह, उदय सिंह, आलोक कुमार तिवारी, रामजीत राम सहित कई अन्य अधिवक्ता शामिल थे।
अधिवक्ताओं ने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि संस्था की मर्यादा और गरिमा की रक्षा के लिए पारित किया गया है।
बार एसोसिएशन की गरिमा का सवाल
अधिवक्ताओं का मानना है कि बार एसोसिएशन केवल पेशेवर हितों की रक्षा का मंच नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। ऐसे में यहां किसी भी प्रकार की राजनीतिक गतिविधि या प्रचार संस्था की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर सकता है।
वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने यह भी कहा कि यदि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोहराई जाती हैं, तो वे और कड़ा रुख अपनाने को मजबूर होंगे।
न्यूज़ देखो: जब संस्थागत मर्यादा पर उठे सवाल
पलामू जिला बार एसोसिएशन का यह मामला बताता है कि संवैधानिक संस्थाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता कितनी अहम है। अधिवक्ताओं का एकजुट होकर निंदा प्रस्ताव पारित करना यह संकेत देता है कि पेशे की गरिमा से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। अब यह देखना अहम होगा कि बार एसोसिएशन नेतृत्व इस पर क्या कदम उठाता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
वकालत की गरिमा, संस्थाओं की जिम्मेदारी
बार एसोसिएशन जैसी संस्थाएं लोकतंत्र और न्याय व्यवस्था की रीढ़ होती हैं। इनकी निष्पक्षता बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। इस खबर पर अपनी राय साझा करें, इसे साथी अधिवक्ताओं तक पहुंचाएं और पेशेवर मर्यादा के पक्ष में अपनी आवाज मजबूत करें।





