
#बरवाडीह #निर्माण_विवाद : छात्रावास मरम्मत में अनियमितता के आरोप—बढ़ते खर्च पर उठे सवाल।
लातेहार के बरवाडीह में छात्रावास मरम्मत कार्य को लेकर 44 लाख रुपये के प्राक्कलन पर विवाद खड़ा हो गया है। उपप्रमुख बिरेन्द्र जायसवाल और जिप सदस्य कन्हाई सिंह ने अनियमितता और राशि हेराफेरी के आरोप लगाए हैं। बिना योजना बोर्ड के कार्य शुरू होने से पारदर्शिता पर सवाल उठे हैं। मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर आक्रोश बढ़ रहा है और जांच की मांग तेज हो गई है।
- छात्रावास मरम्मत कार्य में 44 लाख के प्राक्कलन पर विवाद।
- बिरेन्द्र जायसवाल ने अनियमितता और घोटाले के आरोप लगाए।
- कन्हाई सिंह ने विभागीय चुप्पी पर सवाल उठाए।
- कार्य स्थल पर योजना बोर्ड नहीं लगाए जाने पर आपत्ति।
- स्थानीय लोगों में आक्रोश और जांच की मांग।
बरवाडीह प्रखंड मुख्यालय स्थित छात्रावास के मरम्मत कार्य को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। लगभग 44 लाख रुपये के प्राक्कलन पर चल रहे इस कार्य में अनियमितता के आरोपों ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है।
उपप्रमुख बिरेन्द्र जायसवाल ने इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि मरम्मत कार्य केवल औपचारिकता बनकर रह गया है और बढ़े हुए प्राक्कलन के जरिए सरकारी राशि के दुरुपयोग की आशंका है।
योजना बोर्ड नहीं, पारदर्शिता पर सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि मरम्मत कार्य शुरू होने के बावजूद कार्य स्थल पर कोई योजना बोर्ड नहीं लगाया गया है। इससे यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा कि कार्य की वास्तविक लागत कितनी है और किस मद से खर्च किया जा रहा है।
बिरेन्द्र जायसवाल ने कहा: “बिना योजना बोर्ड के कार्य शुरू होना ही अनियमितता की ओर इशारा करता है।”
खर्च और निर्माण पर उठे सवाल
जानकारी के अनुसार, छात्रावास का मूल निर्माण लगभग 24 लाख रुपये में हुआ था। इसके बाद 20–22 लाख रुपये खर्च कर पहले भी इसकी मरम्मत कराई जा चुकी है।
अब फिर से 44 लाख रुपये खर्च किए जाने पर सवाल उठ रहे हैं।
उन्होंने सवाल उठाया: “जब छात्रावास का संचालन ही नहीं हो रहा है, तो बार-बार इतना भारी खर्च क्यों किया जा रहा है?”
जिप सदस्य ने भी जताई चिंता
जिला परिषद सदस्य कन्हाई सिंह ने भी इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि मरम्मत कार्य में स्पष्ट रूप से गड़बड़ी हो रही है, लेकिन विभागीय अधिकारी इस पर चुप्पी साधे हुए हैं।
कन्हाई सिंह ने कहा: “इस मामले को दिशा की बैठक में उठाया जाएगा और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की जाएगी।”
स्थानीय लोगों में बढ़ता आक्रोश
इस मामले के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। लोगों का कहना है कि विकास कार्यों के नाम पर केवल कागजी खर्च दिखाया जा रहा है, जबकि वास्तविक लाभ नहीं मिल रहा।
एक स्थानीय व्यक्ति ने कहा: “सरकारी पैसे का सही उपयोग नहीं हो रहा है, इसकी जांच जरूरी है।”
जांच की मांग तेज
उपप्रमुख और जिप सदस्य दोनों ने इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि अनियमितता साबित होती है, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी नजर
अब पूरे मामले में प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है। यह देखना अहम होगा कि जांच में क्या सामने आता है और क्या वाकई किसी तरह की गड़बड़ी हुई है।
न्यूज़ देखो: विकास कार्यों में पारदर्शिता क्यों जरूरी
बरवाडीह का यह मामला दिखाता है कि जब विकास कार्यों में पारदर्शिता नहीं होती, तो संदेह और विवाद पैदा होते हैं। योजना बोर्ड न लगाना और बार-बार भारी खर्च करना गंभीर सवाल खड़े करता है। अब प्रशासन को यह साबित करना होगा कि विकास सही दिशा में हो रहा है या नहीं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
सवाल पूछें, जवाब मांगें
विकास कार्य जनता के पैसे से होते हैं, इसलिए हर नागरिक को सवाल पूछने का अधिकार है।
जरूरी है कि हम पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग करें।
अगर कहीं गड़बड़ी दिखे, तो उसे उजागर करना समाज की जिम्मेदारी है।
जागरूक नागरिक ही भ्रष्टाचार पर लगाम लगा सकते हैं।
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