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गिरिडीह में उसरी नदी के पानी पर विवाद बालमुकुंद फैक्ट्री की पाइपलाइन योजना के खिलाफ ग्रामीणों का जोरदार विरोध

#गिरिडीह #उसरीनदी विवाद : पाइपलाइन निर्माण के दौरान नदी से पानी उठाने पर ग्रामीणों ने जताया कड़ा विरोध।

गिरिडीह जिले में उसरी नदी से पानी उठाने को लेकर बालमुकुंद फैक्ट्री और ग्रामीणों के बीच विवाद खड़ा हो गया है। फैक्ट्री प्रबंधन द्वारा पथ निर्माण विभाग से पाइपलाइन बिछाने की अनुमति मिलने के बाद नदी की ओर खुदाई शुरू की गई, जिससे ग्रामीण आक्रोशित हो गए। स्थानीय लोगों ने इसे अवैध बताते हुए तत्काल रोक लगाने की मांग की है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जनप्रतिनिधियों और विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक कर स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास किया गया।

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  • गिरिडीह में उसरी नदी से पानी लेने पर ग्रामीणों का विरोध तेज।
  • बालमुकुंद फैक्ट्री को पाइपलाइन बिछाने की अनुमति, पर नदी तक विस्तार पर सवाल।
  • जेसीबी से खुदाई शुरू होते ही ग्रामीणों ने जताया आक्रोश।
  • माले नेता कन्हाई पांडेय समेत कई जनप्रतिनिधि मौके पर पहुंचे।
  • विभागीय जेई जय प्रकाश और फैक्ट्री प्रतिनिधि के साथ हुई बैठक।
  • दर्जनों ग्रामीणों और महिलाओं ने हस्ताक्षर कर प्रशासन को सौंपने की तैयारी की।

गिरिडीह जिले में उसरी नदी के जल उपयोग को लेकर नया विवाद सामने आया है। बालमुकुंद फैक्ट्री द्वारा पथ निर्माण विभाग से पाइपलाइन बिछाने की अनुमति मिलने के बाद जब नदी की ओर खुदाई शुरू की गई, तो स्थानीय ग्रामीणों ने इसका विरोध किया। उनका आरोप है कि अनुमति केवल सड़क तक सीमित है, जबकि फैक्ट्री नदी से पानी उठाने की तैयारी कर रही है। इस मामले ने अब स्थानीय स्तर पर जनआंदोलन का रूप ले लिया है।

पाइपलाइन योजना पर उठा विवाद

पथ निर्माण विभाग द्वारा बालमुकुंद फैक्ट्री को करीब दो किलोमीटर तक पाइपलाइन बिछाने का लिखित आदेश दिया गया है। विभागीय स्तर पर यह प्रक्रिया नियमसंगत बताई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें पाइपलाइन बिछाने से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन जब यह काम उसरी नदी तक पहुंचने लगा तो संदेह उत्पन्न हुआ।

ग्रामीणों के अनुसार, यदि अनुमति केवल सड़क तक सीमित है, तो फिर पाइपलाइन को नदी तक ले जाने और वहां से पानी उठाने की योजना क्यों बनाई जा रही है। इसी सवाल ने पूरे विवाद को जन्म दिया।

जेसीबी से खुदाई होते ही भड़के ग्रामीण

जब पाइपलाइन को उसरी नदी की ओर ले जाने के लिए जेसीबी मशीन से खुदाई शुरू की गई, तब स्थानीय लोग आक्रोशित हो उठे। ग्रामीणों ने तुरंत स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को सूचना दी।

माले नेता सह उसरी बचाव अभियान के संयोजक कन्हाई पांडेय मौके पर पहुंचे। उनके साथ विजय राय, शुभांकर गुप्ता, अमिल राय, कालीचरण सोरेन, कोलेश्वर सोरेन, उप मुखिया रंजीत राय, विकास राय, मुन्ना तुरी, पूजा मुर्मू, दीपक गोस्वामी सहित कई लोग उपस्थित रहे।

विभाग और ग्रामीणों के बीच बैठक

स्थिति को शांत करने के लिए मौके पर ही एक शांतिपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें विभागीय जेई जय प्रकाश और फैक्ट्री प्रतिनिधि फूलचंद शामिल हुए।

बैठक के दौरान फैक्ट्री प्रबंधन द्वारा प्रस्तुत ओरिजिनल एग्रीमेंट और नक्शा देखा गया। नक्शे में उसरी नदी के बीच बड़े-बड़े निर्माण और मशीनों की योजना दिखाई देने पर ग्रामीणों ने कड़ा विरोध जताया।

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कन्हाई पांडेय ने कहा: “जब आदेश केवल सड़क तक पाइपलाइन बिछाने का है, तो उसरी नदी में पानी उठाने की योजना क्यों बनाई जा रही है, इसका स्पष्ट जवाब दिया जाए।”

ग्रामीणों ने मांग की कि यदि नदी से पानी लेने की कोई योजना है, तो उसका स्पष्ट उल्लेख कागजात में दिखाया जाए।

प्रशासनिक जानकारी पर उठे सवाल

बैठक के दौरान यह भी आरोप लगाया गया कि बालमुकुंद फैक्ट्री प्रबंधन ने प्रशासन को पूरी जानकारी नहीं दी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि केवल सड़क तक पाइपलाइन बिछाने की अनुमति है, तो नदी के पानी के उपयोग का जिक्र क्यों नहीं किया गया।

ग्रामीणों ने यह भी कहा कि गंगापुर क्षेत्र में पानी की वैकल्पिक व्यवस्था संभव है, लेकिन उसरी नदी के जल का उपयोग करना पर्यावरण और स्थानीय हितों के खिलाफ है।

पर्यटन स्थल पर भी मंडराया खतरा

उसरी नदी केवल जल स्रोत ही नहीं, बल्कि एक प्रमुख पर्यटन स्थल भी है। नदी से मात्र एक किलोमीटर दूरी पर स्थित उसरी फॉल क्षेत्र की पहचान है।

हाल ही में मंत्री सुदीब्य कुमार सोनू द्वारा इस क्षेत्र के सौंदर्यीकरण की योजना और शिलान्यास भी किया गया है। ऐसे में यदि नदी का जलस्तर प्रभावित होता है, तो इसका सीधा असर पर्यटन पर पड़ेगा।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि पानी का दोहन शुरू हुआ, तो गर्मी और सर्दी के मौसम में उसरी फॉल का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है।

हस्ताक्षर अभियान और प्रशासन को सौंपा जाएगा ज्ञापन

विवाद के बीच ग्रामीणों ने एक आवेदन तैयार किया है, जिस पर जेई सहित ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों के हस्ताक्षर कराए गए हैं। इस ज्ञापन को जल्द ही जिला प्रशासन को सौंपा जाएगा।

मौके पर जिला प्रशासन की टीम भी मौजूद थी और उन्होंने स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान किशोर राय, अरबिंद लाल टुडू, हीरामुनि देवी, दीपक मुर्मू, सुभाष हासदा, आरती देवी, नवीन पाण्डेय, बबलू चंद्रवंशी, सुमन राय, अजय राय, नुनु लाल सोरेन, सीताराम हांसदा, भीम कोल, जीव लाल, अजय टुडू, रामदेव, बूंदी लाल, प्रदीप सहित दर्जनों ग्रामीण उपस्थित रहे।

न्यूज़ देखो: जल संसाधनों पर बढ़ता संघर्ष

यह मामला केवल एक पाइपलाइन विवाद नहीं, बल्कि जल, जंगल और जमीन के संरक्षण से जुड़ा बड़ा सवाल है। एक ओर विकास और उद्योग की जरूरतें हैं, तो दूसरी ओर पर्यावरण और स्थानीय जीवन पर उसका प्रभाव। प्रशासन और फैक्ट्री प्रबंधन को पारदर्शिता के साथ स्पष्ट करना होगा कि योजना की वास्तविक सीमा क्या है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस संवेदनशील मुद्दे पर क्या कदम उठाता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

जागरूक नागरिक बनें और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाएं

स्थानीय संसाधनों की रक्षा केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य भी है। उसरी नदी जैसे प्राकृतिक स्रोत हमारी साझा धरोहर हैं, जिन्हें बचाना हम सभी की जिम्मेदारी है।

यदि आपको भी अपने क्षेत्र में ऐसे मुद्दे दिखते हैं, तो चुप न रहें—सवाल पूछें, जानकारी जुटाएं और सही मंच पर अपनी बात रखें। जागरूक समाज ही मजबूत लोकतंत्र की पहचान है।

अपनी राय कमेंट में जरूर दें, इस खबर को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक साझा करें और स्थानीय मुद्दों पर चर्चा को आगे बढ़ाएं।

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Surendra Verma

डुमरी, गिरिडीह

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