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पलामू में डायवर्जन बहा, गांवों की आवाजाही ठप — स्कूल, अस्पताल और कामकाज पर पड़ी मार

#नीलाम्बरपीताम्बरपुर #सड़कविकाससंकट : महावीर मोड़ से हरतुआ तक बन रही सड़क पर पुल निर्माण के दौरान बना डायवर्जन टूटा — स्कूली बच्चों, मरीजों और ग्रामीणों को हो रही भारी परेशानी
  • तेज बारिश में अस्थायी डायवर्जन बहा, दर्जनों गांवों की आवाजाही ठप
  • बच्चों की स्कूल बसें बंद, मरीजों को अस्पताल पहुंचने में हो रही दिक्कत
  • कामकाजी लोगों को लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है
  • निर्माण एजेंसी पर लापरवाही का आरोप, ग्रामीणों में गहरी नाराज़गी
  • प्रशासन से जल्द समाधान और पुल निर्माण में तेजी की मांग

तेज बारिश ने तोड़ा अस्थायी डायवर्जन, गांवों की कटी जीवनरेखा

पलामू जिला के नीलाम्बर-पीताम्बरपुर प्रखंड में महावीर मोड़ से हरतुआ तक सड़क निर्माण के दौरान बने अस्थायी डायवर्जन को बारिश के तेज बहाव ने बहा दिया है।
यह डायवर्जन निर्माणाधीन पुल के बगल में लोगों की सुविधा के लिए बनाया गया था, लेकिन पहली ही भारी बारिश ने सिस्टम की कमजोरी उजागर कर दी।

स्कूल, अस्पताल और रोज़मर्रा की जिंदगी पर पड़ा असर

डायवर्जन के बहने से स्कूली बच्चों की बसें बंद हो गई हैं। कई बच्चे समय पर स्कूल नहीं पहुंच पा रहे हैं।
बीमार लोगों को इलाज के लिए दूर के अस्पताल तक जाने में घंटों का वक्त लग रहा है।
वहीं कामकाजी लोगों और मजदूरों को भी रोजमर्रा के कार्यों के लिए बड़ा चक्कर लगाना पड़ रहा है, जिससे समय और पैसे दोनों की बर्बादी हो रही है।

निर्माण एजेंसी पर लापरवाही का आरोप

स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि निर्माण एजेंसी ने डायवर्जन को मजबूत करने की कोई कोशिश नहीं की।
सिर्फ मिट्टी और कंक्रीट डालकर रास्ता बना दिया गया, जिसे पहली ही तेज बारिश बहा ले गई।
लोगों का कहना है कि अगर समय रहते ठोस डायवर्जन बनाया जाता, तो यह संकट नहीं आता।

जनता में बढ़ रहा आक्रोश, ठोस समाधान की मांग

अब तक कोई स्थायी वैकल्पिक रास्ता या डायवर्जन निर्माण शुरू नहीं हुआ है, जिससे जनता में नाराज़गी बढ़ती जा रही है।
प्रशासन से मांग की जा रही है कि अविलंब मजबूत डायवर्जन का निर्माण कराया जाए और मुख्य पुल का काम भी तेज़ी से किया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी परेशानी न हो।

न्यूज़ देखो: विकास कार्यों की लापरवाही जनता को भुगतनी पड़ रही है

इस खबर के ज़रिए न्यूज़ देखो स्थानीय प्रशासन और निर्माण एजेंसी को जवाबदेह बनाने की ज़िम्मेदारी उठाता है।
गांवों की सड़कें जीवन की नसें होती हैं, और जब वे टूट जाती हैं तो शिक्षा, स्वास्थ्य और रोज़ी-रोटी सब कुछ ठहर जाता है।
विकास के नाम पर अधूरी योजनाएं लोगों की ज़िंदगी में बाधा बन रही हैं।
अब समय है कि योजनाओं को जवाबदेही और गुणवत्ता के साथ धरातल पर उतारा जाए।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

सड़क विकास की असली तस्वीर जनता के अनुभवों में छिपी है। इस खबर पर अपनी राय ज़रूर दें, शेयर करें, और सवाल उठाएं — ताकि आपकी आवाज़ हर ज़िम्मेदार तक पहुंचे।

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