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गिरिडीह में ड्रिंक एंड ड्राइव पर लगाम लगाने के लिए अभियान तेज, योगीटांड चौक पर सघन जांच से मचा हड़कंप

#गिरिडीह #सड़क_सुरक्षा : नशे में वाहन चलाने वालों पर सख्ती—अल्कोहल टेस्ट के साथ जुर्माने और जेल का प्रावधान।

गिरिडीह जिले में सड़क सुरक्षा को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। योगीटांड चौक के समीप ड्रिंक एंड ड्राइव के खिलाफ विशेष जांच अभियान चलाया गया, जिसमें दोपहिया से लेकर भारी वाहनों के चालकों की जांच की गई। अल्कोहल ब्रेथ एनालाइजर के माध्यम से शराब और नशे की स्थिति में वाहन चलाने वालों की पहचान की गई। इस अभियान का उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना और वाहन चालकों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक करना है।

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  • योगीटांड चौक के पास ड्रिंक एंड ड्राइव के खिलाफ विशेष जांच अभियान।
  • दोपहिया, चारपहिया, ट्रक और बस चालकों की अल्कोहल जांच।
  • मोटर वाहन अधिनियम 185 के तहत 10 हजार जुर्माना या 6 माह जेल का प्रावधान।
  • उल्लंघन करने वाले चालकों पर कानूनी कार्रवाई
  • वाहन चालकों को पंपलेट और बुकलेट देकर किया गया जागरूक।

गिरिडीह जिले में लगातार बढ़ रही सड़क दुर्घटनाओं को देखते हुए जिला प्रशासन और सड़क सुरक्षा प्रबंधन की ओर से ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में गिरिडीह शहर के व्यस्ततम इलाकों में से एक योगीटांड चौक के समीप ड्रिंक एंड ड्राइव के खिलाफ सघन जांच अभियान चलाया गया। इस अभियान के दौरान सड़क पर चल रहे हर प्रकार के वाहन—दोपहिया, चारपहिया, ट्रक और बस—को रोककर चालकों की जांच की गई।

अल्कोहल ब्रेथ एनालाइजर से की गई जांच

अभियान के दौरान सभी वाहन चालकों की जांच अल्कोहल ब्रेथ एनालाइजर मशीन के माध्यम से की गई। यह मशीन चालक की सांस से यह पता लगाती है कि उसने शराब या किसी अन्य नशीले पदार्थ का सेवन किया है या नहीं। जांच के दौरान कई वाहन चालकों को रोका गया और नियमों की जानकारी दी गई। जिन चालकों में नशे के लक्षण पाए गए, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की गई।

मोटर वाहन अधिनियम के तहत सख्त प्रावधान

जिला सड़क सुरक्षा प्रबंधक मो. वाजीद हसन ने अभियान के दौरान स्पष्ट जानकारी देते हुए बताया कि शराब या नशे की हालत में वाहन चलाना एक गंभीर अपराध है। उन्होंने कहा कि:

जिला सड़क सुरक्षा प्रबंधक मो. वाजीद हसन ने कहा: “मोटर वाहन अधिनियम–185 के तहत नशे में वाहन चलाने पर 10,000 रुपये तक का जुर्माना या 6 महीने तक की जेल या दोनों का प्रावधान है। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्ती से कार्रवाई की जा रही है।”

उन्होंने यह भी बताया कि यह अभियान केवल चालान काटने के लिए नहीं, बल्कि लोगों की जान बचाने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है।

सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने का प्रयास

गिरिडीह जिले में बीते कुछ वर्षों में सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में वृद्धि देखी गई है। इनमें से बड़ी संख्या उन दुर्घटनाओं की है, जो शराब या नशे की हालत में वाहन चलाने के कारण हुई हैं। प्रशासन का मानना है कि यदि ड्रिंक एंड ड्राइव पर प्रभावी नियंत्रण किया जाए, तो दुर्घटनाओं में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।

वाहन चालकों को किया गया जागरूक

जांच अभियान के दौरान केवल कार्रवाई ही नहीं, बल्कि जागरूकता पर भी विशेष जोर दिया गया। सभी वाहन चालकों को सड़क सुरक्षा नियमों की जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि हेलमेट और सीट बेल्ट का उपयोग, निर्धारित गति सीमा का पालन और नशे से दूर रहना किस प्रकार उनकी और दूसरों की जान बचा सकता है।

इस दौरान वाहन चालकों के बीच पंपलेट और बुकलेट का भी वितरण किया गया, जिनमें सड़क सुरक्षा से जुड़े नियम, सावधानियां और आपात स्थिति में क्या करें, इसकी जानकारी दी गई थी।

आम लोगों में दिखा मिला-जुला असर

अभियान के दौरान कई वाहन चालकों ने प्रशासन की इस पहल का स्वागत किया। उनका कहना था कि इस तरह के अभियान से लोगों में डर नहीं, बल्कि जिम्मेदारी की भावना आती है। वहीं कुछ चालकों में अचानक जांच को लेकर हड़बड़ी भी देखी गई, जिससे यह साफ हुआ कि सख्ती का असर पड़ रहा है।

आगे भी जारी रहेगा अभियान

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, ड्रिंक एंड ड्राइव के खिलाफ इस तरह के जांच अभियान आगे भी जिले के विभिन्न हिस्सों में चलाए जाएंगे। खासकर त्योहारों, सप्ताहांत और रात के समय इस तरह की जांच को और सघन किया जाएगा, ताकि नशे में वाहन चलाने की प्रवृत्ति पर पूरी तरह अंकुश लगाया जा सके।

समाज की भूमिका भी अहम

अधिकारियों ने यह भी कहा कि केवल प्रशासनिक कार्रवाई से सड़क सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती। इसके लिए समाज के हर वर्ग की भागीदारी जरूरी है। परिवार के सदस्य, मित्र और समाज को भी यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी व्यक्ति नशे की हालत में वाहन न चलाए।

न्यूज़ देखो: सख्ती जरूरी, लेकिन जागरूकता सबसे अहम

गिरिडीह में चला यह ड्रिंक एंड ड्राइव अभियान बताता है कि प्रशासन सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर है। जुर्माना और जेल का डर जरूरी है, लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी है लोगों में जिम्मेदारी का भाव पैदा करना। अब देखना होगा कि यह अभियान कितनी स्थायी आदतों में बदलाव ला पाता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

सुरक्षित सड़कें, सुरक्षित जीवन की ओर कदम

एक पल की लापरवाही जीवन भर का दर्द बन सकती है।
नशे में वाहन चलाना सिर्फ कानून तोड़ना नहीं, बल्कि जान से खिलवाड़ है।
आज नियम मानकर आप किसी का घर उजड़ने से बचा सकते हैं।
अपनी राय साझा करें, खबर को आगे बढ़ाएं और सड़क सुरक्षा के इस संदेश को हर घर तक पहुंचाएं।

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Surendra Verma

डुमरी, गिरिडीह

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