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दुमका में आंधी के बाद भी नहीं हटे गिरे पेड़, 36 घंटे से बाधित है बिजली और आवागमन

#दुमका #आंधीप्रभाव : पेड़ गिरने से बिजली आपूर्ति और सड़क मार्ग ठप, राहत कार्य में देरी।

दुमका में रविवार शाम आई आंधी और बारिश के बाद गिरे पेड़ों को 36 घंटे बीतने के बावजूद नहीं हटाया गया है। इससे कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित है और आवागमन प्रभावित हुआ है। झारखंड अधिविद्य परिषद कार्यालय और कोर्ट परिसर के पास स्थिति गंभीर बनी हुई है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन की धीमी कार्रवाई पर नाराजगी जताई है और संयुक्त टास्क फोर्स की मांग की है।

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  • दुमका में आंधी के बाद गिरे पेड़ 36 घंटे बाद भी नहीं हटाए गए
  • झारखंड अधिविद्य परिषद कार्यालय के पास पेड़ गिरने से बिजली आपूर्ति बाधित
  • दुमका कोर्ट परिसर में दो पेड़ गिरने से रास्ता अवरुद्ध
  • कई इलाकों में आवागमन प्रभावित, लोगों को हो रही परेशानी।
  • स्थानीय लोगों ने संयुक्त टास्क फोर्स गठन की उठाई मांग।

दुमका जिले में रविवार शाम आई हल्की आंधी और बारिश ने शहर की व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है। आंधी के कारण कई जगह पेड़ और उनकी डालियां गिर गईं, जिससे बिजली आपूर्ति और आवागमन दोनों प्रभावित हो गए। लेकिन हैरानी की बात यह है कि घटना के 36 घंटे बीत जाने के बाद भी प्रशासन द्वारा गिरे पेड़ों को हटाने का काम शुरू नहीं किया गया है।

इस लापरवाही के कारण शहर के कई हिस्सों में लोग अभी भी परेशानियों का सामना कर रहे हैं। खासकर बिजली और सड़क व्यवस्था पर इसका सीधा असर पड़ा है।

बिजली आपूर्ति पर पड़ा असर

आंधी के दौरान झारखंड अधिविद्य परिषद कार्यालय के सामने एक बड़ा पेड़ बिजली के तारों पर गिर गया। इसके कारण आसपास के क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति पूरी तरह बाधित हो गई।

स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय तक बिजली नहीं रहने से दैनिक जीवन प्रभावित हो गया है। कई घरों और दुकानों में कामकाज ठप पड़ा हुआ है।

एक स्थानीय निवासी ने कहा: “36 घंटे बीत गए, लेकिन अब तक बिजली बहाल नहीं हो पाई है। प्रशासन की यह लापरवाही समझ से परे है।”

कोर्ट परिसर में रास्ता अब भी बंद

दुमका कोर्ट परिसर में भी आंधी के कारण दो बड़े पेड़ गिर गए, जिससे वहां का रास्ता पूरी तरह अवरुद्ध हो गया है।

इससे कोर्ट आने-जाने वाले लोगों और कर्मचारियों को काफी परेशानी हो रही है। वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे समय और संसाधनों की बर्बादी हो रही है।

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स्थानीय लोगों ने बताया कि इतनी बड़ी समस्या के बावजूद अब तक किसी विभाग ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई नहीं की है।

प्रशासनिक लापरवाही पर उठे सवाल

घटना के 36 घंटे बीत जाने के बाद भी गिरे पेड़ों को नहीं हटाया जाना प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है।

लोगों का कहना है कि अगर समय रहते कार्रवाई की जाती तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि आपदा जैसी स्थिति से निपटने के लिए जिले में कोई ठोस व्यवस्था नहीं है।

एक नागरिक ने कहा: “आंधी कोई बड़ी आपदा नहीं थी, फिर भी इतनी देर तक काम नहीं होना प्रशासन की उदासीनता को दर्शाता है।”

संयुक्त टास्क फोर्स की उठी मांग

स्थानीय लोगों ने इस समस्या के समाधान के लिए एक ठोस सुझाव भी दिया है। उनका कहना है कि जिले में एक संयुक्त टास्क फोर्स बनाई जानी चाहिए, जिसमें विभिन्न विभागों को शामिल किया जाए।

इस टास्क फोर्स में फॉरेस्ट विभाग, बिजली विभाग, सड़क निर्माण विभाग, भवन विभाग, नगर परिषद और आपदा प्रबंधन विभाग को शामिल किया जाना चाहिए।

ऐसी व्यवस्था होने से किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सकेगी और लोगों को अनावश्यक परेशानी से बचाया जा सकेगा।

व्यवस्था सुधार की जरूरत

यह घटना साफ तौर पर दिखाती है कि छोटी-सी प्राकृतिक आपदा भी यदि सही समय पर नियंत्रित न की जाए तो बड़ी समस्या बन सकती है।

दुमका जैसे शहर में इस तरह की स्थिति प्रशासनिक तैयारियों की कमी को उजागर करती है। अब जरूरत है कि संबंधित विभाग इस मामले को गंभीरता से लें और भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए ठोस योजना बनाएं।

न्यूज़ देखो: छोटी आंधी में बड़ी लापरवाही उजागर

दुमका में आंधी के बाद 36 घंटे तक गिरे पेड़ों को नहीं हटाया जाना प्रशासनिक सिस्टम की बड़ी कमजोरी को दर्शाता है। यह घटना बताती है कि आपदा प्रबंधन केवल कागजों तक सीमित है। यदि समय पर कार्रवाई नहीं होती है तो छोटी घटनाएं भी आम लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन जाती हैं। अब प्रशासन को इस दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

जिम्मेदार सिस्टम के लिए जागरूक नागरिक बनें

समाज में बेहतर व्यवस्था तभी संभव है जब नागरिक भी अपनी आवाज उठाएं और जिम्मेदारियों को समझें। ऐसी समस्याओं को नजरअंदाज करने के बजाय उन्हें सामने लाना जरूरी है।

यदि आपके क्षेत्र में भी ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है तो संबंधित विभाग को सूचना दें और समाधान की मांग करें।

अपनी राय कमेंट में जरूर साझा करें, इस खबर को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं और बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था के लिए अपनी भागीदारी निभाएं।

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Saroj Verma

दुमका/देवघर

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