
#दुमका #नगरपरिषदचुनाव : अध्यक्ष पद की रेस में अनुभवी चेहरे की वापसी से सियासी समीकरण बदले।
दुमका नगर परिषद चुनाव 2026 में अध्यक्ष पद की दौड़ उस समय और दिलचस्प हो गई जब बिनोद कुमार लाल ने चुनावी मैदान में वापसी की घोषणा की। उनकी एंट्री से मुकाबला अब मिक्की झा, अमिता रक्षित और अभिषेक चौरसिया के बीच चौतरफा हो गया है। खराब स्वास्थ्य की चुनौतियों के बावजूद चुनाव लड़ने का उनका फैसला चर्चा का विषय बना हुआ है। यह चुनाव दुमका की राजनीति में व्यक्ति बनाम दल की बहस को फिर से केंद्र में ले आया है।
- दुमका नगर परिषद अध्यक्ष पद की रेस में बिनोद कुमार लाल की एंट्री।
- मिक्की झा, अमिता रक्षित और अभिषेक चौरसिया के साथ चौतरफा मुकाबला तय।
- दो बार उपाध्यक्ष रह चुके बिनोद कुमार लाल का दावा—अनुभव और ईमानदारी सबसे बड़ी ताकत।
- 2018 में निर्दलीय रहते हुए झामुमो और भाजपा को दे चुके हैं शिकस्त।
- खराब स्वास्थ्य के बावजूद मैदान में उतरना बना चर्चा का केंद्र।
- सवाल—क्या दुमका फिर पार्टी नहीं, व्यक्ति को चुनेगा?
दुमका नगर परिषद चुनाव 2026 जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे राजनीतिक सरगर्मी तेज होती जा रही है। अध्यक्ष पद की रेस में पहले से मौजूद नामों के बीच अब एक अनुभवी चेहरे की वापसी ने पूरे चुनावी गणित को बदल दिया है। बिनोद कुमार लाल की एंट्री के बाद यह साफ हो गया है कि इस बार मुकाबला एकतरफा नहीं, बल्कि कई स्तरों पर दिलचस्प होने वाला है। शहर की जनता अब उम्मीदवारों के अनुभव, कार्यशैली और विश्वसनीयता को नए सिरे से तौलने लगी है।
बिनोद कुमार लाल की वापसी और बदले समीकरण
बिनोद कुमार लाल का नाम दुमका की नगर राजनीति में नया नहीं है। वे दो बार नगर परिषद के उपाध्यक्ष रह चुके हैं और शहरी प्रशासन का लंबा अनुभव रखते हैं। उनकी चुनावी मैदान में वापसी से राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं।
उनके समर्थकों का कहना है कि उनका अनुभव, नगर परिषद की कार्यप्रणाली की गहरी समझ और जमीनी पकड़ उन्हें अन्य उम्मीदवारों से अलग बनाती है। वहीं विरोधी खेमे में इस बात को लेकर रणनीति बदली जा रही है कि एक अनुभवी उम्मीदवार के सामने किस तरह अपनी बात रखी जाए।
खराब स्वास्थ्य के बावजूद चुनावी निर्णय
इस चुनाव की सबसे चर्चित बातों में से एक बिनोद कुमार लाल का खराब स्वास्थ्य के बावजूद चुनाव लड़ने का फैसला है। राजनीतिक गलियारों में इसे उनके मजबूत इरादों और जनता के प्रति प्रतिबद्धता के रूप में देखा जा रहा है।
समर्थकों का मानना है कि उन्होंने यह फैसला केवल व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा के लिए नहीं, बल्कि दुमका के विकास और स्थिर नेतृत्व की जरूरत को ध्यान में रखकर लिया है। वहीं कुछ लोग यह सवाल भी उठा रहे हैं कि स्वास्थ्य जैसी चुनौतियों के बीच जिम्मेदारी निभाना कितना व्यावहारिक होगा।
2018 का चुनाव और निर्दलीय जीत की याद
दुमका की राजनीति में 2018 का नगर परिषद चुनाव आज भी चर्चा में रहता है। उस चुनाव में बिनोद कुमार लाल ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में झामुमो और भाजपा जैसे बड़े दलों के प्रत्याशियों को हराकर सबको चौंका दिया था।
यह जीत इस बात का संकेत मानी गई थी कि दुमका की जनता कई बार पार्टी से ज्यादा व्यक्ति और उसके काम को महत्व देती है। अब 2026 में फिर वही सवाल खड़ा हो रहा है—क्या इतिहास खुद को दोहराएगा या इस बार राजनीतिक समीकरण अलग दिशा में जाएंगे?
अन्य उम्मीदवारों की रणनीति और ताकत
इस चुनाव में मुकाबला केवल बिनोद कुमार लाल तक सीमित नहीं है। मिक्की झा, अमिता रक्षित और अभिषेक चौरसिया भी अपनी-अपनी रणनीतियों और समर्थक वर्ग के साथ मैदान में हैं।
मिक्की झा को एक सक्रिय और संगठित चुनावी अभियान के लिए जाना जाता है। अमिता रक्षित महिला नेतृत्व और सामाजिक जुड़ाव के मुद्दों पर अपनी पकड़ रखती हैं, जबकि अभिषेक चौरसिया युवा मतदाताओं और बदलाव की राजनीति का प्रतिनिधित्व करते नजर आते हैं।
चारों उम्मीदवारों की मौजूदगी ने यह तय कर दिया है कि चुनाव बहुआयामी मुद्दों और तुलना के आधार पर लड़ा जाएगा।
व्यक्ति बनाम दल की बहस फिर तेज
दुमका नगर परिषद चुनाव 2026 में एक बार फिर यह बहस तेज हो गई है कि मतदाता पार्टी को प्राथमिकता देंगे या व्यक्ति को। बिनोद कुमार लाल की पिछली जीत और वर्तमान वापसी ने इस सवाल को और गहरा कर दिया है।
नगर परिषद जैसे स्थानीय निकाय चुनावों में अक्सर उम्मीदवार का व्यक्तिगत रिकॉर्ड, जनता से सीधा जुड़ाव और प्रशासनिक समझ निर्णायक भूमिका निभाती है। ऐसे में यह चुनाव दुमका की राजनीतिक सोच को भी प्रतिबिंबित करेगा।
जनता की भूमिका और बढ़ती उम्मीदें
शहर के नागरिक इस चुनाव से काफी उम्मीदें लगाए बैठे हैं। सड़क, जलापूर्ति, सफाई, स्ट्रीट लाइट, बाजार व्यवस्था और पारदर्शी प्रशासन जैसे मुद्दे मतदाताओं के लिए अहम हैं।
जनता यह देखना चाहती है कि कौन उम्मीदवार इन बुनियादी मुद्दों पर ठोस और व्यावहारिक समाधान देने में सक्षम है। इसी आधार पर चुनावी माहौल धीरे-धीरे आकार ले रहा है।
न्यूज़ देखो: अनुभव, भरोसा और विकल्पों की असली परीक्षा
दुमका नगर परिषद चुनाव 2026 केवल एक पद की लड़ाई नहीं, बल्कि नेतृत्व की दिशा तय करने का अवसर है। बिनोद कुमार लाल की एंट्री ने अनुभव को फिर से बहस के केंद्र में ला दिया है, वहीं अन्य उम्मीदवार नए विकल्प के रूप में सामने हैं। यह चुनाव बताएगा कि दुमका की जनता स्थिरता और अनुभव को चुनती है या बदलाव और नई सोच को। लोकतंत्र की खूबसूरती इसी में है कि फैसला जनता के हाथ में है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
सोच-समझकर मतदान ही मजबूत शहर की नींव
नगर परिषद का चुनाव सीधे आपके रोजमर्रा के जीवन से जुड़ा होता है। सही नेतृत्व शहर के विकास, पारदर्शिता और सुविधाओं की दिशा तय करता है।
इसलिए जरूरी है कि मतदाता उम्मीदवारों के वादों के साथ-साथ उनके पिछले काम और अनुभव को भी परखें।
आपकी राय क्या है—दुमका के लिए सबसे बेहतर अध्यक्ष कौन और क्यों? अपनी बात कमेंट में साझा करें, इस खबर को दूसरों तक पहुंचाएं और लोकतांत्रिक चर्चा को आगे बढ़ाएं।

