
#पुरुलिया #शहादत_दिवस : पंच शहीदों की अमर गाथा को नमन करते हुए श्रद्धांजलि और प्रेरक संदेश।
पुरुलिया जिले के झालदा स्थित पंच शहीद मोड़ पर पाँच स्वतंत्रता सेनानियों के शहादत दिवस पर भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई। डुमरी विधायक जयराम कुमार महतो ने 15 जनवरी को गोकुलनगर पहुंचकर शहीदों को नमन किया। 1930–31 के सविनय अवज्ञा आंदोलन में बलिदान देने वाले इन वीरों की स्मृति में सत्य मेला आयोजित हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य नई पीढ़ी को स्वतंत्रता संग्राम के मूल्यों से जोड़ना रहा।
- डुमरी विधायक जयराम कुमार महतो ने पंच शहीद मोड़ पर अर्पित की श्रद्धांजलि।
- मोहन महतो, गणेश महतो, शीतल महतो, सहदेव महतो और गोकुल महतो को किया गया नमन।
- 15 जनवरी को झालदा, गोकुलनगर में आयोजित हुआ श्रद्धांजलि कार्यक्रम।
- 1930–31 के सविनय अवज्ञा आंदोलन में दिया गया था बलिदान।
- शहादत की स्मृति में सत्य मेला और पाँच शहीद मेला का आयोजन।
- नई पीढ़ी को जोड़ने का संदेश, बलिदान से प्रेरणा पर जोर।
देश की आज़ादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले पंच शहीदों के शहादत दिवस पर पुरुलिया जिले में श्रद्धा और सम्मान का वातावरण देखने को मिला। झालदा स्थित पंच शहीद मोड़, गोकुलनगर में आयोजित कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने एकजुट होकर वीर शहीदों को नमन किया। इस अवसर पर डुमरी विधायक जयराम कुमार महतो की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष गरिमा प्रदान की। आयोजन का उद्देश्य केवल श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम के मूल्यों को स्मरण कर उन्हें वर्तमान और भविष्य से जोड़ना रहा।
पंच शहीदों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि
श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान डुमरी विधायक जयराम कुमार महतो ने पंच शहीद मोड़ पर पहुंचकर मोहन महतो, गणेश महतो, शीतल महतो, सहदेव महतो और गोकुल महतो के बलिदान को नमन किया। उन्होंने पुष्प अर्पित कर शहीदों की स्मृति को प्रणाम किया और उपस्थित लोगों से उनके आदर्शों को जीवन में उतारने का आह्वान किया।
जयराम कुमार महतो ने कहा: “पंच शहीदों का संघर्ष और बलिदान कभी भुलाया नहीं जा सकता। उनका साहस और देशप्रेम आज भी हमें स्वतंत्रता के महत्व और उसके लिए किए गए त्याग की याद दिलाता है।”
उनका यह वक्तव्य शहीदों के प्रति कृतज्ञता के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश भी देता है।
सविनय अवज्ञा आंदोलन की अमर गाथा
गौरतलब है कि वर्ष 1930–31 में चले सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष करते हुए इन पाँचों वीरों ने हंसते-हंसते अपना बलिदान दिया था। उस दौर में जब आज़ादी की लड़ाई अपने निर्णायक मोड़ पर थी, पंच शहीदों का साहस और दृढ़ संकल्प पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा का स्रोत बना।
इतिहासकारों और स्थानीय लोगों के अनुसार, इन शहीदों का बलिदान भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के स्वर्णिम अध्यायों में दर्ज है। उनका संघर्ष केवल राजनीतिक आज़ादी तक सीमित नहीं था, बल्कि सामाजिक सम्मान और आत्मसम्मान की लड़ाई भी थी।
सत्य मेला और पाँच शहीद मेला से जीवित रहती विरासत
आज भी पंच शहीदों की स्मृति में झालदा में सत्य मेला और पाँच शहीद मेला जैसे कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इन मेलों के माध्यम से शहीदों की विरासत, उनके विचार और उनके द्वारा दिखाए गए मार्ग को जीवित रखा जाता है।
इन आयोजनों में सांस्कृतिक कार्यक्रम, विचार गोष्ठियां और इतिहास से जुड़े संवाद होते हैं, जिनका उद्देश्य नई पीढ़ी को स्वतंत्रता संग्राम की वास्तविक कहानियों से जोड़ना है। स्थानीय लोगों का मानना है कि ऐसे आयोजन केवल परंपरा नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना को मजबूत करने का माध्यम हैं।
नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत
श्रद्धांजलि कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि पंच शहीदों की शहादत आज की पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है। जब देश स्वतंत्रता के बाद विकास और सामाजिक चुनौतियों के दौर से गुजर रहा है, तब शहीदों के आदर्श हमें कर्तव्य, ईमानदारी और राष्ट्रप्रेम का मार्ग दिखाते हैं।
कार्यक्रम में मौजूद युवाओं ने भी शहीदों के नाम अमर रहने के नारे लगाए और उनके दिखाए रास्ते पर चलने का संकल्प लिया। सभी ने एक स्वर में कहा कि देश और समाज की सेवा करना ही शहीदों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।
जनप्रतिनिधियों और नागरिकों की साझा भावना
इस अवसर पर जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों की मौजूदगी ने यह स्पष्ट किया कि पंच शहीदों की स्मृति केवल इतिहास तक सीमित नहीं है, बल्कि आज भी समाज के दिलों में जीवित है। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि बलिदान की स्मृति को जीवित रखना सामूहिक जिम्मेदारी है।
श्रद्धांजलि के दौरान वातावरण देशभक्ति और सम्मान की भावना से ओतप्रोत रहा, जहां हर व्यक्ति शहीदों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करता नजर आया।
न्यूज़ देखो: बलिदान की स्मृति से जागता सामाजिक दायित्व
यह खबर बताती है कि स्वतंत्रता संग्राम के शहीदों को स्मरण करना केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना का आधार है। पंच शहीदों का बलिदान आज भी हमें साहस, त्याग और राष्ट्रप्रेम की सीख देता है। जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी यह दर्शाती है कि इतिहास से जुड़ाव आज भी प्रासंगिक है। अब जरूरत है कि यह प्रेरणा व्यवहारिक कर्तव्यों में भी दिखाई दे।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
अमर बलिदान से प्रेरित होकर राष्ट्र निर्माण की राह
जब हम शहीदों को याद करते हैं, तो अपने कर्तव्यों की याद भी ताजा होती है। पंच शहीदों की गाथा हमें सिखाती है कि स्वतंत्रता का मूल्य त्याग से तय होता है।
आज की पीढ़ी के लिए यह अवसर है कि वह इतिहास से सीख लेकर समाज और देश के लिए सकारात्मक भूमिका निभाए।
आप भी अपने क्षेत्र में ऐसे आयोजनों से जुड़ें और स्वतंत्रता संग्राम की कहानियों को आगे बढ़ाएं।
अपनी राय साझा करें, खबर को लोगों तक पहुंचाएं और बलिदान की इस विरासत को जीवित रखने में सहभागी बनें।

