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टुसु परब से पहले डुमरी विधायक जयराम महतो का प्रशासन को पत्र, जलस्रोतों पर स्वच्छता और व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग

#डुमरी #टुसु_परब : पर्व के दौरान नदी घाटों और तालाबों की स्वच्छता व सुरक्षा व्यवस्था पर जोर।

छोटानागपुर क्षेत्र के ऐतिहासिक टुसु परब को लेकर डुमरी विधायक जयराम कुमार महतो ने धनबाद, बोकारो और गिरिडीह जिलों के उपायुक्तों को पत्र भेजकर आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करने का आग्रह किया है। पत्र में पर्व के दौरान नदी घाटों, तालाबों और अन्य जलस्रोतों पर स्वच्छता, सुरक्षा और मूलभूत सुविधाओं की आवश्यकता को रेखांकित किया गया है। विधायक ने कहा कि बड़ी संख्या में श्रद्धालु और ग्रामीण इन स्थलों पर जुटते हैं, जिससे प्रशासनिक तैयारी बेहद जरूरी हो जाती है। यह पहल लोक आस्था, पर्यावरण संरक्षण और जनसुरक्षा से सीधे जुड़ी मानी जा रही है।

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  • डुमरी विधायक जयराम कुमार महतो ने तीन जिलों के उपायुक्तों को पत्र लिखा।
  • धनबाद, बोकारो और गिरिडीह जिले के जलस्रोतों पर विशेष व्यवस्था की मांग।
  • टुसु परब के अवसर पर नदी घाटों और तालाबों पर भारी भीड़ जुटने की संभावना।
  • स्वच्छता, सुरक्षा और मूलभूत सुविधाओं पर जोर।
  • लोक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बताया अहम।

छोटानागपुर क्षेत्र में आस्था, परंपरा और लोकसंस्कृति से जुड़ा टुसु परब नजदीक आते ही प्रशासनिक और सामाजिक स्तर पर तैयारियों की जरूरत महसूस की जाने लगी है। इसी क्रम में डुमरी से विधायक जयराम कुमार महतो ने एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए धनबाद, बोकारो और गिरिडीह जिलों के उपायुक्तों को पत्राचार के माध्यम से अवगत कराया है। उन्होंने पर्व के दौरान नदी घाटों, तालाबों और अन्य जलस्रोतों पर स्वच्छता और आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया है। उनका कहना है कि टुसु परब के समय बड़ी संख्या में ग्रामीण और श्रद्धालु इन स्थलों पर पहुंचते हैं, ऐसे में थोड़ी सी लापरवाही भी बड़ी समस्या का कारण बन सकती है।

टुसु परब का सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व

टुसु परब छोटानागपुर क्षेत्र का एक ऐतिहासिक और लोक आस्था से जुड़ा पर्व है। यह पर्व विशेष रूप से ग्रामीण समाज में सामूहिक एकता, प्रकृति के प्रति सम्मान और परंपराओं के संरक्षण का प्रतीक माना जाता है। पर्व के दौरान महिलाएं और युवक-युवतियां टुसु गीत गाते हुए नदी घाटों और तालाबों पर एकत्रित होते हैं। इसी कारण इन जलस्रोतों की स्वच्छता और सुरक्षा का मुद्दा अत्यंत संवेदनशील हो जाता है। पर्व की गरिमा बनाए रखने के लिए प्रशासनिक तैयारियों की भूमिका अहम मानी जाती है।

तीन जिलों के उपायुक्तों को पत्राचार

डुमरी विधायक जयराम कुमार महतो ने अपने पत्र में धनबाद, बोकारो और गिरिडीह जिले के उपायुक्तों से अनुरोध किया है कि टुसु परब के अवसर पर अपने-अपने क्षेत्रों में स्थित नदी घाटों, तालाबों और अन्य सार्वजनिक जलस्रोतों पर विशेष ध्यान दिया जाए। पत्र में उन्होंने साफ-सफाई, कचरा प्रबंधन, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था और भीड़ नियंत्रण जैसे बिंदुओं पर आवश्यक कदम उठाने की बात कही है। विधायक का मानना है कि समन्वित प्रयास से ही पर्व को सुरक्षित और सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न कराया जा सकता है।

स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण पर जोर

विधायक ने अपने पत्र के माध्यम से यह भी संकेत दिया है कि पर्व के दौरान स्वच्छता की अनदेखी से न केवल स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा हो सकती हैं, बल्कि जलस्रोतों का प्रदूषण भी बढ़ सकता है। नदी घाटों और तालाबों पर प्लास्टिक कचरा, फूल-मालाएं और अन्य अपशिष्ट अक्सर छोड़े जाते हैं, जो पर्यावरण के लिए घातक साबित होते हैं। ऐसे में समय रहते सफाई कर्मियों की तैनाती और जागरूकता अभियान चलाना जरूरी हो जाता है। यह पहल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक सकारात्मक संदेश देती है।

जनसुरक्षा और भीड़ प्रबंधन की आवश्यकता

टुसु परब के दौरान बड़ी संख्या में लोग एकत्र होते हैं, जिनमें महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल रहते हैं। विधायक ने प्रशासन का ध्यान इस ओर भी आकृष्ट कराया है कि जलस्रोतों पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था होनी चाहिए। गहरे पानी वाले क्षेत्रों में चेतावनी संकेत, आवश्यकतानुसार बैरिकेडिंग और स्थानीय प्रशासन की मौजूदगी किसी भी संभावित दुर्घटना को रोकने में सहायक हो सकती है। इसके साथ ही भीड़ प्रबंधन और आपात स्थिति से निपटने की तैयारी भी जरूरी बताई गई है।

स्थानीय लोगों में सकारात्मक संदेश

डुमरी विधायक की इस पहल को स्थानीय स्तर पर सकारात्मक रूप में देखा जा रहा है। ग्रामीणों का मानना है कि जनप्रतिनिधियों द्वारा समय रहते प्रशासन को सचेत करना एक जिम्मेदार कदम है। इससे न केवल पर्व शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न होगा, बल्कि लोक आस्था और परंपराओं के प्रति सम्मान भी बना रहेगा। लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन इस पत्र पर गंभीरता से विचार करते हुए आवश्यक कदम उठाएगा।

प्रशासनिक समन्वय की अहमियत

तीन अलग-अलग जिलों से जुड़े इस विषय में आपसी समन्वय की भूमिका भी अहम हो जाती है। कई नदी घाट और जलस्रोत ऐसे हैं, जो एक से अधिक जिलों की सीमा में आते हैं। ऐसे में समन्वित रणनीति के बिना व्यवस्थाएं अधूरी रह सकती हैं। विधायक के पत्र का उद्देश्य यही है कि सभी संबंधित जिले मिलकर एक साझा योजना बनाएं और टुसु परब के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था से बचा जा सके।

न्यूज़ देखो: लोक पर्व, लोक जिम्मेदारी और प्रशासन की परीक्षा

टुसु परब जैसे लोकपर्व केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि प्रशासनिक सजगता और सामाजिक जिम्मेदारी की भी कसौटी होते हैं। डुमरी विधायक जयराम कुमार महतो द्वारा उपायुक्तों को पत्र भेजना यह दर्शाता है कि जनप्रतिनिधि लोकसंस्कृति और जनसुरक्षा को लेकर सजग हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस पहल पर कितनी तत्परता से अमल करता है। स्वच्छता, सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाना ही इस पर्व की वास्तविक सफलता तय करेगा।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

लोक परंपरा की गरिमा, हमारी साझा जिम्मेदारी

टुसु परब हमें अपनी जड़ों, प्रकृति और सामूहिक एकता से जोड़ता है। इस पर्व को स्वच्छ, सुरक्षित और गरिमामय बनाना सिर्फ प्रशासन ही नहीं, हम सभी की जिम्मेदारी है। जलस्रोतों की रक्षा, स्वच्छता का पालन और नियमों का सम्मान ही सच्ची श्रद्धा का परिचायक है।
अपने आसपास जागरूकता फैलाएं, परंपराओं का सम्मान करें और पर्यावरण की सुरक्षा में योगदान दें। इस खबर पर अपनी राय साझा करें, इसे आगे बढ़ाएं और लोकपर्व को सुरक्षित बनाने के प्रयासों का हिस्सा बनें।

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Surendra Verma

डुमरी, गिरिडीह

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