Editorial
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अमर चित्र कथा और टिंकल के जनक अनंत पै ने कैसे बदली भारतीय बाल साहित्य और सांस्कृतिक शिक्षा की दिशा
#भारत #बाल_साहित्य : कॉमिक्स के माध्यम से बच्चों को संस्कृति और इतिहास से जोड़ने वाले महान व्यक्तित्व। अनंत पै का जन्म 17 सितंबर 1929, कार्कला (कर्नाटक) में हुआ। वर्ष 1967 में शुरू की प्रतिष्ठित श्रृंखला अमर चित्र कथा। 1980 में लोकप्रिय बाल पत्रिका टिंकल का शुभारंभ। 440+ शीर्षक, 20+ भाषाओं…
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रानी गाइदिनल्यू की पुण्यतिथि पर स्मरण, पूर्वोत्तर की महान स्वतंत्रता सेनानी की अमर गाथा
#नागालैंड #पुण्यतिथि_स्मरण : महान स्वतंत्रता सेनानी रानी गाइदिनल्यू के योगदान को नमन। रानी गाइदिनल्यू ने किशोरावस्था में ब्रिटिश शासन के विरुद्ध विद्रोह किया। जन्म 26 जनवरी 1915, लोंगकाओ गाँव, तमेंगलोंग क्षेत्र। वर्ष 1932 में गिरफ्तारी, लगभग 14 वर्ष का कारावास। जवाहरलाल नेहरू ने दिया ‘रानी’ की उपाधि। वर्ष 1982 में…
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पुराने रिश्तों को पुनर्जीवित करने का महापर्व है चुनाव: शर्मिला वर्मा
#निकाय_चुनाव #चुनावी_महापर्व : मतदान नजदीक आते तक ठंडे पड़े रिश्तों में बढ़ी गर्माहट। कई वार्डों में 10–11 प्रत्याशी मैदान में सक्रिय। सुबह से रात तक तेज घर-घर जनसंपर्क अभियान। रिश्तों में बढ़ी नजदीकियां और सामाजिक दबाव। युवतियों और महिलाओं की दैनिक मजदूरी पर चुनावी सक्रियता। मतदाताओं से विकास के आधार…
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लेफ्टिनेंट जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा: 1971 की रणनीति जिसने बांग्लादेश को दिलाई आज़ादी
#भारत #सैन्य_इतिहास : 1971 भारत-पाक युद्ध में निर्णायक नेतृत्व। लेफ्टिनेंट जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा ने पूर्वी कमान का नेतृत्व किया। 16 दिसंबर 1971, ढाका में ऐतिहासिक आत्मसमर्पण। 93 हजार पाकिस्तानी सैनिकों ने डाले हथियार। आत्मसमर्पण प्रक्रिया में जेनेवा समझौते का पालन सुनिश्चित। भूमिका की सराहना स्वयं फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ…
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आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानंद सरस्वती की जयंती पर समाज ने किया नमन और उनके सुधारवादी विचारों का स्मरण
#जयंती_विशेष #दयानंद_जयंती : समाज सुधार और वेद प्रचार के अग्रदूत को श्रद्धांजलि। 12 फरवरी 1824 को जन्मे स्वामी दयानंद सरस्वती समाज सुधारक थे। 1875 में आर्य समाज की स्थापना की। अंधविश्वास, मूर्तिपूजा और जातिवाद का विरोध किया। महिलाओं की शिक्षा और समान अधिकार का समर्थन किया। वेदों के पुनः प्रचार…
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नगर निकाय चुनाव में प्रत्याशी ही नहीं, मतदाता भी असमंजस में; रिश्तों, जाति, काम और पैसों के बीच उलझा लोकतंत्र
#नगरनिगम #चुनावीमाहौल : प्रत्याशियों की भीड़ से मतदाता दिग्भ्रमित और सामाजिक समीकरणों में उलझे। बहुकोणीय मुकाबले से मतदाता असमंजस में। रिश्ते, जाति, काम और धन—सब बन रहे निर्णायक कारक। घर-घर संपर्क से गृहणियों की दिनचर्या प्रभावित। चुनावी प्रतीकों और प्रचार शैली से बढ़ी दिलचस्पी। सोशल मीडिया पर तीखापन, आमने-सामने शालीनता…
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वीर आदिवासी क्रांतिकारी तेलंगा खड़िया की जन्मजयंती पर स्मृति-आह्वान, उनका साहस और बलिदान याद
#गुमला #स्वतंत्रता_संग्राम : आदिवासी क्रांतिकारी तेलंगा खड़िया के साहस और बलिदान को श्रद्धांजलि दी गई। वीर आदिवासी क्रांतिकारी तेलंगा खड़िया का जन्म 1806 में गुमला के मुरगु गांव में हुआ। उन्होंने 13 पंचायतों का गठन कर आदिवासी स्वशासन स्थापित किया। युवाओं को हथियार प्रशिक्षण दिया और सशस्त्र सेना बनाई। 1850-1860…
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मन्मथनाथ गुप्त की जयंती पर विशेष: काकोरी के युवा क्रांतिकारी से लेकर इतिहास के विश्वसनीय दस्तावेजकार तक की प्रेरक यात्रा
#वाराणसी #क्रांतिकारी_विरासत : 7 फरवरी को जन्मे मन्मथनाथ गुप्त ने सशस्त्र संघर्ष और साहित्य दोनों के माध्यम से स्वतंत्रता आंदोलन को दी नई दिशा। मन्मथनाथ गुप्त का जन्म 7 फरवरी 1908, वाराणसी में हुआ। मात्र 13 वर्ष की आयु में असहयोग आंदोलन में भाग लेकर गए जेल। 9 अगस्त 1925…
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गुरबख्श सिंह ढिल्लों की विरासत: साहस, स्वाभिमान और स्वतंत्रता के संकल्प की अमिट गाथा
#स्वतंत्रता_संग्राम : आज़ाद हिंद फ़ौज के कर्नल ढिल्लों का प्रेरक जीवन और राष्ट्रीय चेतना पर प्रभाव। 18 मार्च 1914 को जन्मे थे गुरबख्श सिंह ढिल्लों। आज़ाद हिंद फ़ौज में कर्नल के रूप में निभाई अहम भूमिका। मलाया और बर्मा मोर्चों पर दिखाया नेतृत्व और साहस। लाल क़िला मुक़दमा बना राष्ट्रीय…
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छायावाद का अंतिम गौरव: आचार्य जानकी वल्लभ शास्त्री की साहित्यिक विरासत
#हिंदीसाहित्य #साहित्यिकविरासत : छायावाद की परंपरा को अंतिम आलोक देने वाले आचार्य जानकी वल्लभ शास्त्री। आचार्य जानकी वल्लभ शास्त्री को छायावाद का पाँचवाँ स्तंभ माना जाता है। सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ का गहरा साहित्यिक सान्निध्य। संस्कृत और हिंदी दोनों भाषाओं में कालजयी कृतियाँ। ‘राधा’ महाकाव्य में छायावाद का आधुनिक दार्शनिक विस्तार।…
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चौरी चौरा कांड 1922 जब अहिंसा की कसौटी पर खड़ा हुआ स्वतंत्रता संग्राम
#उत्तरप्रदेश #स्वतंत्रताआंदोलन : चौरी चौरा की हिंसक घटना ने असहयोग आंदोलन की दिशा बदल दी। 4 फरवरी 1922 को चौरी चौरा में हुई हिंसक झड़प। पुलिस थाने में आग लगने से 22 पुलिसकर्मियों की मृत्यु। महात्मा गांधी द्वारा 12 फरवरी 1922 को असहयोग आंदोलन स्थगित। घटना के बाद कांग्रेस के…
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राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर विशेष मानवता की नई शुरुआत का प्रतीक गांधी का बलिदान
#भारत #गांधी_पुण्यतिथि : 30 जनवरी 1948 को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का बलिदान केवल भारत ही नहीं, समूची मानवता के नैतिक विवेक को झकझोर देने वाला ऐतिहासिक क्षण है। 30 जनवरी 1948 को शाम 5 बजकर 17 मिनट पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की हत्या। तीन गोलियों ने भारत की नैतिक चेतना…
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पंडित दीनदयाल उपाध्याय जयंती पर विशेष: विचारों का दीप और राष्ट्रबोध की वैचारिक दिशा
#भारत #जयंती_विशेष : सत्ता से दूर रहकर भी राष्ट्र की वैचारिक दिशा तय करने वाले पंडित दीनदयाल उपाध्याय का चिंतन आज भी भारत के विकास पथ का मार्गदर्शक है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय भारतीय राजनीति के कालजयी चिंतक और राष्ट्रद्रष्टा रहे। 25 सितंबर 1916 को उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में…
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जननायक कर्पूरी ठाकुर का वैचारिक सफर, सामाजिक न्याय की राजनीति को नई दिशा देने वाले महान नेता
#बिहार #कर्पूरी_ठाकुर : संघर्ष, सिद्धांत और सामाजिक समरसता से भरा जीवन भारतीय राजनीति की अमूल्य धरोहर बना। 24 जनवरी 1924 को पितौंझिया, समस्तीपुर में हुआ था जन्म। सामाजिक न्याय और समाजवाद के प्रखर समर्थक के रूप में पहचान। 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय भागीदारी। पिछड़े और वंचित वर्गों…
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कराची के किलर कमोडोर बब्रूवाहन यादव की वीरगाथा: जिसने 1971 के युद्ध में पाकिस्तान की कमर तोड़ दी
#1971_युद्ध #भारतीय_नौसेना : ऑपरेशन ट्राइडेंट और पायथन के जरिए कराची पर निर्णायक हमला कर इतिहास रचने वाले महावीर चक्र विजेता कमोडोर बब्रूवाहन यादव की अद्भुत कहानी। कमोडोर बब्रूवाहन यादव को मिला “किलर ऑफ कराची” का गौरव। ऑपरेशन ट्राइडेंट ने कराची बंदरगाह को किया तबाह। पीएनएस खैबर सहित कई पाकिस्तानी जहाज…
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News देखो TeamJanuary 20, 2026गोलियां खत्म हुईं तो खंजर से लड़े भारत मां के लाल करम सिंह: जब टिथवाल में बने पाकिस्तान के लिए यमराज
#टिथवाल #परमवीर_चक्र : लांस नायक करम सिंह की वीरता ने 1948 में कश्मीर की धरती पर दुश्मन के आठ हमले नाकाम किए। लांस नायक करम सिंह ने अकेले पाकिस्तानी हमलों को रोका। 13 अक्टूबर 1948 को टिथवाल के रीछमार गली में अद्भुत शौर्य। गोला-बारूद खत्म होने पर खंजर से दुश्मनों…
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महाराणा प्रताप स्वाभिमान और वीरता के अमर प्रतीक जिन्होंने मुगल साम्राज्य के आगे नहीं झुकाया सिर
#इतिहास_विशेष : महाराणा प्रताप का जीवन संघर्ष, स्वतंत्रता और आत्मसम्मान की अद्वितीय गाथा है। महाराणा प्रताप सिंह का जन्म 9 मई 1540 को कुम्भलगढ़ दुर्ग में हुआ। वे मेवाड़ के शिशोदिया वंश के 13वें शासक थे। मुगल सम्राट अकबर की अधीनता को जीवनभर अस्वीकार किया। 18 जून 1576 को हल्दीघाटी…
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रांगेय राघव जयंती विशेष: संघर्ष, संवेदना और सामाजिक चेतना की साहित्यिक विरासत
#जयंती_विशेषांक #हिंदी_साहित्य : प्रगतिशील चेतना के लेखक रांगेय राघव की जयंती पर साहित्यिक अवदान का स्मरण। रांगेय राघव का जन्म 17 जनवरी 1923 को आगरा में हुआ। मूल नाम त्र्यंबक वीरराघवाचार्य, मात्र 39 वर्ष की आयु में निधन। साहित्य को सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बनाने वाले प्रगतिशील लेखक। उपन्यास, कहानी,…
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सैफुद्दीन किचलू: भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान सेनानी और संवेदनशील नेता की जीवनी
#भारतीय_स्वतंत्रता_आंदोलन : 15 जनवरी को जन्मे सैफुद्दीन किचलू की शिक्षा, करियर और योगदान का संक्षिप्त विवरण। सैफुद्दीन किचलू का जन्म 15 जनवरी 1888 को अमृतसर, पंजाब में हुआ। कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से स्नातक और लंदन से बार एट लॉ की डिग्री प्राप्त। स्वतंत्रता आंदोलन में रोलेट एक्ट विरोध और खिलाफत आंदोलन…
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भारतीय सेना दिवस 2026: पराक्रम, समर्पण और सैन्य स्वायत्तता का गौरवशाली प्रतीक
#भारत #सेना_दिवस : भारतीय सेना के पहले भारतीय कमांडर इन चीफ की ऐतिहासिक विरासत को नमन। 15 जनवरी 1949 को भारतीय सेना को मिला पहला भारतीय नेतृत्व। फील्ड मार्शल के.एम. करियप्पा बने पहले भारतीय कमांडर इन चीफ। भारतीय सेना के शौर्य, बलिदान और अनुशासन को समर्पित दिन। सैन्य स्वायत्तता और…
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