#लातेहार #वन्यजीव_सुरक्षा : बरकाकाना–बरवाडीह रेलखंड पर ट्रेन की चपेट में आए शावक की मौत, स्थायी समाधान की उठी मांग।
लातेहार जिले में बरकाकाना–बरवाडीह रेलखंड पर ट्रेन की चपेट में आए हाथी शावक की इलाज के दौरान मौत हो गई। वन विभाग ने जेसीबी से रास्ता बनवाकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। घटना के बाद जनप्रतिनिधियों ने रेलवे और वन विभाग से समन्वय कर स्थायी समाधान की मांग की है।
- बरकाकाना–बरवाडीह रेलखंड पर हुआ था हादसा।
- घायल हाथी शावक की मौत, वन विभाग ने की पुष्टि।
- जेसीबी से रास्ता बनाकर शव पोस्टमार्टम को भेजा गया।
- विधायक प्रतिनिधि आदर्श रविराज ने जताई गहरी संवेदना।
- हाथी कॉरिडोर, अंडरपास और गति नियंत्रण की उठी मांग।
लातेहार जिले में सोमवार देर रात हुए रेल हादसे के बाद घायल हाथी शावक की मौत हो गई। वन विभाग ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा रहा है। घटनास्थल जंगल क्षेत्र में होने के कारण जेसीबी मशीन से अस्थायी रास्ता तैयार किया गया, ताकि शव को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।
यह हादसा बरकाकाना–बरवाडीह रेलखंड पर उस समय हुआ था, जब हाथियों का झुंड पारंपरिक मार्ग से रेलवे लाइन पार कर रहा था। ट्रेन की चपेट में आने से शावक गंभीर रूप से घायल हो गया था। घटना के बाद से ही हाथियों का झुंड आसपास डटा रहा, जिससे रेल परिचालन प्रभावित हुआ।
जेसीबी से बनाया गया अस्थायी मार्ग
वन विभाग की टीम ने स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों के सहयोग से जेसीबी की मदद से जंगल के बीच रास्ता बनाया। इसके बाद शावक के शव को बाहर निकालकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। अधिकारियों के अनुसार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
घटना के बाद इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मार्ग वर्षों से हाथियों का पारंपरिक आवागमन क्षेत्र रहा है।
“अत्यंत दुखद घटना” : आदर्श रविराज
चंदवा प्रखंड अंतर्गत पुतरीटोला से चकला की ओर जाने वाले हाथी मार्ग में हुई इस घटना पर विधायक प्रतिनिधि आदर्श रविराज ने गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा:
“हाथी शावक की रेल दुर्घटना में मौत अत्यंत दुखद है। यह मार्ग हाथियों का नियमित कॉरिडोर रहा है, जहां से वे वर्षों से आवाजाही करते आ रहे हैं। इसके बावजूद समुचित सुरक्षा प्रबंध का अभाव चिंताजनक है।”
उन्होंने रेलवे विभाग और वन विभाग से आपसी समन्वय स्थापित कर अविलंब ठोस पहल करने की मांग की।
स्थायी वन्यजीव कॉरिडोर और अंडरपास की मांग
आदर्श रविराज ने कहा कि हाथियों के सुरक्षित आवागमन हेतु चिन्हित स्थान पर स्थायी वन्यजीव कॉरिडोर का निर्माण किया जाना चाहिए। साथ ही अंडरपास की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि हाथियों को रेलवे लाइन पार करने में किसी प्रकार की बाधा न हो।
उन्होंने संवेदनशील रेलखंडों पर ट्रेनों की गति नियंत्रित करने, आधुनिक चेतावनी तंत्र विकसित करने तथा कुछ दूरी पर मजबूत सुरक्षा गार्डवाल या बैरियर निर्माण की भी आवश्यकता जताई। उनका कहना था कि यदि समय रहते समुचित सुरक्षा उपाय नहीं किए गए, तो भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति से इंकार नहीं किया जा सकता।
पहले भी हो चुकी है घटना
ज्ञात हो कि अक्टूबर 2024 में भी इसी क्षेत्र में ट्रेन की चपेट में आने से एक हाथी शावक की मौत हो चुकी थी। डेढ़ वर्ष के भीतर दूसरी घटना ने वन्यजीव सुरक्षा और रेलवे प्रशासन की सतर्कता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह क्षेत्र हाथियों का पारंपरिक कॉरिडोर है। ऐसे में संयुक्त सर्वे कर दीर्घकालिक समाधान लागू करना अत्यंत आवश्यक है।
न्यूज़ देखो: विकास और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन जरूरी
लातेहार की यह घटना केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि नीतिगत चूक का संकेत भी है। बार-बार हो रही घटनाएं बताती हैं कि समन्वय और तकनीकी उपायों की तत्काल आवश्यकता है। विकास की रफ्तार के साथ वन्यजीव सुरक्षा को समान प्राथमिकता देना ही स्थायी समाधान है।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
अब ठोस कदम उठाने का समय
वन्यजीवों की सुरक्षा हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।
कॉरिडोर, अंडरपास और गति नियंत्रण जैसे उपाय अनिवार्य बनें।
मानव और प्रकृति के बीच संतुलन ही भविष्य सुरक्षित करेगा।
आपके अनुसार इस रेलखंड पर क्या ठोस कदम उठाए जाने चाहिए?
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