
#जारी #विदाई_समारोह : विद्यालय सभागार में सम्मान, भावनाएं और संस्कारों की झलक देखने को मिली।
गुमला जिले के जारी प्रखंड स्थित राजकीय उत्क्रमित उच्च विद्यालय, जारी में बुधवार को भावभीना विदाई समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर सेवानिवृत्त सहायक शिक्षिका विक्टोरिया एक्का सहित कक्षा दसवीं एवं बारहवीं के छात्र-छात्राओं को सम्मानपूर्वक विदाई दी गई। कार्यक्रम में शिक्षा, संस्कार और भावनात्मक जुड़ाव की झलक साफ नजर आई। विद्यालय परिवार ने शिक्षिका के दीर्घकालीन योगदान और विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
- राजकीय उत्क्रमित उच्च विद्यालय, जारी में भावभीना विदाई समारोह आयोजित।
- सेवानिवृत्त शिक्षिका विक्टोरिया एक्का को अंगवस्त्र व उपहार देकर सम्मान।
- दसवीं और बारहवीं के छात्र-छात्राओं को दी गई औपचारिक विदाई।
- विद्यार्थियों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रभावशाली प्रस्तुति।
- प्रधानाध्यापिका जोसेफा टोप्पो ने शिक्षिका के योगदान को बताया स्मरणीय।
- शिक्षक, अभिभावक और विद्यालय कर्मियों की व्यापक उपस्थिति।
जारी प्रखंड क्षेत्र के राजकीय उत्क्रमित उच्च विद्यालय, जारी के सभागार में आयोजित विदाई समारोह भावनाओं से सराबोर रहा। समारोह में जहां विद्यार्थियों के भविष्य की शुभकामनाएं दी गईं, वहीं वर्षों तक विद्यालय को सेवा देने वाली शिक्षिका के योगदान को सम्मान के साथ याद किया गया। पूरे कार्यक्रम के दौरान सम्मान, कृतज्ञता और अपनापन स्पष्ट रूप से झलकता रहा।
सम्मान और विदाई के साथ हुआ समारोह का शुभारंभ
बुधवार को आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यालय परिवार द्वारा सेवानिवृत्त सहायक शिक्षिका विक्टोरिया एक्का को अंगवस्त्र एवं उपहार भेंट कर सम्मानित किया गया। इसके साथ ही कक्षा दसवीं एवं बारहवीं के छात्र-छात्राओं को भी सम्मानपूर्वक विदाई दी गई। समारोह की शुरुआत गरिमामय वातावरण में हुई, जिसने उपस्थित सभी लोगों को भावुक कर दिया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां
विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने समारोह को विशेष बना दिया। गीत, नृत्य और भावनात्मक प्रस्तुतियों के माध्यम से छात्रों ने अपने शिक्षकों और विद्यालय के प्रति आभार प्रकट किया। इन प्रस्तुतियों के दौरान कई क्षण ऐसे रहे, जब शिक्षकों और अभिभावकों की आंखें नम हो गईं।
शिक्षिका के सेवाकाल को किया गया याद
समारोह को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि विक्टोरिया एक्का ने विद्यालय में लगभग 12 वर्षों तक अनुशासित, कर्तव्यनिष्ठ और प्रेरणादायी शिक्षिका के रूप में अपनी सेवाएं दीं। उन्होंने विद्यार्थियों को केवल पाठ्य ज्ञान ही नहीं दिया, बल्कि उनमें नैतिक मूल्यों, अनुशासन और आत्मविश्वास का भी विकास किया। शिक्षा के क्षेत्र में उनका योगदान विद्यालय के इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा।
प्रधानाध्यापिका का प्रेरणादायी संबोधन
विद्यालय की प्रधानाध्यापिका जोसेफा टोप्पो ने अपने संबोधन में कहा:
“विक्टोरिया एक्का की पढ़ाने की शैली, उनका समर्पण और विद्यार्थियों के प्रति स्नेह हमेशा स्मरणीय रहेगा। उन्होंने विद्यालय को एक परिवार की तरह संभाला और बच्चों के सर्वांगीण विकास में अहम भूमिका निभाई।”
सेवानिवृत्त शिक्षिका ने साझा की भावनाएं
अपने विदाई संबोधन में सेवानिवृत्त शिक्षिका विक्टोरिया एक्का ने विद्यालय परिवार और विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा:
“विद्यालय में शिक्षकों और विद्यार्थियों से मिला स्नेह और सम्मान मेरे लिए अमूल्य धरोहर है। यहां बिताए गए क्षण और आप सभी का प्रेम मैं जीवन भर अपने साथ लेकर जाऊंगी।”
बड़ी संख्या में लोगों की रही उपस्थिति
इस अवसर पर विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाएं, विद्यालय कर्मी, छात्र-छात्राएं एवं अभिभावक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सभी ने शिक्षिका के उज्ज्वल भविष्य की कामना की और विद्यार्थियों को आगे की पढ़ाई एवं जीवन यात्रा के लिए शुभकामनाएं दीं।
शिक्षा और संस्कार का संदेश
विदाई समारोह केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह शिक्षा और संस्कारों की परंपरा को आगे बढ़ाने का प्रतीक भी बना। विद्यार्थियों ने अपने शिक्षकों से मिले मार्गदर्शन को जीवन में आत्मसात करने का संकल्प लिया।
न्यूज़ देखो: शिक्षा में योगदान का सम्मान जरूरी
राजकीय उत्क्रमित उच्च विद्यालय, जारी में आयोजित यह विदाई समारोह बताता है कि शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संबंधों, संस्कारों और मूल्यों की भी वाहक है। शिक्षिका विक्टोरिया एक्का का योगदान सराहनीय रहा, जिसे विद्यालय परिवार ने सम्मान के साथ याद किया। ऐसे आयोजनों से शिक्षकों और विद्यार्थियों के बीच भावनात्मक जुड़ाव मजबूत होता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
गुरुजनों का सम्मान, समाज की पहचान
शिक्षक समाज की नींव होते हैं और उनका सम्मान हमारी सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करता है। विदाई के ये क्षण विद्यार्थियों को कृतज्ञता और जिम्मेदारी का भाव सिखाते हैं।
अपने शिक्षकों से मिले संस्कारों को जीवन में उतारें।
शिक्षा और सम्मान की इस परंपरा को आगे बढ़ाएं।
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