
#छतरपुर #नगरपंचायतचुनाव : अध्यक्ष पद के प्रत्याशी सुभाष मिश्रा ने घर-घर जाकर मतदाताओं से सीधे संवाद पर दिया जोर।
छतरपुर नगर पंचायत चुनाव में अध्यक्ष पद के प्रत्याशी सुभाष मिश्रा उर्फ बुल बाबा अपने सादगीपूर्ण जनसंपर्क अभियान को लेकर चर्चा में हैं। जहां अन्य प्रत्याशी बड़े काफिलों और वादों के साथ प्रचार कर रहे हैं, वहीं वे पैदल चलकर घर-घर पहुंच रहे हैं। जनता की राय से योजना बनाने की बात ने उनके अभियान को अलग पहचान दी है। समर्थकों के अनुसार उनकी ईमानदार छवि को सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है।
- सुभाष मिश्रा उर्फ बुल बाबा का सादा जनसंपर्क बना चर्चा का विषय।
- प्रचार वाहन के बजाय पैदल चलकर घर-घर संपर्क।
- घोषणा पत्र के बजाय जनता की राय से योजना बनाने की बात।
- पूर्व में उपाध्यक्ष पद पर 3000 से अधिक मतों से विजयी।
- भ्रष्टाचार सिद्ध होने पर पद छोड़ने की सार्वजनिक घोषणा।
छतरपुर, पलामू। नगर पंचायत अध्यक्ष पद के चुनावी मैदान में इस बार प्रचार का अंदाज चर्चा का विषय बना हुआ है। अध्यक्ष पद के प्रत्याशी सुभाष मिश्रा उर्फ बुल बाबा अपने सादगीपूर्ण जनसंपर्क अभियान के कारण अलग पहचान बना रहे हैं। जहां अधिकांश प्रत्याशी काफिला, प्रचार वाहन और बड़े-बड़े वादों के साथ मतदाताओं तक पहुंच रहे हैं, वहीं सुभाष मिश्रा हाथ में पर्ची लेकर स्वयं घर-घर जाकर लोगों से संवाद कर रहे हैं।
प्रतिदिन कई किलोमीटर पैदल चलकर वे विभिन्न वार्डों में मतदाताओं से मुलाकात कर रहे हैं। समर्थकों का कहना है कि यह शैली उन्हें अन्य प्रत्याशियों से अलग और जनसामान्य के करीब दर्शा रही है। अलग-अलग वार्डों में हर वर्ग के लोगों से उन्हें सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलने की बात सामने आ रही है।
घोषणा पत्र नहीं, जनता की राय से बनेगी योजना
चुनावी माहौल में जहां बड़े-बड़े वादों और विस्तृत घोषणा पत्रों की चर्चा रहती है, वहीं सुभाष मिश्रा का रुख कुछ अलग है। वे न तो लंबा-चौड़ा घोषणा पत्र लेकर चल रहे हैं और न ही अवास्तविक वादों की सूची सुना रहे हैं।
सुभाष मिश्रा ने कहा, “मैं चुनाव जनता के लिए लड़ रहा हूं। योजनाएं बंद कमरे में नहीं बनेंगी। जनता की सलाह, जनसभा और समीक्षा के बाद ही योजनाएं लागू की जाएंगी।”
उन्होंने स्पष्ट कहा कि वे वादों से ज्यादा काम पर विश्वास करते हैं। उनका कहना है कि विकास की प्राथमिकताएं जनता तय करेगी और उसी के अनुरूप कार्य किया जाएगा।
उन्होंने कहा, “मेरा काम ही मेरी पहचान बनेगा। अगर एक रुपये भी भ्रष्टाचार का आरोप सिद्ध हो जाए तो मैं पद से इस्तीफा दे दूंगा।”
यह बयान उनके समर्थकों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है और इसे उनकी पारदर्शिता के दावे से जोड़कर देखा जा रहा है।
उपाध्यक्ष से अध्यक्ष पद तक की यात्रा
गौरतलब है कि पिछली बार उपाध्यक्ष पद के चुनाव में सुभाष मिश्रा को 3000 से अधिक मत प्राप्त हुए थे और वे विजयी रहे थे। हालांकि सीमित अधिकारों और शक्तियों के कारण वे अपनी कई विकास योजनाओं को पूरी तरह लागू नहीं कर पाए।
समर्थकों का कहना है कि इसी अनुभव और सक्रियता को देखते हुए इस बार जनता ने स्वयं उन्हें अध्यक्ष पद के लिए आगे आने का आग्रह किया है। उनका मानना है कि अध्यक्ष पद पर अधिक अधिकार मिलने से विकास योजनाओं को जमीन पर उतारने में आसानी होगी।
सादगीपूर्ण शैली से मिल रही अलग पहचान
चुनावी राजनीति में अक्सर बड़े मंच, पोस्टर-बैनर और रोड शो चर्चा में रहते हैं, लेकिन सुभाष मिश्रा का सादा और सीधा संवाद मॉडल अलग नजर आ रहा है। वे प्रत्येक घर में पहुंचकर व्यक्तिगत स्तर पर संवाद कर रहे हैं, जिससे मतदाताओं के साथ सीधा संपर्क स्थापित हो रहा है।
शहर में उनकी साफ, स्वच्छ और ईमानदार छवि को लेकर व्यापक चर्चा है। हालांकि अंतिम निर्णय मतदाताओं के हाथ में है, लेकिन उनके प्रचार का तरीका चुनावी समीकरणों को रोचक बना रहा है।
न्यूज़ देखो: क्या सादगी का मॉडल बदलेगा चुनावी समीकरण
छतरपुर नगर पंचायत चुनाव में सुभाष मिश्रा का सादगीपूर्ण प्रचार अभियान पारंपरिक चुनावी शैली से अलग दिखाई दे रहा है। बड़े वादों के बजाय जनता की राय पर जोर देना एक अलग रणनीति है। अब देखना होगा कि मतदाता इस मॉडल को कितना समर्थन देते हैं और क्या यह शैली चुनावी परिणामों पर प्रभाव डालती है।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
लोकतंत्र में जनता ही सर्वोच्च
चुनाव केवल वादों का मंच नहीं, जवाबदेही की परीक्षा भी है।
जनता की भागीदारी से ही सही नेतृत्व का चयन संभव है।
मतदान से पहले हर प्रत्याशी के विचार और कार्यशैली को समझें।
सक्रिय नागरिक बनकर अपने शहर के भविष्य का निर्णय करें।
आपके अनुसार किस तरह का नेतृत्व शहर के लिए बेहतर है?
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