
#बरवाडीह #पेसा_कानून : राज्य सरकार के ऐतिहासिक निर्णय पर झामुमो कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने जुलूस निकालकर जताई खुशी।
झारखंड में पेसा कानून लागू होने के बाद बरवाडीह में खुशी का माहौल देखने को मिला। इस ऐतिहासिक निर्णय के स्वागत में शुक्रवार को झारखंड मुक्ति मोर्चा की ओर से भव्य जुलूस निकाला गया। जुलूस में बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता, ग्रामसभा प्रतिनिधि और आम नागरिक शामिल हुए। पारंपरिक वेशभूषा, ढोल-नगाड़ों और नारों के साथ लोगों ने इस फैसले को आदिवासी स्वशासन की दिशा में अहम कदम बताया।
- पेसा कानून लागू होने की खुशी में झामुमो ने निकाला जुलूस।
- भगवान बिरसा मुंडा और डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण।
- बरवाडीह बाजार के प्रमुख चौक-चौराहों से गुजरा जुलूस।
- ग्रामसभा और आदिवासी अधिकारों पर वक्ताओं ने रखे विचार।
- मिठाई वितरण कर लोगों ने साझा की खुशी।
झारखंड सरकार द्वारा पेसा कानून लागू किए जाने के बाद लातेहार जिले के बरवाडीह प्रखंड में जनउत्साह साफ तौर पर देखने को मिला। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत शुक्रवार को झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की ओर से बरवाडीह मुख्यालय में एक भव्य जुलूस निकाला गया। यह जुलूस राज्य सरकार के फैसले के प्रति समर्थन और खुशी जाहिर करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था।
जुलूस की शुरुआत पुराने प्रखंड कार्यालय स्थित भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुई। इसके बाद कार्यकर्ताओं ने डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर भी माल्यार्पण कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया।
प्रखंड अध्यक्ष के नेतृत्व में निकला जुलूस
इस भव्य जुलूस का नेतृत्व झामुमो प्रखंड अध्यक्ष शशिभूषण तिवारी ने किया। उनके नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ता, ग्रामसभा के प्रतिनिधि, बुद्धिजीवी वर्ग और आम नागरिक बड़ी संख्या में शामिल हुए। जुलूस में शामिल लोग हाथों में झंडा और बैनर लिए हुए थे तथा पारंपरिक वेशभूषा में ढोल-नगाड़ों के साथ नाचते-गाते आगे बढ़ रहे थे।
जुलूस बिरसा मुंडा प्रतिमा स्थल से निकलकर अंबेडकर चौक, आदर्श नगर चौक होते हुए पूरे बरवाडीह बाजार का भ्रमण करता हुआ आगे बढ़ा। पूरे मार्ग में “पेसा कानून लागू हुआ”, “ग्रामसभा सशक्त होगी” जैसे नारों से माहौल गूंजता रहा।
मुख्य अतिथि बुद्धेश्वर उरांव ने किया संबोधन
कार्यक्रम में झामुमो जिला सचिव बुद्धेश्वर उरांव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। जुलूस के दौरान और सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने पेसा कानून के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
बुद्धेश्वर उरांव ने कहा: “पेसा कानून का लागू होना आदिवासी समाज के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है। इससे ग्रामसभा को वास्तविक अधिकार मिलेंगे और गांव अपने संसाधनों पर स्वयं निर्णय ले सकेंगे।”
उन्होंने कहा कि यह कानून आदिवासी समाज को संवैधानिक अधिकारों से जोड़ता है और ग्राम स्वशासन की अवधारणा को मजबूत करता है। उन्होंने सभी से पेसा कानून के प्रावधानों को समझने और उसे जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू कराने में सहयोग करने की अपील की।
ग्रामसभा को सशक्त बनाने पर दिया गया जोर
जुलूस के दौरान वक्ताओं ने पेसा कानून के क्रियान्वयन, आदिवासी समाज के अधिकार, और ग्रामसभा की भूमिका पर लोगों को जागरूक किया। बताया गया कि इस कानून के तहत ग्रामसभा को जल, जंगल और जमीन से जुड़े मामलों में निर्णायक भूमिका मिलेगी।
वक्ताओं ने कहा कि वर्षों से आदिवासी समाज अपने अधिकारों की मांग करता आ रहा था और अब सरकार के इस निर्णय से उनकी आवाज को संवैधानिक मान्यता मिली है। यह निर्णय ग्रामीण लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम है।
मिठाई बांटकर साझा की गई खुशी
जुलूस के दौरान और समापन के समय लोगों के बीच मिठाइयों का वितरण किया गया। कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी साझा की और सरकार के फैसले का स्वागत किया। पूरे कार्यक्रम के दौरान उत्सव जैसा माहौल बना रहा।
बड़ी संख्या में नेता और कार्यकर्ता रहे मौजूद
इस कार्यक्रम में झामुमो महिला मोर्चा की जिला उपाध्यक्ष आरती देवी दास, अरुण सिंह, विक्टर क्रिकेटर, सुपीरियन मिज, रितेश गुप्ता, संजय उरांव, आमिर खान, अफजल अंसारी, महेंद्र प्रजापति, श्रीमती रुक्मिणी देवी, विपिन बिहारी सिंह, धर्म सिंह, श्रीमती सविता देवी, अमरिंदर सिंह, जेहान टोपनो, कुर्बान अंसारी सहित दर्जनों कार्यकर्ता और समर्थक उपस्थित थे।
सभी ने एक स्वर में कहा कि पेसा कानून को प्रभावी रूप से लागू कराना अब सामूहिक जिम्मेदारी है।
आदिवासी स्वशासन की दिशा में अहम कदम
बरवाडीह क्षेत्र के ग्रामीणों और बुद्धिजीवियों का मानना है कि पेसा कानून लागू होने से गांवों को आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलेगी। ग्रामसभा की शक्ति बढ़ेगी और विकास योजनाओं में स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित होगी।
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बरवाडीह में निकला यह जुलूस दर्शाता है कि पेसा कानून को लेकर जनता में गहरी उम्मीदें हैं। सरकार का यह निर्णय ग्रामसभा और आदिवासी समाज को सशक्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब चुनौती इसके प्रभावी क्रियान्वयन की है, ताकि कानून का वास्तविक लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
अधिकारों की समझ से ही बनेगा पेसा कानून प्रभावी
पेसा कानून केवल एक अधिनियम नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर गांवों की नींव है।
ग्रामसभा की ताकत तभी बढ़ेगी जब लोग अपने अधिकारों को जानेंगे।
आप भी इस बदलाव का हिस्सा बनें और जागरूकता फैलाएं।
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