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जनजातीय कौशल केंद्र लचरागढ़ में बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर निबंध और रंगोली प्रतियोगिता का आयोजन, महिलाओं ने दिखाया कौशल

#सिमडेगा #जनजातीय_कौशल : महिलाओं ने बिरसा मुंडा के आदर्शों पर आधारित निबंध और रंगोली के माध्यम से अपनी प्रतिभा और सृजनात्मकता का प्रदर्शन किया
  • सिमडेगा जिले के कोलेबिरा प्रखंड, लचरागढ़ पंचायत स्थित जनजातीय कौशल केंद्र में निबंध और रंगोली प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।
  • यह कार्यक्रम धरती आबा बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती और जनजातीय गौरव पखवाड़ा के उपलक्ष्य में आयोजित हुआ।
  • प्रतियोगिता में भाग लेने वाली महिलाओं ने निबंध लिखे और रंग-बिरंगी रंगोलियां बनाकर अपनी कला का प्रदर्शन किया।
  • कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं को सृजनात्मक कौशल, लेखन कला और मानसिक विकास के साथ-साथ रोजगारपरक प्रशिक्षण प्रदान करना था।

सिमडेगा जिले के कोलेबिरा प्रखंड अंतर्गत लचरागढ़ पंचायत में स्थित जनजातीय कौशल केंद्र लचरागढ़ में धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के अवसर पर महिलाओं के लिए निबंध और रंगोली प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम केंद्र में कंप्यूटर और सिलाई प्रशिक्षण प्राप्त कर रही महिलाओं के बीच संपन्न हुआ, जिसमें उन्होंने अपनी प्रतिभा और रचनात्मकता का बेहतरीन प्रदर्शन किया।

कार्यक्रम का उद्देश्य और महत्व

जनजातीय कौशल केंद्र का उद्देश्य बेरोजगार महिलाओं को कौशल प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है। वर्तमान में केंद्र में सिलाई और कंप्यूटर प्रशिक्षण चल रहा है, जबकि फूड प्रोसेसिंग प्रशिक्षण के लिए एडमिशन प्रक्रिया भी प्रारंभ हो चुकी है।

प्रतियोगिता के माध्यम से महिलाओं ने न केवल अपनी रचनात्मक कला और लेखन क्षमता का प्रदर्शन किया, बल्कि झारखंड की जनजातीय विरासत और संस्कृति को भी जीवंत रखा। आयोजकों ने बताया कि इस प्रकार की प्रतियोगिताएं महिलाओं में मानसिक विकास, रचनात्मक सोच और घरेलू कौशल को बढ़ावा देने में सहायक होती हैं।

डायरेक्टर क्रांति मिश्रा ने कहा: “इस प्रतियोगिता का उद्देश्य महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ाना और उन्हें रोजगारपरक कौशल सिखाना है ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।”

प्रतियोगिता की भागीदारी और उत्साह

प्रतियोगिता में ग्रुप A और ग्रुप B की सभी प्रशिक्षु महिलाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। रंगोलियों की विविधता और निबंधों की गुणवत्ता ने आयोजकों और अतिथियों को प्रभावित किया।

कंप्यूटर टीचर अर्चना चीक बड़ाइक ने कहा: “महिलाओं ने अपनी प्रतिभा और मेहनत से साबित किया कि वे किसी भी चुनौती का सामना कर सकती हैं और नए कौशल सीखकर समाज में योगदान दे सकती हैं।”

सिलाई प्रशिक्षक रूबी देवी ने भी प्रतिभागियों को प्रोत्साहित किया और उन्हें अपने कौशल को और निखारने के लिए मार्गदर्शन दिया।

आयोजकों और उपस्थित अतिथियों की भूमिका

कार्यक्रम में क्रांति मिश्रा (डायरेक्टर), अर्चना चीक बड़ाइक, रूबी देवी, दीपिका कुमारी, समाजसेवी संजय मिश्रा, होलिका देवी, महिला सखी दीदी तारा देवी, लखेश्वर पंडा, मनास पंडा, मोतीलाल पंडा और सभी प्रशिक्षु महिलाएं उपस्थित रहीं। आयोजकों ने कार्यक्रम का सुचारु संचालन सुनिश्चित किया और प्रतिभागियों को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहित किया।

समाजसेवी संजय मिश्रा ने कहा: “इस प्रकार की प्रतियोगिताएं न केवल कौशल बढ़ाने में सहायक होती हैं, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित भी करती हैं।”

न्यूज़ देखो: बिरसा मुंडा की जयंती पर महिलाओं ने दिखाया कौशल और रचनात्मकता

इस कार्यक्रम ने स्पष्ट कर दिया कि महिलाओं में न केवल प्रतिभा और रचनात्मकता है, बल्कि वे समाज के लिए सक्रिय और प्रेरक शक्ति भी हैं। जनजातीय कौशल केंद्र जैसी पहलें महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का मार्ग दिखाती हैं और उन्हें रोजगार और समाज सेवा में योगदान के अवसर प्रदान करती हैं।

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सृजनात्मकता और कौशल से समाज में बदलाव लाएँ

महिलाओं के कौशल और प्रतिभा का सशक्तिकरण ही समाज की वास्तविक प्रगति है। आइए हम सभी इस प्रकार के कार्यक्रमों में हिस्सा लेकर, महिलाओं को समर्थन दें, उनके प्रयासों को साझा करें और उनके हुनर को पूरे समाज तक पहुँचाएँ। अपनी राय कमेंट में साझा करें और इस सकारात्मक पहल की सराहना करें।

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Birendra Tiwari

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