
#घाघरा #मंडा_मेला : भोक्ताओं के नगर भ्रमण से शिवभक्ति का माहौल—फुलकुंदी अनुष्ठान रहेगा मुख्य आकर्षण।
गुमला जिले के घाघरा प्रखंड के हापामुनी गांव में पारंपरिक मंडा मेला श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। नगर भ्रमण के दौरान सैकड़ों भोक्ताओं ने भाग लेकर शिवभक्ति का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत किया। “एक बार बोलो शिवा मुनि महेश” के जयकारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। अब मेले के मुख्य आकर्षण फुलकुंदी अनुष्ठान को लेकर लोगों में खास उत्साह है।
- हापामुनी गांव (घाघरा) में पांच दिवसीय मंडा मेला आयोजित।
- सैकड़ों भोक्ताओं ने किया भव्य नगर भ्रमण।
- शिवभक्ति के जयकारों से गूंजा पूरा क्षेत्र।
- 31 मार्च को होगा फुलकुंदी अनुष्ठान।
- श्रद्धालुओं के स्वागत में स्थानीय लोगों ने सेवा भाव दिखाया।
गुमला जिले के घाघरा थाना क्षेत्र अंतर्गत हापामुनी गांव में आयोजित पांच दिवसीय पारंपरिक मंडा मेला इन दिनों पूरे क्षेत्र में आस्था और भक्ति का केंद्र बना हुआ है। सोमवार की शाम सैकड़ों भोक्ताओं ने घाघरा मुख्यालय में भव्य नगर भ्रमण किया, जिससे पूरा इलाका शिवमय हो गया।
नगर भ्रमण के दौरान “एक बार बोलो शिवा मुनि महेश” के जयघोष से वातावरण गुंजायमान हो उठा और श्रद्धालुओं की लंबी कतारों ने आयोजन को भव्य रूप दे दिया।
नगर भ्रमण में उमड़ी भीड़
नगर भ्रमण के दौरान सैकड़ों भोक्ता पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए और पूरे मार्ग पर भक्तिमय माहौल बना दिया। इस दौरान सड़क किनारे लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जो इस दृश्य को देखने के लिए उत्साहित नजर आई।
स्थानीय लोगों ने जगह-जगह भोक्ताओं का स्वागत किया और पानी व फल वितरित कर सेवा भावना का परिचय दिया।
कठोर साधना और आस्था का प्रतीक
मंडा मेला में शामिल भोक्ता भगवान भोलेनाथ की कृपा प्राप्त करने के लिए कठिन तप और साधना करते हैं। वे पांच दिनों तक सख्त नियमों का पालन करते हुए अपनी अटूट श्रद्धा का प्रदर्शन करते हैं।
आयोजकों ने बताया: “यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और इसका धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व अत्यंत विशेष है।”
फुलकुंदी अनुष्ठान रहेगा मुख्य आकर्षण
इस मेले का सबसे बड़ा आकर्षण 31 मार्च को आयोजित होने वाला फुलकुंदी अनुष्ठान है। इस दौरान भोक्ता जलते अंगारों पर नंगे पैर चलकर अपनी आस्था और विश्वास का प्रदर्शन करेंगे।
यह अनुष्ठान क्षेत्र की सबसे अनोखी और रोमांचक परंपराओं में से एक माना जाता है, जिसे देखने के लिए दूर-दराज के गांवों से भी लोग पहुंचते हैं।
श्रद्धालुओं में उत्साह
नगर भ्रमण के सफल आयोजन के बाद अब सभी की नजरें फुलकुंदी अनुष्ठान पर टिकी हैं। इस आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है।
बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति
इस अवसर पर आदित्य भगत, राजेश मणि पाठक, अनिरुद्ध चौबे, आशीष कुमार सोनी, निलेश मणि पाठक, बिंदेश्वर साहू, सुरेंद्र साहू, प्रधान उरांव सहित सैकड़ों की संख्या में भोक्ता और श्रद्धालु उपस्थित रहे।
परंपरा और संस्कृति का जीवंत उदाहरण
मंडा मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि स्थानीय संस्कृति और परंपरा का जीवंत उदाहरण है। यह आयोजन समाज में एकता और आस्था का संदेश देता है।
न्यूज़ देखो: परंपरा में बसती है आस्था की ताकत
घाघरा का मंडा मेला यह दर्शाता है कि ग्रामीण समाज आज भी अपनी परंपराओं और आस्था से गहराई से जुड़ा हुआ है। फुलकुंदी जैसे अनुष्ठान लोगों की आस्था और विश्वास का अनोखा उदाहरण हैं। अब देखना होगा कि यह आयोजन आने वाले वर्षों में किस तरह और विस्तार पाता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
आस्था और परंपरा को सहेजें
हमारी संस्कृति और परंपराएं हमारी पहचान हैं।
ऐसे आयोजन हमें अपनी जड़ों से जोड़ते हैं और समाज में एकता लाते हैं।
आइए, हम इन परंपराओं को सहेजकर अगली पीढ़ी तक पहुंचाएं।
आस्था और विश्वास ही जीवन की सबसे बड़ी शक्ति है।
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