
#पलामू #विश्रामपुर #महाशिवरात्रि : शिव-पार्वती विवाह का पर्व आस्था, संयम और मोक्ष का संदेश देता है।
पलामू जिले के विश्रामपुर में महाशिवरात्रि पर्व को लेकर धार्मिक उत्साह देखा जा रहा है। इस अवसर पर प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित राम निवास तिवारी ने महाशिवरात्रि के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सच्चे मन से किया गया व्रत और शिवलिंग पर जलाभिषेक हजारों वर्षों के पापों का नाश करता है। आगामी 15 फरवरी को यह पर्व श्रद्धा और विधि-विधान के साथ मनाया जाएगा।
- 15 फरवरी, रविवार को देशभर में मनाई जाएगी महाशिवरात्रि।
- ज्योतिषाचार्य पंडित राम निवास तिवारी ने बताया व्रत का आध्यात्मिक महत्व।
- शिवलिंग पर जल, बेलपत्र, भांग और धतूरा अर्पित करना माना गया श्रेष्ठ।
- महाशिवरात्रि को भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह का प्रतीक बताया।
- सच्चे मन से की गई पूजा से हजारों जन्मों के पाप नष्ट होने की मान्यता।
महाशिवरात्रि का पर्व हिंदू धर्म में विशेष आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व रखता है। पलामू प्रमंडल के विश्रामपुर क्षेत्र में इस पर्व को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखा जा रहा है। प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित राम निवास तिवारी ने महाशिवरात्रि के धार्मिक महत्व, पूजा विधि और व्रत कथा के माध्यम से इसके गूढ़ अर्थ को स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि यह पर्व केवल उपवास का नहीं, बल्कि आत्मसंयम, भक्ति और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है।
शिव-पार्वती विवाह का पावन पर्व
पंडित राम निवास तिवारी ने बताया कि महाशिवरात्रि को भगवान शिव की बारात का प्रतीक माना जाता है। इसी दिन उमा महादेव, अर्थात भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था। इस कारण यह पर्व दांपत्य जीवन, समर्पण और तपस्या का संदेश देता है।
उन्होंने कहा कि इस दिन शिव और शक्ति की संयुक्त उपासना से जीवन में संतुलन और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
व्रत और जलाभिषेक का विशेष महत्व
ज्योतिषाचार्य के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर जल चढ़ाना, बेलपत्र अर्पित करना और भांग-धतूरा का भोग लगाना अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। उन्होंने कहा कि यदि श्रद्धालु सच्चे मन, श्रद्धा और विश्वास के साथ पूजा-पाठ करते हैं, तो उनके हजारों जन्मों के पाप तत्क्षण नष्ट हो जाते हैं।
पंडित राम निवास तिवारी ने कहा: “महाशिवरात्रि का व्रत यदि सच्चे मन से किया जाए, तो यह जीवन के सभी दोषों को शांत कर मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है।”
महाशिवरात्रि व्रत कथा का धार्मिक संदेश
पंडित राम निवास तिवारी ने श्रद्धालुओं को महाशिवरात्रि की प्रसिद्ध व्रत कथा भी सुनाई, जो इस पर्व के महत्व को गहराई से समझाती है। कथा के अनुसार, पूर्वकाल में चित्रभानु नामक एक शिकारी था, जो अपने परिवार के पालन-पोषण के लिए शिकार करता था। कर्ज न चुका पाने के कारण उसे एक साहूकार ने शिव मठ में बंदी बना लिया। जिस दिन वह बंदी बना, वही दिन शिवरात्रि का था।
चतुर्दशी के दिन उसने शिवरात्रि की कथा सुनी और संयोगवश भूखा-प्यासा रहकर व्रत का पालन हो गया। शिकार की तलाश में जंगल में रात बिताते समय वह जिस पेड़ पर चढ़ा, उसके नीचे एक शिवलिंग था, जिस पर बेलपत्र ढके हुए थे। अनजाने में पेड़ की टहनियां तोड़ते समय बेलपत्र शिवलिंग पर गिरते रहे और उसकी अनजानी पूजा होती चली गई।
करुणा और धर्म का मार्ग
कथा के दौरान शिकारी ने एक-एक कर कई हिरणियों और हिरण को जीवनदान दिया। किसी ने गर्भवती होने का हवाला दिया, तो किसी ने अपने परिवार और धर्म की दुहाई दी। शिकारी ने करुणा दिखाते हुए सभी को छोड़ दिया। इस दौरान पूरी रात उपवास, जागरण और अनजाने में शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित होने से उसकी शिवरात्रि पूजा पूर्ण हो गई।
सुबह होने पर जब हिरण और उसका परिवार शिकारी के सामने वापस आए, तो उसे गहरा पश्चाताप हुआ और उसने सभी को जीवनदान दे दिया। शास्त्रों के अनुसार, अनजाने में किए गए इस व्रत और पूजा के फलस्वरूप शिकारी को मोक्ष की प्राप्ति हुई।
अनजानी भक्ति का फल
कथा में बताया गया है कि मृत्यु के समय जब यमदूत उसे लेने आए, तो शिवगणों ने उन्हें वापस भेज दिया और चित्रभानु को शिवलोक ले गए। भगवान शिव की कृपा से उसे अपने पूर्व जन्म की स्मृति भी बनी रही, जिससे अगले जन्म में भी वह महाशिवरात्रि का विधिवत पालन कर सका।
यह कथा यह संदेश देती है कि सच्ची भक्ति, करुणा और श्रद्धा से किया गया कर्म कभी व्यर्थ नहीं जाता।
श्रद्धालुओं में दिखा उत्साह
विश्रामपुर और आसपास के क्षेत्रों में महाशिवरात्रि को लेकर मंदिरों की सफाई, सजावट और पूजा की तैयारियां शुरू हो गई हैं। श्रद्धालु उपवास, रुद्राभिषेक और रात्रि जागरण की योजना बना रहे हैं। पंडित राम निवास तिवारी ने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे आडंबर से दूर रहकर सच्चे मन से भगवान शिव की आराधना करें।
न्यूज़ देखो: आस्था, करुणा और आत्मसंयम का पर्व
महाशिवरात्रि केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि यह आत्मसंयम और करुणा का संदेश देने वाला पर्व है। पंडित राम निवास तिवारी के वक्तव्य से यह स्पष्ट होता है कि इस दिन की पूजा का महत्व बाहरी विधियों से अधिक आंतरिक भावना में निहित है। समाज में ऐसे आयोजनों और संदेशों से नैतिक मूल्यों को बल मिलता है। यह पर्व आज भी लोगों को धर्म और मानवीय संवेदनाओं से जोड़ने का कार्य कर रहा है।
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शिव भक्ति से संवरता जीवन
महाशिवरात्रि हमें सिखाती है कि भक्ति केवल कर्मकांड नहीं, बल्कि करुणा और सत्य का मार्ग है। सच्चे मन से किया गया छोटा सा प्रयास भी जीवन की दिशा बदल सकता है।
इस महाशिवरात्रि पर संकल्प लें कि हम अपने आचरण में संयम और मानवता को अपनाएंगे।
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