लाखों की लागत से लगी हाई मास्ट लाइट दो साल से बंद, अंधेरे में डूबा नावाडीह चौक

लाखों की लागत से लगी हाई मास्ट लाइट दो साल से बंद, अंधेरे में डूबा नावाडीह चौक

author Aditya Kumar
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#डुमरी #नावाडीह_चौक : खराब हाई मास्ट लाइट ने उजागर की प्रशासनिक लापरवाही।

डुमरी प्रखंड के प्रमुख व्यावसायिक और यातायात केंद्र नावाडीह चौक पर लाखों रुपये की लागत से लगाई गई हाई मास्ट लाइट बीते दो वर्षों से खराब पड़ी है। विकास के उद्देश्य से स्थापित यह लाइट महज तीन महीने में ही बंद हो गई थी, लेकिन आज तक इसकी मरम्मत नहीं कराई गई। अंधेरे के कारण आम राहगीरों, महिलाओं और बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यह स्थिति सार्वजनिक सुविधाओं के रखरखाव में गंभीर लापरवाही को दर्शाती है।

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  • नावाडीह चौक पर लगी हाई मास्ट लाइट दो वर्षों से बंद।
  • लाखों रुपये की लागत के बावजूद कोई मरम्मत नहीं।
  • मुख्य मार्ग होने के कारण रोज गुजरते हैं सैकड़ों वाहन।
  • महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को अंधेरे में हो रही परेशानी।
  • असामाजिक तत्वों के सक्रिय होने की आशंका बढ़ी।
  • ग्रामीणों ने तत्काल मरम्मत या वैकल्पिक रोशनी की मांग की।

डुमरी प्रखंड का नावाडीह चौक क्षेत्र का एक प्रमुख व्यावसायिक और यातायात केंद्र है। यहां दिनभर लोगों और वाहनों की आवाजाही लगी रहती है। बावजूद इसके, इस महत्वपूर्ण स्थान पर लगी हाई मास्ट लाइट का लंबे समय से खराब रहना स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है। शाम होते ही पूरा चौक अंधेरे में डूब जाता है, जिससे आम लोगों को भारी असुविधा झेलनी पड़ती है।

तीन महीने में खराब, दो साल से उपेक्षित

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, हाई मास्ट लाइट की स्थापना के मात्र तीन महीने बाद ही यह खराब हो गई थी। इसके बाद कई बार संबंधित विभाग और जनप्रतिनिधियों को इसकी जानकारी दी गई, लेकिन किसी ने गंभीरता से ध्यान नहीं दिया। न तो मरम्मत कराई गई और न ही कोई वैकल्पिक प्रकाश व्यवस्था की गई।

अंधेरे से बढ़ी परेशानी और डर

ग्रामीणों का कहना है कि अंधेरा होने के बाद नावाडीह चौक पर चलना जोखिम भरा हो जाता है। महिलाएं, बुजुर्ग और स्कूली बच्चे खास तौर पर खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं। अंधेरे का फायदा उठाकर असामाजिक तत्वों के सक्रिय होने की आशंका भी बनी रहती है, जिससे क्षेत्र में अपराध का डर बढ़ गया है।

प्रशासनिक निगरानी पर उठे सवाल

नावाडीह चौक मुख्य मार्ग पर स्थित है, जहां से रोज़ाना सैकड़ों वाहन गुजरते हैं। ऐसे में यहां रोशनी का अभाव न सिर्फ यातायात बल्कि सुरक्षा व्यवस्था के लिए भी गंभीर समस्या है। ग्रामीणों का सवाल है कि जब विकास कार्यों पर लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, तो उनकी निगरानी और रखरखाव क्यों नहीं हो रहा।

ग्रामीणों की स्पष्ट मांग

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से एक स्वर में मांग की है कि:

  • हाई मास्ट लाइट को शीघ्र दुरुस्त कराया जाए।
  • जब तक मरम्मत नहीं होती, तब तक वैकल्पिक प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

न्यूज़ देखो: विकास बनाम रखरखाव की हकीकत

नावाडीह चौक की यह स्थिति बताती है कि विकास केवल योजनाएं बनाने और धन खर्च करने तक सीमित रह गया है। रखरखाव और निगरानी के अभाव में सार्वजनिक सुविधाएं बेकार साबित हो रही हैं। यदि समय रहते सुधार नहीं हुआ, तो ऐसे कार्य जनता के विश्वास को कमजोर करेंगे। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

जागरूक नागरिक ही मजबूत व्यवस्था की नींव

सार्वजनिक संसाधन जनता के पैसे से बनते हैं और उनका सही उपयोग सभी का अधिकार है। अंधेरे में डूबा नावाडीह चौक हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि आवाज उठाना कितना जरूरी है।
अब समय है कि नागरिक सजग बनें, सवाल करें और जवाब मांगें।
अपनी राय कमेंट में साझा करें, इस खबर को आगे बढ़ाएं और प्रशासन तक आवाज पहुंचाने में सहयोग करें।

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Written by

डुमरी, गुमला

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