अहीरपुरवा में पहली बार मुस्लिम महिलाओं के लिए आयोजित हुआ फातमातुज जोहरा कॉन्फ्रेंस

अहीरपुरवा में पहली बार मुस्लिम महिलाओं के लिए आयोजित हुआ फातमातुज जोहरा कॉन्फ्रेंस

author Akram Ansari
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#बरवाडीह #महिला_सम्मेलन : मुस्लिम महिलाओं की शिक्षा और जागरूकता पर हुआ विशेष संवाद।

बरवाडीह प्रखंड के अहीरपुरवा गांव में पहली बार मुस्लिम महिलाओं के लिए फातमातुज जोहरा कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में झारखंड के विभिन्न जिलों से आईं महिला धर्मगुरुओं और वक्ताओं ने महिलाओं की शिक्षा, जागरूकता और सामाजिक भागीदारी पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं की उपस्थिति ने आयोजन को खास बना दिया।

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  • अहीरपुरवा गांव में पहली बार मुस्लिम महिलाओं के लिए कॉन्फ्रेंस आयोजित।
  • कार्यक्रम का उद्घाटन जिला परिषद सदस्य संतोषी शेखर ने किया।
  • महिला धर्मगुरुओं ने शिक्षा, जागरूकता और सामाजिक उत्थान पर रखे विचार।
  • कॉन्फ्रेंस में झारखंड के विभिन्न जिलों से पहुंचीं महिला वक्ताएं शामिल हुईं।
  • सैकड़ों महिलाओं की भागीदारी से आयोजन में दिखा उत्साह और उल्लास।
  • सामाजिक सौहार्द और महिलाओं की भागीदारी को लेकर सकारात्मक संदेश दिया गया।

बरवाडीह प्रखंड के अहीरपुरवा गांव में इस्लाहुल मुस्लिमीन कमिटी के तत्वावधान में पहली बार मुस्लिम महिलाओं के लिए “फातमातुज जोहरा कॉन्फ्रेंस” का आयोजन किया गया। यह आयोजन महिलाओं की शिक्षा, सामाजिक जागरूकता और धार्मिक समझ को मजबूत करने के उद्देश्य से किया गया था। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लेकर इसे ऐतिहासिक बना दिया।

कार्यक्रम का उद्घाटन पश्चिमी क्षेत्र की जिला परिषद सदस्य संतोषी शेखर ने फीता काटकर किया। इस अवसर पर पंचायत की मुखिया कालो देवी और आयोजन समिति की महिला सदस्य भी मौजूद रहीं। पूरे आयोजन के दौरान उत्साह और सामाजिक एकता का माहौल देखने को मिला।

महिलाओं की जागरूकता और सम्मान पर दिया गया जोर

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला परिषद सदस्य संतोषी शेखर ने कहा कि क्षेत्र की पहचान हमेशा आपसी भाईचारे और सामाजिक सौहार्द के लिए रही है। उन्होंने कहा कि यहां सभी धर्मों और समुदायों के लोग एक-दूसरे की संस्कृति और परंपराओं का सम्मान करते हैं।

संतोषी शेखर ने कहा: “मुस्लिम महिलाओं द्वारा महिलाओं के सम्मान, शिक्षा और जागरूकता को लेकर आयोजित यह कॉन्फ्रेंस समाज में सकारात्मक बदलाव लाने वाला कदम है।”

उन्होंने कहा कि महिलाओं को शिक्षित और जागरूक बनाना समाज के विकास के लिए बेहद जरूरी है। ऐसे कार्यक्रम महिलाओं को अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करने में अहम भूमिका निभाते हैं।

महिला धर्मगुरुओं ने रखे अपने विचार

कॉन्फ्रेंस में पलामू प्रमंडल सहित झारखंड के विभिन्न जिलों से पहुंचीं मुस्लिम महिला धर्मगुरुओं और वक्ताओं ने अपने विचार साझा किए।

कार्यक्रम में नाजिया दिलकश, साहना खातून फातमा, तमन्ना परवीन, जन्नती खातून समेत कई महिला विद्वानों ने महिलाओं की शिक्षा, सामाजिक भागीदारी, नैतिक मूल्यों और धार्मिक जागरूकता पर विस्तार से चर्चा की।

उनकी तकरीरों को सुनने के लिए बड़ी संख्या में महिलाएं मौजूद रहीं। वक्ताओं ने महिलाओं को शिक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

महिला वक्ताओं ने कहा: “शिक्षा और जागरूकता से ही महिलाएं समाज में अपनी मजबूत पहचान बना सकती हैं।”

सामाजिक सौहार्द का दिखा संदेश

कार्यक्रम के दौरान सामाजिक सौहार्द और भाईचारे का संदेश भी प्रमुखता से सामने आया। वक्ताओं ने कहा कि समाज में शांति और विकास के लिए सभी समुदायों के बीच आपसी सम्मान और सहयोग जरूरी है।

आयोजन में शामिल लोगों ने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम समाज में सकारात्मक सोच और महिलाओं के प्रति सम्मान की भावना को मजबूत करते हैं।

सैकड़ों महिलाओं की रही भागीदारी

कॉन्फ्रेंस में सैकड़ों की संख्या में महिलाओं की भागीदारी देखने को मिली। आयोजन स्थल पर महिलाओं में विशेष उत्साह दिखाई दिया। कार्यक्रम के दौरान धार्मिक और सामाजिक विषयों पर चर्चा के साथ महिलाओं को जागरूकता से जुड़े कई महत्वपूर्ण संदेश दिए गए।

इस अवसर पर इस्माइल अंसारी, टिंकू खान, इमरान अंसारी, अंजुम आरा, नूर जहां, जुबेदा बानो, तबसूम बीबी समेत कई लोग उपस्थित रहे।

महिलाओं के लिए नई पहल के रूप में देखा जा रहा आयोजन

स्थानीय लोगों ने कहा कि अहीरपुरवा में पहली बार इस प्रकार का आयोजन होना क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण पहल है। इससे महिलाओं को सामाजिक और शैक्षणिक रूप से आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी।

लोगों का मानना है कि ऐसे आयोजनों से महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ेगा और समाज में उनकी भागीदारी और मजबूत होगी।

न्यूज़ देखो: महिलाओं की भागीदारी से मजबूत होगा समाज

अहीरपुरवा में आयोजित यह कॉन्फ्रेंस केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि महिलाओं की जागरूकता और सामाजिक भागीदारी को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया है। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को शिक्षा और सामाजिक विषयों से जोड़ना आज की बड़ी जरूरत है। ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक बदलाव और सामाजिक सौहार्द को भी मजबूत करते हैं। आने वाले समय में इस तरह की पहल महिलाओं को नई पहचान और आत्मविश्वास देने में बड़ी भूमिका निभा सकती है।
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जागरूक महिलाएं ही समाज की असली ताकत

जब महिलाएं शिक्षित और जागरूक होती हैं, तब पूरा समाज मजबूत बनता है। हर समुदाय और हर परिवार को महिलाओं की शिक्षा, सम्मान और भागीदारी को प्राथमिकता देनी चाहिए।

सामाजिक एकता, शिक्षा और जागरूकता ही बेहतर भविष्य की नींव है। ऐसे कार्यक्रम नई पीढ़ी को सकारात्मक दिशा देने का कार्य करते हैं।

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Written by

बरवाडीह, लातेहार

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