
#गिरिडीह #गणतंत्र_दिवस : भाकपा माले कार्यालय में झंडोत्तोलन—संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का आह्वान।
77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर गिरिडीह में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले) द्वारा पार्टी कार्यालय में झंडोत्तोलन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व वरिष्ठ माले नेता श्री राजेश सिन्हा ने किया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने संविधान, लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट रहने का संकल्प लिया। आयोजन का उद्देश्य गणतंत्र दिवस के ऐतिहासिक महत्व के साथ वर्तमान सामाजिक चुनौतियों पर जनचेतना को मजबूत करना रहा।
- भाकपा माले कार्यालय, गिरिडीह में 77वें गणतंत्र दिवस पर झंडोत्तोलन।
- कार्यक्रम का नेतृत्व माले नेता राजेश सिन्हा ने किया।
- संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय की रक्षा का सामूहिक संकल्प।
- कार्यकर्ताओं ने स्कूलों व संस्थानों में जाकर दी गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं।
- वर्तमान समय में नागरिक अधिकारों की स्थिति पर गंभीर विमर्श।
देश के 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर गिरिडीह में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले) की ओर से पार्टी कार्यालय में गरिमामय झंडोत्तोलन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और कॉमरेड्स शामिल हुए। सभी ने एकजुट होकर राष्ट्रीय ध्वज फहराया और संविधान के मूल्यों को आत्मसात करने का संकल्प लिया। आयोजन पूरे अनुशासन और विचारशील वातावरण में संपन्न हुआ।
झंडोत्तोलन कार्यक्रम का आयोजन
झंडोत्तोलन कार्यक्रम का नेतृत्व भाकपा माले के वरिष्ठ नेता श्री राजेश सिन्हा ने किया। उन्होंने राष्ट्रध्वज को सलामी दी और उपस्थित कार्यकर्ताओं को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम के दौरान संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय के महत्व पर चर्चा की गई।
गणतंत्र दिवस का ऐतिहासिक महत्व
अपने संबोधन में श्री राजेश सिन्हा ने गणतंत्र दिवस के ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य को रेखांकित करते हुए बताया कि
राजेश सिन्हा ने कहा: “इसी दिन 21 तोपों की सलामी के साथ देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने तिरंगा फहराया था और भारत एक संप्रभु गणराज्य बना।”
उन्होंने कहा कि संविधान देश की जनता को समानता, स्वतंत्रता और न्याय प्रदान करने के उद्देश्य से लागू किया गया था, ताकि हर नागरिक को गरिमा के साथ जीने का अधिकार मिल सके।
अधिकारों की वास्तविक स्थिति पर सवाल
श्री सिन्हा ने वर्तमान सामाजिक स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि संविधान लागू हुए 77 वर्ष बीत जाने के बाद भी समाज का बड़ा वर्ग आज भी अपने मूल अधिकारों और बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय पर्व मनाना महत्वपूर्ण है, लेकिन साथ ही यह आत्ममंथन का अवसर भी है कि क्या संविधान के उद्देश्यों को पूरी तरह लागू किया जा सका है।
राजेश सिन्हा ने कहा: “जनता आज राष्ट्रीय पर्व मना रही है, लेकिन जिन उद्देश्यों के लिए देश आज़ाद हुआ और संविधान लागू हुआ, वे अभी भी पूरी तरह साकार नहीं हो पाए हैं। ऐसे समय में संविधान की रक्षा सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।”
स्कूलों और संस्थानों में जनसंपर्क
कार्यक्रम के दौरान भाकपा माले कार्यकर्ताओं ने गिरिडीह के कई स्कूलों और विभिन्न संस्थानों में जाकर गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दीं। इस दौरान लोकतंत्र, संविधान और नागरिक अधिकारों पर संवाद किया गया। पार्टी की ओर से यह प्रयास किया गया कि युवाओं और आम नागरिकों को गणतंत्र दिवस के वास्तविक अर्थ से जोड़ा जा सके।
सामाजिक न्याय और लोकतंत्र का संकल्प
कार्यक्रम के अंत में सभी कार्यकर्ताओं ने सामाजिक न्याय, लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए निरंतर संघर्ष करने का संकल्प लिया। पार्टी की ओर से स्पष्ट किया गया कि संविधान और जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए सड़क से लेकर हर लोकतांत्रिक मंच तक आवाज उठाई जाती रहेगी।
न्यूज़ देखो: संविधान की रक्षा का राजनीतिक संदेश
गिरिडीह में भाकपा माले का यह आयोजन बताता है कि गणतंत्र दिवस केवल औपचारिक उत्सव नहीं, बल्कि संविधान की वर्तमान स्थिति पर विचार का दिन भी है। पार्टी ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि लोकतंत्र तभी मजबूत होगा जब संवैधानिक अधिकार जमीन पर लागू होंगे। सवाल यह है कि क्या मौजूदा हालात में संविधान की भावना पूरी तरह सुरक्षित है? हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
संविधान ही हमारी सबसे बड़ी ताकत
गणतंत्र दिवस हमें केवल तिरंगा फहराने का नहीं, बल्कि अपने अधिकारों और कर्तव्यों को समझने का अवसर देता है।
लोकतंत्र तभी जीवंत रहेगा जब नागरिक जागरूक और सक्रिय रहेंगे।
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सजग नागरिक बनें, जिम्मेदारी निभाएं और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा में सहभागी बनें।



