टांगीनाथ धाम में आदिम जनजाति समुदाय का वन भोज सह मिलन समारोह, एकता और जागरूकता का संदेश

टांगीनाथ धाम में आदिम जनजाति समुदाय का वन भोज सह मिलन समारोह, एकता और जागरूकता का संदेश

author Aditya Kumar
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#डुमरी #टांगीनाथ_धाम : आदिम जनजाति समुदाय ने वन भोज के माध्यम से सामाजिक एकजुटता दिखाई।

डुमरी प्रखंड के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल टांगीनाथ धाम परिसर में सोमवार को आदिम जनजाति समुदाय द्वारा वन भोज सह मिलन समारोह का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य समुदाय के बीच आपसी भाईचारे को मजबूत करना और सामाजिक, आर्थिक व शैक्षणिक उत्थान को लेकर जागरूकता फैलाना रहा। समारोह में पंचायत प्रतिनिधि और समुदाय के प्रदेश स्तरीय पदाधिकारी शामिल हुए, जिन्होंने जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी। आयोजन में बड़ी संख्या में महिला-पुरुषों की सहभागिता देखने को मिली, जो सामुदायिक एकता का प्रतीक बनी।

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  • टांगीनाथ धाम परिसर में आदिम जनजाति समुदाय का आयोजन।
  • पंचायत मुखिया ज्योति बहेर देवी रहीं मुख्य अतिथि।
  • प्रदेश कमिटी संयोजक बिमल चंद्र असुर ने योजनाओं की दी जानकारी।
  • शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आजीविका पर विशेष जोर।
  • सैकड़ों की संख्या में महिला-पुरुष हुए शामिल।

डुमरी प्रखंड अंतर्गत टांगीनाथ धाम परिसर में आयोजित इस वन भोज सह मिलन समारोह में आदिम जनजाति समुदाय के लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज के भीतर आपसी सौहार्द, सहयोग और एकता को सुदृढ़ करना था, ताकि समुदाय संगठित होकर विकास की मुख्यधारा से जुड़ सके।

अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति

समारोह में पंचायत मुखिया ज्योति बहेर देवी मुख्य रूप से उपस्थित रहीं। उनके साथ प्रदेश कमिटी के संयोजक बिमल चंद्र असुर, हरेंद्र कोरवा, मंडवरी बिरहोर सहित कई सम्मानित सदस्य मंच पर मौजूद थे। सभी अतिथियों का स्वागत पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ किया गया, जिससे कार्यक्रम का सांस्कृतिक रंग और गहरा हो गया।

जनकल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी

प्रदेश कमिटी के संयोजक बिमल चंद्र असुर ने अपने संबोधन में सरकार द्वारा आदिम जनजाति समुदाय के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं की विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने कहा:

बिमल चंद्र असुर ने कहा: “शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, रोजगार, स्वरोजगार, छात्रवृत्ति, पेंशन और आजीविका से जुड़ी योजनाएं आदिम जनजाति समुदाय के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकती हैं, यदि लोग जागरूक होकर इनका लाभ उठाएं।”

उन्होंने समाज के लोगों से अपील की कि वे योजनाओं की जानकारी एक-दूसरे तक पहुंचाएं और सामूहिक रूप से लाभ लेने का प्रयास करें।

सामाजिक उत्थान और सांस्कृतिक संरक्षण पर जोर

कार्यक्रम के दौरान अन्य वक्ताओं ने भी आदिम जनजाति समाज के सामाजिक उत्थान, सांस्कृतिक संरक्षण और अधिकारों की रक्षा को लेकर किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला। समाज को संगठित रहने, शिक्षा को प्राथमिकता देने और युवाओं को नशा जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रखने का संदेश दिया गया।

मुखिया का आह्वान: महिलाएं बनें आत्मनिर्भर

पंचायत मुखिया ज्योति बहेर देवी ने अपने संबोधन में कहा कि आदिम जनजाति समुदाय का समग्र विकास तभी संभव है, जब सरकार और समाज दोनों मिलकर प्रयास करें
उन्होंने महिलाओं से आत्मनिर्भर बनने, स्वयं सहायता समूहों से जुड़ने और बच्चों की शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की अपील की।

वन भोज के माध्यम से एकता का परिचय

कार्यक्रम के अंत में वन भोज का आयोजन किया गया, जिसमें सभी उपस्थित लोगों ने सामूहिक रूप से भोजन ग्रहण किया। यह वन भोज केवल भोजन का आयोजन नहीं, बल्कि समुदाय के बीच आपसी सौहार्द, समानता और एकजुटता का प्रतीक बना। आयोजन में सैकड़ों की संख्या में महिला एवं पुरुष शामिल हुए और पूरे परिसर में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला।

न्यूज़ देखो: आदिम जनजाति समाज की संगठित शक्ति का उदाहरण

टांगीनाथ धाम में आयोजित यह वन भोज सह मिलन समारोह आदिम जनजाति समुदाय की सामाजिक एकता और जागरूकता का सशक्त उदाहरण है। सरकारी योजनाओं की जानकारी और शिक्षा-स्वास्थ्य पर दिया गया जोर यह दर्शाता है कि समाज अब अपने अधिकारों और अवसरों को लेकर सजग हो रहा है। ऐसे आयोजन न केवल सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करते हैं, बल्कि विकास की दिशा में सामूहिक सोच को भी आगे बढ़ाते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

एकजुट समाज से सशक्त भविष्य

जब समाज संगठित होता है, तभी बदलाव की राह आसान होती है।
शिक्षा, जागरूकता और सहयोग से आदिम जनजाति समुदाय अपने भविष्य को नई दिशा दे सकता है।
इस सकारात्मक पहल पर अपनी राय साझा करें, खबर को आगे बढ़ाएं और समाज में जागरूकता फैलाने में भागीदार बनें।

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Written by

डुमरी, गुमला

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