#डुमरी #आवास_हादसा : बरटोली गांव में तेज आंधी बारिश के दौरान पीएम आवास गिरने से बुजुर्ग की मौत।
डुमरी प्रखंड के बरटोली गांव में मंगलवार रात तेज आंधी और बारिश के दौरान जर्जर प्रधानमंत्री आवास ढह गया, जिसमें 72 वर्षीय भोवा झोरा की मौत हो गई। घटना रात करीब एक बजे हुई जब वे घर में सो रहे थे। ग्रामीणों ने मलबे से निकालकर बचाने की कोशिश की, लेकिन गंभीर चोटों के कारण उनकी जान नहीं बच सकी। इस घटना से गांव में शोक और आक्रोश का माहौल है।
- बरटोली गांव, खेतली पंचायत में हुआ हादसा।
- भोवा झोरा (72 वर्ष) की मलबे में दबकर मौत।
- रात 1 बजे आंधी और बारिश के दौरान गिरा घर।
- जर्जर प्रधानमंत्री आवास बना हादसे की वजह।
- ग्रामीणों ने मलबे से बाहर निकालने की कोशिश की।
- प्रशासन से मुआवजा और नए आवास की मांग।
डुमरी प्रखंड के खेतली पंचायत अंतर्गत बरटोली गांव में मंगलवार देर रात एक दर्दनाक हादसे ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया। तेज आंधी और मूसलाधार बारिश के बीच एक प्रधानमंत्री आवास अचानक भरभराकर गिर गया, जिसमें सो रहे 72 वर्षीय बुजुर्ग भोवा झोरा की मौके पर ही मौत हो गई। इस घटना के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है और लोगों में गहरा आक्रोश भी देखा जा रहा है।
आंधी और बारिश के बीच गिरा घर
घटना रात करीब 1 बजे की बताई जा रही है, जब तेज हवाओं और लगातार बारिश के कारण जर्जर हो चुका पीएम आवास अचानक ढह गया।
उस समय भोवा झोरा घर के अंदर सो रहे थे और अचानक मलबे में दब गए।
मलबे में दबे बुजुर्ग, बचाने की कोशिश नाकाम
घटना की आवाज सुनकर परिजन और आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे।
ग्रामीणों ने काफी मशक्कत के बाद बुजुर्ग को मलबे से बाहर निकाला।
ग्रामीण लिली टोप्पो ने बताया: “बाहर निकालने के बाद उन्हें पानी पिलाया गया, कुछ देर तक सांस चल रही थी, लेकिन गंभीर चोटों के कारण उनकी मौत हो गई।”
जर्जर पीएम आवास बना हादसे की वजह
ग्राम पंचायत के मुखिया जवाहर कवर ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया।
उन्होंने बताया कि मृतक के पास एक पुराना कच्चा मकान भी था, जो पूरी तरह सुरक्षित है, जबकि सरकार द्वारा दिया गया इंदिरा आवास (पीएम आवास) जर्जर हालत में था।
मुखिया जवाहर कवर ने कहा: “जर्जर निर्माण के कारण यह हादसा हुआ, प्रशासन को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए।”
ग्रामीणों में आक्रोश और भय
इस दर्दनाक घटना के बाद बरटोली गांव में शोक के साथ-साथ आक्रोश का माहौल भी है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते जर्जर आवासों की जांच और मरम्मत की जाती, तो यह हादसा टाला जा सकता था।
प्रशासन से मुआवजा और कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने और जल्द नया सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने की मांग की है।
साथ ही क्षेत्र में बने अन्य जर्जर पीएम आवासों की जांच कर मरम्मत या पुनर्निर्माण की भी मांग उठाई जा रही है।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
यह घटना सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
लोगों का कहना है कि गरीबों के लिए बने आवास यदि सुरक्षित नहीं होंगे, तो योजना का उद्देश्य ही विफल हो जाएगा।
न्यूज़ देखो: योजना का मकसद बनाम जमीनी हकीकत
बरटोली की यह घटना बताती है कि कागजों पर बनी योजनाएं जब जमीनी स्तर पर कमजोर पड़ती हैं, तो उसकी कीमत आम लोगों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ती है। प्रशासन को अब सिर्फ जांच नहीं, बल्कि जिम्मेदारी तय कर ठोस कार्रवाई करनी होगी। क्या अन्य जर्जर आवासों की पहचान कर समय रहते सुधार होगा? हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
सुरक्षित आवास हर परिवार का अधिकार
हर व्यक्ति को सुरक्षित घर मिलना उसका अधिकार है।
जर्जर मकानों की समय पर जांच और मरम्मत जरूरी है।
सरकारी योजनाओं की गुणवत्ता पर नजर रखना हम सबकी जिम्मेदारी है।
एक छोटी लापरवाही बड़ा हादसा बन सकती है।
आइए, मिलकर सुरक्षित जीवन की मांग करें।
इस खबर को शेयर करें, अपनी राय कमेंट करें और जिम्मेदारी तय करने की आवाज उठाएं।

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