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गोमिया बेड़ा गांव पहुंचे पूर्व उप मुखिया दीपक लकड़ा, तीन किलोमीटर पैदल चलकर सुनीं ग्रामीणों की पीड़ाएं

#कोनपालापंचायत #ग्रामीणसमस्याएं : सुदूरवर्ती गोमिया बेड़ा में मूलभूत सुविधाओं के अभाव की शिकायतें सामने आईं।

कोनपाला पंचायत अंतर्गत सुदूरवर्ती गोमिया बेड़ा गांव में पूर्व उप मुखिया सह समाजसेवी दीपक लकड़ा ने पैदल पहुंचकर ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं। गांव में बुनियादी सुविधाओं के अभाव को लेकर ग्रामीणों ने अपनी पीड़ा साझा की और लिखित आवेदन सौंपा। ग्रामीणों ने स्वास्थ्य, पेयजल, बिजली और शिक्षा से जुड़ी गंभीर समस्याओं की जानकारी दी। दीपक लकड़ा ने समस्याओं के समाधान के लिए जिला प्रशासन से वार्ता का आश्वासन दिया।

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  • गोमिया बेड़ा गांव पहुंचने के लिए तीन किलोमीटर पैदल चले दीपक लकड़ा।
  • ग्रामीणों ने मांदर, ढोल-नगाड़ा और पारंपरिक स्वागत किया।
  • गांव में स्वास्थ्य, पानी, बिजली और शिक्षा की गंभीर समस्याएं।
  • गर्भवती महिलाओं को अस्पताल ले जाने के लिए खटिया का सहारा।
  • जंगली हाथियों का बना रहता है भय।
  • ग्रामीणों ने लिखित आवेदन सौंपकर समाधान की मांग की।

कोनपाला पंचायत के सुदूरवर्ती गांव गोमिया बेड़ा में उस समय उम्मीद की एक किरण दिखी, जब पूर्व उप मुखिया सह समाजसेवी दीपक लकड़ा स्वयं तीन किलोमीटर पैदल चलकर गांव पहुंचे। गांव पहुंचने पर ग्रामीणों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मांदर, ढोल-नगाड़ा बजाकर, देसी गुलदस्ता भेंट कर एवं लोटा पानी से हाथ धुलवाकर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। यह स्वागत ग्रामीणों की उस उम्मीद को दर्शाता है, जो वे वर्षों से किसी जनप्रतिनिधि से लगाए बैठे हैं।

स्वागत के बाद दीपक लकड़ा ने गांव में बैठक कर ग्रामीणों की समस्याएं विस्तार से सुनीं। बैठक के दौरान ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा कि आज़ादी के इतने वर्षों बाद भी गोमिया बेड़ा गांव सरकार की बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। उनका कहना था कि चुनाव के समय नेता वोट मांगने गांव तक जरूर पहुंचते हैं, लेकिन चुनाव बीतते ही कोई भी उनकी सुध लेने नहीं आता।

वर्षों से विकास से वंचित है गोमिया बेड़ा

ग्रामीणों ने बताया कि गांव में लगभग 15 परिवार निवास करते हैं और सभी परिवार नियमित रूप से मतदान करते हैं, ताकि गांव का विकास हो सके। बावजूद इसके, आज तक गांव को सड़क, बिजली, पानी और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पाईं। ग्रामीणों का दर्द यह था कि समस्याएं बताने पर उन्हें केवल आश्वासन ही मिला, लेकिन धरातल पर कोई ठोस कार्य नहीं हुआ।

स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली

ग्रामीणों ने बताया कि गांव में स्वास्थ्य सुविधा की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। गर्भवती महिलाओं या गंभीर रूप से बीमार मरीजों को अस्पताल ले जाने के लिए आज भी खटिया का सहारा लेना पड़ता है। पक्की सड़क और वाहन की सुविधा नहीं होने के कारण कई बार मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता, जिससे जान का खतरा बना रहता है।

स्वच्छ पेयजल और बिजली का अभाव

बैठक में ग्रामीणों ने बताया कि गांव में स्वच्छ पेयजल की कोई व्यवस्था नहीं है। लोग मजबूरी में नदी का पानी पीने को विवश हैं, जिससे बीमारियों का खतरा बना रहता है। वहीं, बिजली की अनुपलब्धता के कारण बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। अंधेरे में न तो बच्चे ठीक से पढ़ पाते हैं और न ही ग्रामीणों का दैनिक जीवन सुरक्षित रह पाता है।

शिक्षा और सुरक्षा पर संकट

ग्रामीणों ने बताया कि गांव के नन्हे-मुन्ने बच्चों को विद्यालय आने-जाने के लिए पगडंडी रास्तों से कम से कम दो घंटे का सफर तय करना पड़ता है। यह रास्ता जंगल क्षेत्र से होकर गुजरता है, जिससे दुर्घटना और जंगली जानवरों के हमले का खतरा बना रहता है। विशेष रूप से जंगली हाथियों का भय ग्रामीणों के लिए रोजमर्रा की समस्या बन चुका है।

लिखित आवेदन सौंपकर जताई उम्मीद

ग्रामीणों ने अपनी सभी समस्याओं को समेटते हुए पूर्व उप मुखिया सह समाजसेवी दीपक लकड़ा को लिखित आवेदन सौंपा। आवेदन प्राप्त करने के बाद दीपक लकड़ा ने ग्रामीणों को आश्वस्त करते हुए कहा:

दीपक लकड़ा ने कहा: “आप लोगों की समस्याएं मेरी अपनी समस्याएं हैं। आपके हक और अधिकार के लिए मैं जिला स्तर के अधिकारियों से वार्ता करूंगा और समाधान दिलाने का पूरा प्रयास करूंगा।”

उन्होंने कहा कि आज़ादी के बाद भी गोमिया बेड़ा जैसे गांवों तक मूलभूत सुविधाओं का नहीं पहुंच पाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। सरकार एक ओर हर घर पानी, बिजली और सड़क की बात करती है, लेकिन दूसरी ओर ऐसे गांव आज भी विकास की मुख्यधारा से कटे हुए हैं।

जिला प्रशासन से वार्ता का आश्वासन

दीपक लकड़ा ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि वे इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला उपायुक्त महोदया श्रीमती कंचन सिंह से वार्ता करेंगे और गांव की समस्याओं के समाधान के लिए ठोस पहल करेंगे। उन्होंने कहा कि स्वच्छ पेयजल, बिजली और सड़क जैसी सुविधाएं ग्रामीणों का अधिकार हैं और इसके लिए वे निरंतर प्रयासरत रहेंगे।

बैठक में गोमिया बेड़ा गांव के सरपंच कुलदीप किंडो, फुलजेम्स किंडो, सलीम केरकेट्टा, विमल किंडो सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे, जिन्होंने अपनी-अपनी बात खुलकर रखी।

न्यूज़ देखो: विकास के दावों और हकीकत के बीच खड़ा गोमिया बेड़ा

गोमिया बेड़ा गांव की स्थिति सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत को सामने लाती है। जहां कागजों में विकास के बड़े दावे किए जाते हैं, वहीं कई गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। पूर्व उप मुखिया दीपक लकड़ा का पैदल पहुंचकर समस्याएं सुनना एक सकारात्मक पहल है, लेकिन असली परीक्षा प्रशासन की होगी कि वह इन समस्याओं पर कितनी गंभीरता से कार्रवाई करता है। अब निगाहें जिला प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

उम्मीद की राह पर पहला कदम

गोमिया बेड़ा के ग्रामीणों की आवाज यह बताती है कि विकास केवल योजनाओं की घोषणा से नहीं, बल्कि उनके ईमानदार क्रियान्वयन से संभव है। समाजसेवियों और जनप्रतिनिधियों का गांव तक पहुंचना ग्रामीणों में भरोसा जगाता है। अब जरूरत है कि इस भरोसे को ठोस कार्रवाई में बदला जाए।

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Birendra Tiwari

सिमडेगा

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