संघर्ष से आत्मनिर्भरता तक का सफर, निर्मला एक्का बनीं ग्रामीण महिलाओं के लिए मिसाल

संघर्ष से आत्मनिर्भरता तक का सफर, निर्मला एक्का बनीं ग्रामीण महिलाओं के लिए मिसाल

author News देखो Team
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#लातेहार #महिलासशक्तिकरण : संघर्ष और मेहनत से निर्मला एक्का ने आत्मनिर्भरता की नई पहचान बनाई।

लातेहार जिले के महुआडांड़ प्रखंड स्थित हरतुआ गांव की निर्मला एक्का आज ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। सीमित संसाधनों और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने मनरेगा महिला मेट, स्वयं सहायता समूह और मुर्गी पालन व्यवसाय के जरिए आत्मनिर्भरता हासिल की। अपनी मेहनत से परिवार की आय बढ़ाने के साथ-साथ वे अपनी बेटियों की शिक्षा को भी प्राथमिकता दे रही हैं। निर्मला की कहानी संघर्ष, आत्मविश्वास और महिला सशक्तिकरण की मजबूत मिसाल बनकर सामने आई है।

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  • निर्मला एक्का ने संघर्षपूर्ण जीवन से निकलकर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की।
  • ग्रामसभा द्वारा चयनित होने के बाद उन्होंने मनरेगा महिला मेट के रूप में काम शुरू किया।
  • स्वयं सहायता समूह से जुड़कर मुर्गी पालन व्यवसाय शुरू किया।
  • मुर्गी पालन और खेती से परिवार को सालाना बेहतर आय मिल रही है।
  • निर्मला अपनी बेटियों को उच्च शिक्षा और आत्मनिर्भर जीवन दिलाना चाहती हैं।

लातेहार जिले के महुआडांड़ प्रखंड अंतर्गत दुरूप पंचायत के हरतुआ गांव की रहने वाली निर्मला एक्का आज ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन चुकी हैं। सीमित साधनों और आर्थिक कठिनाइयों के बीच उन्होंने जिस तरह अपने परिवार को संभालते हुए आगे बढ़ने का रास्ता बनाया, वह कई महिलाओं के लिए सीख बन गया है।

संघर्षों से भरा था शुरुआती जीवन

निर्मला एक्का अपने पति रंजीत खलखो और चार बेटियों के साथ लंबे समय से संघर्षपूर्ण जीवन जी रही थीं। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना भी चुनौती बना रहता था।

इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपने परिवार को बेहतर जीवन देने का संकल्प बनाए रखा।

मनरेगा महिला मेट बनने से मिली नई दिशा

निर्मला के जीवन में बदलाव तब आया जब ग्रामसभा द्वारा उनका चयन मनरेगा महिला मेट के रूप में किया गया। इस जिम्मेदारी ने उन्हें समाज में नई पहचान दी और आत्मविश्वास भी बढ़ाया।

इसके बाद उन्होंने लीड्स संस्था द्वारा आयोजित विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी निभाई। इन प्रशिक्षणों ने उनके भीतर नेतृत्व क्षमता और आत्मनिर्भरता की भावना को और मजबूत किया।

स्वयं सहायता समूह से बढ़ा आत्मविश्वास

निर्मला केवल मनरेगा कार्यों तक सीमित नहीं रहीं। वे गांव की महिला स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष भी बनीं। समूह के माध्यम से उन्हें 100 अंडा देने वाली मुर्गियां और एक शेड उपलब्ध कराया गया।

इसी सहयोग से उन्होंने मुर्गी पालन व्यवसाय की शुरुआत की। शुरुआत छोटी थी, लेकिन मेहनत और निरंतर प्रयासों ने इसे सफल आय स्रोत में बदल दिया।

मुर्गी पालन से बढ़ी आमदनी

निर्मला एक्का के अनुसार मुर्गी पालन व्यवसाय से उन्हें सालाना करीब 50 हजार रुपए की आय होती है। इसके अलावा खेती, मौसमी सब्जी उत्पादन और मनरेगा कार्यों से भी लगभग 25 हजार रुपए तक अतिरिक्त आमदनी हो जाती है।

ग्रामीण परिवेश में यह आय उनके परिवार के लिए बड़ा सहारा साबित हो रही है।

बेटियों की शिक्षा को दी सबसे बड़ी प्राथमिकता

निर्मला की सबसे बड़ी ताकत और सपना उनकी बेटियां हैं। उनकी बड़ी बेटी कॉलेज में बीए की पढ़ाई कर रही है। निर्मला चाहती हैं कि वह आगे चलकर शिक्षक प्रशिक्षण प्राप्त कर शिक्षिका बने।

वहीं उनकी तीन छोटी बेटियां मिडिल स्कूल में पढ़ाई कर रही हैं। निर्मला का सपना है कि उनकी सभी बेटियां उच्च शिक्षा प्राप्त करें और अपने पैरों पर खड़ी हों।

मेहनत के बीच भी नहीं टूटा हौसला

दिनभर खेत, घर, बच्चों और व्यवसाय की जिम्मेदारियों के बीच व्यस्त रहने के बावजूद निर्मला के चेहरे पर संघर्ष से ज्यादा उम्मीद दिखाई देती है। उनका मानना है कि शिक्षा और आत्मनिर्भरता ही बेटियों और महिलाओं के जीवन में वास्तविक बदलाव ला सकती है।

गांव की महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा

आज निर्मला एक्का न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे गांव और आसपास की महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। उनकी सफलता ने यह साबित किया है कि सीमित संसाधनों के बावजूद मेहनत, प्रशिक्षण और आत्मविश्वास से जीवन बदला जा सकता है।

ग्रामीण महिलाएं अब उनसे प्रेरित होकर स्वरोजगार और स्वयं सहायता समूहों से जुड़ने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

न्यूज़ देखो: आत्मनिर्भर गांव और महिला सशक्तिकरण की मजबूत तस्वीर

निर्मला एक्का की कहानी यह दिखाती है कि सही अवसर, प्रशिक्षण और आत्मविश्वास मिलने पर ग्रामीण महिलाएं अपने परिवार और समाज में बड़ा बदलाव ला सकती हैं। स्वयं सहायता समूह और स्वरोजगार योजनाएं तभी सफल होती हैं जब महिलाएं उन्हें पूरी मेहनत और जिम्मेदारी से अपनाती हैं। निर्मला जैसी महिलाएं ग्रामीण विकास और महिला सशक्तिकरण की वास्तविक पहचान बन रही हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

बेटियों की शिक्षा और आत्मनिर्भरता ही असली बदलाव

जब एक महिला आत्मनिर्भर बनती है तो पूरा परिवार मजबूत होता है। शिक्षा, मेहनत और आत्मविश्वास जीवन की सबसे बड़ी ताकत हैं।
अपने आसपास की महिलाओं को भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें और बेटियों की पढ़ाई को प्राथमिकता दें।
सजग समाज ही मजबूत भविष्य की नींव रखता है। अपनी राय कमेंट करें, खबर साझा करें और प्रेरणादायक कहानियों को लोगों तक पहुंचाएं।

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