Giridih

राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह 2026 में गिरिडीह सख्त, “नो हेलमेट नो पेट्रोल, नो सीटबेल्ट नो फ्यूल” अभियान लागू

#गिरिडीह #सड़क_सुरक्षा : यातायात नियमों के पालन हेतु पेट्रोल पंपों तक लागू हुआ सख्त जागरूकता अभियान।

राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह 2026 के तहत गिरिडीह में यातायात नियमों के पालन को लेकर प्रशासन ने कड़ा कदम उठाया है। उपायुक्त रामनिवास यादव के निर्देश पर “नो हेलमेट नो पेट्रोल, नो सीटबेल्ट नो फ्यूल” अभियान की शुरुआत की गई। अभियान के माध्यम से दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों को सुरक्षा उपकरणों के बिना ईंधन नहीं देने का संदेश दिया गया। इसका उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना और आम नागरिकों की जान की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

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  • राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह 2026 के तहत जिले में विशेष अभियान।
  • उपायुक्त रामनिवास यादव के निर्देश पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित।
  • नो हेलमेट नो पेट्रोल, नो सीटबेल्ट नो फ्यूल अभियान लागू।
  • पेट्रोल पंप संचालकों से सख्त अनुपालन की अपील।
  • जिला परिवहन पदाधिकारी संतोष कुमार ने नियम पालन पर जोर दिया।

राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह 2026 के अवसर पर गिरिडीह जिला प्रशासन ने सड़क सुरक्षा को लेकर सख्त और व्यावहारिक पहल की है। उपायुक्त श्री रामनिवास यादव के निर्देशानुसार जिले में “नो हेलमेट नो पेट्रोल, नो सीटबेल्ट नो फ्यूल” अभियान के साथ सड़क सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अभियान का उद्देश्य लोगों को यह स्पष्ट संदेश देना है कि सुरक्षा नियमों की अनदेखी अब स्वीकार्य नहीं होगी।

अभियान का उद्देश्य और संदेश

इस अभियान के तहत आम नागरिकों से अपील की गई कि वे वाहन चलाते समय यातायात नियमों का कड़ाई से पालन करें। दोपहिया वाहन चालकों को हेलमेट पहनकर और चारपहिया वाहन चालकों को सीटबेल्ट लगाकर ही वाहन चलाने के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि सुरक्षा उपकरणों के बिना ईंधन उपलब्ध नहीं कराया जाएगा, ताकि नियमों का पालन सुनिश्चित हो सके।

पेट्रोल पंप संचालकों की अहम भूमिका

कार्यक्रम के दौरान जिले के सभी पेट्रोल पंप संचालकों से आग्रह किया गया कि वे इस अभियान का सख्ती से अनुपालन कराएं। प्रशासन का मानना है कि पेट्रोल पंपों पर नियमों का पालन सुनिश्चित होने से वाहन चालक स्वतः ही हेलमेट और सीटबेल्ट का उपयोग करने लगेंगे, जिससे सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी।

सड़क दुर्घटनाओं पर चिंता

इस अवसर पर जिला परिवहन पदाधिकारी, गिरिडीह श्री संतोष कुमार ने सड़क दुर्घटनाओं के कारणों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा:

संतोष कुमार ने कहा: “जिले में होने वाली अधिकांश सड़क दुर्घटनाएं यातायात नियमों की अनदेखी के कारण होती हैं। दोपहिया वाहन चालकों के लिए हेलमेट और चारपहिया वाहन चालकों के लिए सीटबेल्ट का उपयोग जीवन रक्षक है।”

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नियमों का पालन केवल चालान से बचने के लिए नहीं, बल्कि अपनी और दूसरों की जान बचाने के लिए जरूरी है।

वाहन दस्तावेजों की अनिवार्यता

जिला परिवहन पदाधिकारी ने वाहन चालकों को यह भी जानकारी दी कि वाहन से संबंधित सभी दस्तावेजों का अद्यतन और दुरुस्त होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि दुर्घटना की स्थिति में यदि दस्तावेजों में कमी पाई जाती है, तो क्षतिपूर्ति दावा प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसलिए वाहन बीमा, प्रदूषण प्रमाण पत्र और अन्य आवश्यक कागजात समय पर नवीनीकरण कराना जरूरी है।

सुरक्षित ड्राइविंग के लिए जरूरी सुझाव

कार्यक्रम के दौरान वाहन चालकों को सुरक्षित ड्राइविंग से जुड़े कई महत्वपूर्ण संदेश दिए गए। इनमें वाहन चलाते समय क्रोधित न होना, निर्धारित गति सीमा का पालन, और ट्रैफिक नियमों का पूर्णतः पालन शामिल है। अधिकारियों ने बताया कि जल्दबाजी और लापरवाही ही अधिकांश हादसों की बड़ी वजह बनती है।

कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारी

इस सड़क सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम में परिवहन विभाग और सड़क सुरक्षा से जुड़े कई अधिकारी मौजूद रहे। इनमें मोटरयान निरीक्षक श्री शुभम लाल सिंह, श्री मोहम्मद इरफान अहमद, श्री गौरी शंकर कुमार रवि एवं सड़क सुरक्षा प्रबंधक श्री मोहम्मद वाजिद हसन सहित अन्य संबंधित पदाधिकारी शामिल थे। सभी ने मिलकर सड़क सुरक्षा के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी निभाने की अपील की।

आगे भी जारी रहेगा अभियान

प्रशासन की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि सड़क सुरक्षा को लेकर इस तरह के जागरूकता अभियान आगे भी निरंतर जारी रहेंगे। इसका लक्ष्य केवल नियम लागू करना नहीं, बल्कि लोगों की सोच और व्यवहार में बदलाव लाना है, ताकि दुर्घटनाओं की संख्या में वास्तविक कमी लाई जा सके।

आमजन की भूमिका अहम

अधिकारियों ने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक की साझी जिम्मेदारी है। जब तक वाहन चालक स्वयं नियमों को गंभीरता से नहीं अपनाएंगे, तब तक सड़क हादसों पर पूरी तरह रोक लगाना संभव नहीं है।

न्यूज़ देखो: सख्ती के साथ जागरूकता की जरूरत

“नो हेलमेट नो पेट्रोल, नो सीटबेल्ट नो फ्यूल” अभियान यह दिखाता है कि प्रशासन अब सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर है। यह पहल नियमों के पालन को मजबूरी नहीं, बल्कि आदत बनाने की कोशिश है। असली सफलता तब होगी, जब लोग बिना डर के स्वयं सुरक्षा नियमों को अपनाएंगे। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

सुरक्षित सफर, जिम्मेदार नागरिक

सड़क पर हर दिन निकलते समय हम सभी अपने परिवार की उम्मीदें साथ लेकर चलते हैं। थोड़ी सी सावधानी और नियमों का पालन हमें सुरक्षित घर वापस पहुंचा सकता है। हेलमेट और सीटबेल्ट कोई औपचारिकता नहीं, बल्कि जीवन रक्षा कवच हैं।
आप भी सुरक्षित ड्राइविंग का संकल्प लें, दूसरों को इसके लिए प्रेरित करें। इस खबर पर अपनी राय कमेंट करें, इसे साझा करें और सड़क सुरक्षा का संदेश हर व्यक्ति तक पहुंचाने में भागीदार बनें।

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Saroj Verma

दुमका/देवघर

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