
#बेतलापंचायत #मनरेगा_बचाओ_संग्राम : ग्राम सभा और चौपाल के माध्यम से मनरेगा को कमजोर करने के प्रयासों का विरोध, ग्रामीणों ने पारित किया प्रस्ताव।
लातेहार जिले के बरवाडीह प्रखंड अंतर्गत बेतला पंचायत में मनरेगा बचाओ संग्राम अभियान के तहत ग्राम सभा एवं चौपाल का आयोजन किया गया। इस दौरान ग्रामीणों और कांग्रेस नेताओं ने मनरेगा की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए इसे कमजोर करने के किसी भी प्रयास का विरोध किया और ग्रामीण रोजगार अधिकारों की मजबूती की मांग उठाई।
- बेतला पंचायत में मनरेगा बचाओ संग्राम के तहत ग्राम सभा व चौपाल का आयोजन।
- कार्यक्रम की अध्यक्षता पंचायत अध्यक्ष संजय सिंह ने की।
- मनरेगा के नाम में बदलाव के प्रस्ताव का सर्वसम्मति से विरोध।
- ग्रामीण मजदूरों के काम के अधिकार को बताया गया संवैधानिक आधार।
- ग्राम पंचायतों के अधिकारों की रक्षा की उठी मांग।
- बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं कांग्रेस कार्यकर्ता रहे उपस्थित।
बरवाडीह प्रखंड क्षेत्र के बेतला पंचायत में आयोजित ग्राम सभा एवं चौपाल ने ग्रामीणों के अधिकारों को लेकर एक सशक्त मंच प्रदान किया। मनरेगा बचाओ संग्राम अभियान के तहत हुए इस आयोजन में ग्रामीणों ने एक स्वर में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम 2005 (मनरेगा) को कमजोर करने के प्रयासों का विरोध किया।
पंचायत अध्यक्ष की अध्यक्षता में हुआ आयोजन
कार्यक्रम की अध्यक्षता पंचायत अध्यक्ष संजय सिंह ने की। ग्राम सभा में उपस्थित ग्रामीणों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मनरेगा केवल रोजगार योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण गरीबों और मजदूरों के लिए काम के अधिकार की गारंटी है। इसे किसी भी रूप में कमजोर करना सीधे-सीधे ग्रामीण जीवन पर प्रहार होगा।
मनरेगा के नाम में बदलाव के प्रस्ताव का विरोध
ग्राम सभा में सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित कर मनरेगा के नाम में किसी भी प्रकार के बदलाव के प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया गया। वक्ताओं ने कहा कि मनरेगा का नाम ही उसकी पहचान और संघर्ष का प्रतीक है, जिसे बदले जाने का कोई औचित्य नहीं है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जनता द्वारा काम मांगने पर समय पर रोजगार उपलब्ध कराना सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी प्रकार की कोताही स्वीकार नहीं की जाएगी।
कांग्रेस नेताओं ने बताया ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़
चौपाल को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी से जुड़े नेताओं ने कहा कि मनरेगा केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। इससे गांवों में रोजगार, पलायन पर रोक और आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित होती है।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि मनरेगा को कमजोर करने या इसके स्वरूप में बदलाव का कोई भी प्रयास किया गया, तो उसका लोकतांत्रिक तरीके से विरोध किया जाएगा।
ग्राम पंचायतों के अधिकारों की रक्षा की मांग
सभा में वक्ताओं ने यह भी कहा कि मनरेगा के सफल क्रियान्वयन में ग्राम पंचायतों की भूमिका केंद्रीय है। ऐसे में पंचायतों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की जानी चाहिए और उन्हें कमजोर करने वाले किसी भी निर्णय का विरोध आवश्यक है।
ग्रामीणों ने एकजुट होकर कहा कि मनरेगा से जुड़ा हर निर्णय जनभागीदारी और पारदर्शिता के साथ लिया जाना चाहिए।
बड़ी संख्या में ग्रामीण रहे उपस्थित
इस अवसर पर बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया और मनरेगा के समर्थन में एकजुटता दिखाई। कार्यक्रम में पंचायत प्रभारी जयप्रकाश रजक, सिद्धेश्वर पासवान, जमुना सिंह, अलीहसन अंसारी, समुद्री कुंवर, संजय सिंह उर्फ बुट्टू, सकलदीप यादव, गिरू बैठा, अखिलेश पासवान, इस्माईल मियां, विजय सिंह सहित कई कांग्रेसी नेता एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।
ग्रामीणों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मनरेगा उनके जीवन और सम्मान से जुड़ा विषय है और इसके साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
न्यूज़ देखो: ग्रामीण अधिकारों की मजबूत आवाज
बेतला पंचायत में आयोजित यह ग्राम सभा और चौपाल दर्शाता है कि ग्रामीण समाज अपने अधिकारों के प्रति सजग और संगठित है। मनरेगा जैसे कानूनों की रक्षा के लिए जनभागीदारी और जागरूकता बेहद जरूरी है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
रोजगार का अधिकार बचाना, गांव का भविष्य बचाना
मनरेगा गरीब और मजदूर वर्ग के लिए सिर्फ योजना नहीं, बल्कि सम्मान के साथ जीने का आधार है। ऐसे अभियानों से ग्रामीणों की आवाज मजबूत होती है। इस खबर को साझा करें, अपनी राय कमेंट में दें और ग्रामीण अधिकारों के समर्थन में अपनी सहभागिता निभाएं।







