
#सिमडेगा #चैती_छठ : केलाघाघ घाट पर श्रद्धालुओं के बीच आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम दिखा।
सिमडेगा जिले में चैती छठ पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। तीसरे दिन उपायुक्त कंचन सिंह ने केलाघाघ सूर्य मंदिर के सांझी घाट पर व्रतियों के साथ अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया। घाट पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे और वैदिक विधि से पूजा संपन्न हुई। प्रशासन द्वारा सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए थे।
- उपायुक्त कंचन सिंह ने केलाघाघ घाट पर किया प्रथम अर्घ्य अर्पित।
- चैती छठ पर्व का तीसरा दिन, अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्यदान।
- कल्याण मिश्र ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ कराया पूजन।
- केलाघाघ सरोवर तट पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति।
- व्रतियों ने सुख-शांति और समृद्धि की कामना की।
- प्रशासन द्वारा सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम।
सिमडेगा जिले में आस्था और पवित्रता का महापर्व चैती छठ पूरे श्रद्धा-भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। पर्व के तीसरे दिन मंगलवार को केलाघाघ सूर्य मंदिर स्थित सांझी घाट पर विशेष धार्मिक आयोजन हुआ। इस अवसर पर उपायुक्त कंचन सिंह ने अन्य व्रतियों के साथ अस्ताचलगामी सूर्य नारायण को प्रथम अर्घ्य अर्पित किया। घाट पर भक्ति और आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिला, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
सांझी घाट पर उमड़ी आस्था की भीड़
केलाघाघ सरोवर तट स्थित सांझी घाट पर चैती छठ के अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। व्रती जलाशय में खड़े होकर भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हुए परिवार और समाज की सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना करते नजर आए।
इस दौरान घाट का वातावरण भक्ति गीतों और मंत्रोच्चार से गूंज उठा। श्रद्धालुओं के चेहरों पर आस्था और विश्वास की झलक साफ दिखाई दे रही थी, जिससे पूरा माहौल आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया।
वैदिक विधि से संपन्न हुआ अर्घ्यदान
सूर्य मंदिर के पुरोहित कल्याण मिश्र ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधि-विधान से अर्घ्यदान की प्रक्रिया पूरी कराई। धार्मिक परंपराओं के अनुसार सभी व्रतियों ने नियमों का पालन करते हुए पूजा-अर्चना की।
कल्याण मिश्र ने कहा: “छठ पर्व सूर्य उपासना का विशेष अवसर है, जिसमें विधि-विधान से अर्घ्य देने का अत्यंत महत्व होता है और यह जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।”
छठ पर्व का धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व
श्रद्धालुओं ने इस अवसर पर छठ पर्व की महिमा का भी वर्णन किया। मान्यता है कि अस्ताचलगामी और उदयीमान सूर्य को अर्घ्य देने से शरीर को प्राकृतिक ऊर्जा प्राप्त होती है।
जल के माध्यम से गुजरने वाली सूर्य की किरणें शरीर के विभिन्न अंगों को प्रभावित करती हैं, जिससे स्वास्थ्य लाभ होता है। इससे नेत्रज्योति, पाचनशक्ति, निर्णय क्षमता और समग्र स्वास्थ्य में सुधार होने की बात कही जाती है। यही कारण है कि यह पर्व आस्था के साथ-साथ स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
प्रशासन की सुदृढ़ व्यवस्था
चैती छठ के दौरान प्रशासन ने सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर विशेष तैयारी की थी। घाट पर साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था, सुरक्षा बलों की तैनाती और भीड़ नियंत्रण के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए थे।
उपायुक्त कंचन सिंह की उपस्थिति ने आयोजन को और भी व्यवस्थित और अनुशासित बनाया। प्रशासन का प्रयास रहा कि सभी व्रतियों को बिना किसी असुविधा के पूजा-अर्चना करने का अवसर मिले।
न्यूज़ देखो: आस्था और प्रशासनिक समन्वय का सफल उदाहरण
सिमडेगा में चैती छठ का यह आयोजन आस्था और प्रशासनिक समन्वय का बेहतरीन उदाहरण प्रस्तुत करता है। जहां एक ओर श्रद्धालुओं की आस्था ने वातावरण को भक्तिमय बनाया, वहीं प्रशासन की सक्रियता ने आयोजन को सुरक्षित और व्यवस्थित रखा। यह दिखाता है कि सामूहिक सहयोग से बड़े धार्मिक आयोजनों को सफल बनाया जा सकता है। आगे भी ऐसे आयोजनों में इसी तरह की सजगता बनी रहनी चाहिए। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
आस्था के साथ जिम्मेदारी निभाएं और परंपरा को आगे बढ़ाएं
छठ पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत और सामूहिक एकता का प्रतीक है। इस अवसर पर हमें न सिर्फ पूजा करनी चाहिए, बल्कि समाज और पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को भी समझना चाहिए।
स्वच्छता, अनुशासन और सहयोग की भावना से ही ऐसे आयोजनों की गरिमा बनी रहती है। हर व्यक्ति का छोटा प्रयास इस पर्व को और भी सफल और प्रेरणादायक बना सकता है।हम सभी मिलकर इस पवित्र पर्व को सुरक्षित, स्वच्छ और अनुशासित तरीके से मनाने का संकल्प लें।


