#खलारी #मातृसम्मेलन : विद्यालय में तीन पीढ़ियों के सम्मान का भावपूर्ण आयोजन हुआ।
रांची जिले के खलारी स्थित जाह्नवी सरस्वती विद्या मंदिर में दादा-दादी, नाना-नानी एवं मातृसम्मेलन समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में भारतीय संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों और पीढ़ियों के सम्मान को विशेष रूप से रेखांकित किया गया। विद्यार्थियों ने अतिथियों के चरण पखार कर भारतीय संस्कारों की अनूठी झलक प्रस्तुत की। समारोह में अभिभावकों और शिक्षकों ने बच्चों के नैतिक विकास पर भी चर्चा की।
- जाह्नवी सरस्वती विद्या मंदिर में आयोजित हुआ विशेष मातृसम्मेलन।
- दादा-दादी एवं नाना-नानी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया शुभारंभ।
- विद्यार्थियों ने अतिथियों के चरण पखार कर किया सम्मान।
- प्रधानाचार्य लखन कुमार गुप्ता ने संस्कारों के महत्व पर दिया जोर।
- मुख्य अतिथि कुलदीप प्रसाद साहु ने विद्यालय की पहल की सराहना की।
- कार्यक्रम संचालन संजय प्रसाद ने किया।
रांची जिले के खलारी स्थित जाह्नवी सरस्वती विद्या मंदिर में सोमवार को दादा-दादी, नाना-नानी एवं मातृसम्मेलन समारोह का आयोजन अत्यंत भावनात्मक और संस्कारपूर्ण वातावरण में किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अभिभावकों, दादा-दादी, नाना-नानी एवं विद्यालय परिवार की सहभागिता देखने को मिली।
समारोह का शुभारंभ उपस्थित बुजुर्ग अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर एवं वंदना के साथ किया गया। पूरे कार्यक्रम के दौरान भारतीय संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों और पीढ़ियों के बीच भावनात्मक संबंधों को मजबूत बनाने पर विशेष बल दिया गया।
भारतीय संस्कृति को जीवंत रखने का प्रयास
विद्यालय परिवार की ओर से आयोजित इस समारोह का मुख्य उद्देश्य भारतीय संस्कृति एवं परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाना था। कार्यक्रम में यह संदेश दिया गया कि परिवार में दादा-दादी और नाना-नानी केवल बुजुर्ग सदस्य नहीं, बल्कि अनुभव, संस्कार और जीवन मूल्यों के महत्वपूर्ण स्रोत होते हैं।
विद्यालय परिसर में पूरे समय पारिवारिक आत्मीयता और सम्मान का वातावरण बना रहा। बच्चों ने अपने बुजुर्गों के प्रति सम्मान प्रकट करते हुए विभिन्न गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लिया।
चरण पखार कर किया सम्मान
कार्यक्रम का सबसे विशेष और भावुक क्षण वह रहा जब विद्यालय के भैया-बहनों ने उपस्थित दादा-दादी एवं नाना-नानी के चरण पखार कर उनका पूजन किया। इस दृश्य ने कार्यक्रम में मौजूद सभी लोगों को भावुक कर दिया।
भारतीय संस्कृति में बुजुर्गों के सम्मान और आशीर्वाद की परंपरा को जीवंत रूप में प्रस्तुत करते हुए बच्चों ने समाज को एक सकारात्मक संदेश देने का प्रयास किया। उपस्थित अभिभावकों ने विद्यालय की इस पहल की जमकर सराहना की।
प्रधानाचार्य ने अभिभावकों से मांगा सहयोग
विद्यालय के प्रधानाचार्य लखन कुमार गुप्ता ने अपने संबोधन में बच्चों के सर्वांगीण विकास में परिवार और विद्यालय की संयुक्त भूमिका पर प्रकाश डाला।
प्रधानाचार्य लखन कुमार गुप्ता ने कहा: “बच्चों के शैक्षणिक एवं नैतिक मूल्यों के विकास में अभिभावकों का सतत सहयोग अत्यंत आवश्यक है।”
उन्होंने अभिभावकों से विद्यालय के शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक प्रयासों में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की। उन्होंने कहा कि केवल पुस्तकीय शिक्षा ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि बच्चों में नैतिकता, अनुशासन और संस्कारों का विकास भी बेहद जरूरी है।
मुख्य अतिथि ने की विद्यालय की सराहना
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कुलदीप प्रसाद साहु ने विद्यालय द्वारा किए जा रहे इस प्रयास की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में संयुक्त परिवार और पारिवारिक मूल्यों को बचाए रखना एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है।
मुख्य अतिथि कुलदीप प्रसाद साहु ने कहा: “बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए परिवार और विद्यालय दोनों की भूमिका समान रूप से महत्वपूर्ण है।”
उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन समाज को सकारात्मक दिशा देने में मददगार साबित होते हैं।
शिक्षकों और आयोजन समिति की रही अहम भूमिका
कार्यक्रम को सफल बनाने में विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं आयोजन समिति की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यक्रम प्रमुख ममता गुप्ता के नेतृत्व में पूरे आयोजन को व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराया गया।
मंच संचालन संजय प्रसाद ने किया। वहीं आचार्य रमाशंकर सिंह, सरिता गुप्ता, विजय कुजूर, सुशीला कुजूर एवं संगीता देवी सहित विद्यालय परिवार के अन्य सदस्यों ने कार्यक्रम की सफलता में सराहनीय योगदान दिया।
विद्यालय परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया था और पूरे समारोह के दौरान पारिवारिक सौहार्द एवं भारतीय संस्कृति की सुंदर झलक देखने को मिली।

न्यूज़ देखो: पारिवारिक संस्कारों को मजबूत करने वाली प्रेरणादायक पहल
आज के बदलते सामाजिक परिवेश में जहां संयुक्त परिवार और पारिवारिक मूल्य धीरे-धीरे कमजोर होते जा रहे हैं, वहां इस तरह के आयोजन समाज को सकारात्मक दिशा देने का काम करते हैं। जाह्नवी सरस्वती विद्या मंदिर की यह पहल नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, सम्मान और पारिवारिक मूल्यों से जोड़ने का प्रेरणादायक प्रयास है। ऐसे आयोजन बच्चों के भीतर संवेदनशीलता और संस्कार विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
परिवार और संस्कार ही समाज की असली ताकत
बुजुर्गों का सम्मान केवल परंपरा नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति की पहचान है। बच्चों को यदि अच्छे संस्कार और पारिवारिक मूल्य मिलते हैं तो समाज भी मजबूत बनता है।
अपने परिवार के बुजुर्गों का सम्मान करें, उनके अनुभवों से सीखें और नई पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ने में अपनी भूमिका निभाएं। खबर को साझा करें, अपनी राय कमेंट करें और भारतीय संस्कृति के इस संदेश को आगे बढ़ाएं।

🗣️ Join the Conversation!
What are your thoughts on this update? Read what others are saying below, or share your own perspective to keep the discussion going. (Please keep comments respectful and on-topic).