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गिरिडीह के संत जोसेफ स्कूल में फीस वृद्धि और कथित टॉर्चर के खिलाफ गार्जियनों का प्रदर्शन, फादर की नीतियों पर उठे गंभीर सवाल

#गिरिडीह #निजीस्कूलविवाद : फीस वृद्धि और प्रबंधन की नीतियों के खिलाफ अभिभावकों ने किया विरोध प्रदर्शन।

गिरिडीह के संत जोसेफ स्कूल लखारी में गुरुवार को अभिभावकों ने स्कूल प्रबंधन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। आरोप है कि बिना सूचना फीस में भारी बढ़ोतरी और छात्रों के साथ मानसिक दबाव बनाया जा रहा है। गार्जियनों ने फादर की नीतियों को छात्र और अभिभावक विरोधी बताया। मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर आक्रोश बढ़ता नजर आ रहा है।

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  • गिरिडीह के संत जोसेफ स्कूल लखारी में गार्जियनों का विरोध प्रदर्शन।
  • 67% फीस वृद्धि का बिना सूचना आरोप लगा।
  • राजेश सिन्हा ने स्कूल प्रबंधन की नीतियों पर सवाल उठाया।
  • पचंबा पुलिस ने मौके पर पहुंचकर बातचीत कराई।
  • राजीव कुमार (थाना प्रभारी) की मौजूदगी में बैठक हुई।
  • छात्रों और गार्जियनों ने मानसिक टॉर्चर का आरोप लगाया।

गिरिडीह जिले के संत जोसेफ स्कूल लखारी में गुरुवार को उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई जब बड़ी संख्या में अभिभावक स्कूल गेट पर इकट्ठा होकर विरोध जताने लगे। अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन द्वारा लगातार मनमानी की जा रही है, जिसमें फीस वृद्धि, पढ़ाई के नाम पर अतिरिक्त बोझ और संवाद की कमी शामिल है। मामले में स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता राजेश सिन्हा भी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया।

फीस वृद्धि और शैक्षणिक बोझ को लेकर नाराजगी

अभिभावकों का कहना है कि स्कूल प्रबंधन ने अचानक 67 प्रतिशत तक फीस बढ़ा दी, जिसकी पूर्व सूचना नहीं दी गई। इसके अलावा नए पब्लिशर की किताबें खरीदने का दबाव भी बनाया जा रहा है, जिससे आर्थिक बोझ और बढ़ गया है।

गार्जियनों ने आरोप लगाया कि किताब, कॉपी और डायरी के नाम पर अतिरिक्त खर्च कराया जा रहा है और बच्चों पर भी पढ़ाई का दबाव अनावश्यक रूप से बढ़ाया जा रहा है। कई अभिभावकों ने यह भी कहा कि निजी स्कूलों की यह समस्या केवल एक स्कूल तक सीमित नहीं है, बल्कि जिले के कई बड़े स्कूलों में ऐसी शिकायतें सामने आती रही हैं।

छात्रों और अभिभावकों के साथ कथित दुर्व्यवहार

प्रदर्शन कर रहे अभिभावकों ने स्कूल के फादर पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि बच्चों के साथ मानसिक दबाव बनाया जा रहा है और महिला अभिभावकों को स्कूल परिसर में प्रवेश नहीं दिया जाता।

अभिभावकों का यह भी आरोप है कि पिछले एक वर्ष में स्कूल के फादर ने अभिभावकों के साथ एक भी बैठक नहीं की, जिससे संवाद की पूरी प्रक्रिया ठप हो गई है। इससे गार्जियनों में असंतोष बढ़ता जा रहा है।

राजेश सिन्हा ने उठाए बड़े सवाल

मौके पर पहुंचे सामाजिक कार्यकर्ता राजेश सिन्हा ने पूरे मामले को गंभीर बताते हुए शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक उदासीनता पर सवाल उठाए।

राजेश सिन्हा ने कहा: “बड़े प्राइवेट स्कूल आम लोगों पर कहर बनकर टूट रहे हैं, फीस, किताब और अन्य खर्चों के नाम पर अभिभावकों का शोषण हो रहा है।”

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उन्होंने आगे कहा कि कई मामलों में पब्लिशर द्वारा स्कूलों को कमीशन दिया जाता है, जिसके कारण महंगी किताबें अभिभावकों पर थोपी जाती हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जनप्रतिनिधि इस मुद्दे पर सक्रिय नहीं हैं।

राजेश सिन्हा ने कहा: “कानून आम लोगों के लिए नहीं बल्कि पूंजीपतियों के हित में बनते नजर आते हैं, इसलिए इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती।”

गार्जियन संगठन की कमी बनी बड़ी समस्या

अभिभावकों ने यह भी कहा कि जिले में गार्जियन के लिए कोई मजबूत संगठन नहीं है, जिसके कारण वे एकजुट होकर अपनी बात नहीं रख पाते। जो छोटे स्तर पर समूह बने हैं, वे भी स्कूल प्रबंधन के दबाव में प्रभावी नहीं हो पाते।

इस मुद्दे पर राजेश सिन्हा ने कहा कि एक मजबूत और स्वतंत्र गार्जियन संस्था की जरूरत है, जो अभिभावकों की समस्याओं को मजबूती से उठा सके।

पुलिस की हस्तक्षेप से हुई बातचीत

स्थिति को देखते हुए पचंबा पुलिस मौके पर पहुंची और गार्जियनों व स्कूल प्रबंधन के बीच बातचीत कराई। इस दौरान थाना प्रभारी राजीव कुमार की भूमिका महत्वपूर्ण रही।

राजेश सिन्हा ने पुलिस की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने सभी पक्षों को बैठाकर बातचीत कराई, हालांकि कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका।

राजेश सिन्हा ने कहा: “पचंबा पुलिस का रोल बेहतर रहा, लेकिन अभी तक कोई ठोस पहल नहीं हो पाई है।”

फादर की अनुपस्थिति पर उठे सवाल

प्रदर्शन के दौरान यह बात सामने आई कि स्कूल के फादर मौके पर मौजूद नहीं थे। हालांकि कुछ गार्जियनों का दावा था कि वे स्कूल परिसर में ही हैं।

इसको लेकर कई तरह की चर्चाएं होती रहीं और अभिभावकों ने पारदर्शिता की मांग उठाई।

कर्मचारियों के कार्य समय पर भी सवाल

राजेश सिन्हा ने यह भी बताया कि स्कूल के गार्ड, जो पहले 8 घंटे काम करते थे, अब उन्हें 12 से 16 घंटे तक काम करना पड़ रहा है, जो श्रम नियमों का उल्लंघन हो सकता है।

इस मुद्दे ने स्कूल प्रबंधन के कार्यशैली पर और भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

न्यूज़ देखो: निजी स्कूलों की मनमानी पर कब लगेगा लगाम

गिरिडीह का यह मामला केवल एक स्कूल तक सीमित नहीं है, बल्कि निजी शिक्षा व्यवस्था की व्यापक समस्या को उजागर करता है। फीस वृद्धि, अभिभावकों से संवाद की कमी और छात्रों पर दबाव जैसे मुद्दे लगातार सामने आ रहे हैं। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी भी सवालों के घेरे में है। क्या इस मामले की निष्पक्ष जांच होगी और जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी, यह देखना बाकी है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

शिक्षा में पारदर्शिता जरूरी, अभिभावकों की आवाज बने बदलाव की ताकत

शिक्षा केवल व्यवसाय नहीं बल्कि समाज की नींव है, और इसमें पारदर्शिता व संवेदनशीलता बेहद जरूरी है। अभिभावकों और छात्रों की समस्याओं को नजरअंदाज करना किसी भी संस्थान के लिए सही नहीं हो सकता। यदि आप भी ऐसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं, तो आवाज उठाना जरूरी है। जागरूक बनें, अपने अधिकारों को समझें और संगठित होकर समाधान की दिशा में कदम बढ़ाएं। अपनी राय कमेंट में साझा करें, इस खबर को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाएं और शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।

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Surendra Verma

डुमरी, गिरिडीह

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