#कोलेबिरा #प्राकृतिक_आपदा : अघरमा गांव में ओलावृष्टि से खीरा फसल नष्ट, किसानों की उम्मीद टूटी।
सिमडेगा जिले के कोलेबिरा प्रखंड अंतर्गत अघरमा गांव में भारी बारिश और ओलावृष्टि से खीरा की फसल पूरी तरह नष्ट हो गई। किसान अफरोज खान और अफरोज आलम की लगभग 9 एकड़ में लगी फसल बर्बाद हो गई, जिससे लाखों रुपये का नुकसान हुआ। कृषि विभाग ने मौके पर पहुंचकर क्षति का आकलन किया और मुआवजे का आश्वासन दिया।
- अघरमा गांव में ओलावृष्टि और भारी बारिश से फसल बर्बाद।
- अफरोज खान और अफरोज आलम की 9 एकड़ खीरा फसल नष्ट।
- खेती में करीब 3.5 लाख रुपये निवेश, संभावित ढाई लाख लाभ खत्म।
- आधुनिक ड्रिप इरिगेशन तकनीक से कर रहे थे खेती।
- कृषि विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे, क्षति का जायजा लिया।
- किसानों ने सरकार से मुआवजे की मांग की।
सिमडेगा जिले के कोलेबिरा प्रखंड के अघरमा गांव में हाल ही में हुई तेज बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। गांव के दो किसानों की खीरा की पूरी फसल बर्बाद हो गई, जिससे उन्हें लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। इस प्राकृतिक आपदा ने न केवल उनकी वर्तमान आय को प्रभावित किया है, बल्कि भविष्य की योजनाओं पर भी गहरा असर डाला है।
मेहनत पर फिरा पानी, तैयार फसल हुई नष्ट
अघरमा गांव निवासी अफरोज खान और अफरोज आलम ने लगभग 9 एकड़ भूमि पर खीरा की खेती की थी। दोनों किसानों ने बताया कि इस खेती में अब तक करीब 3 लाख 50 हजार रुपये खर्च हो चुके थे। फसल लगभग तैयार हो चुकी थी और बाजार में इसकी अच्छी मांग भी बनने लगी थी।
अगर मौसम अनुकूल रहता, तो किसानों को इस फसल से करीब ढाई लाख रुपये का मुनाफा होने की उम्मीद थी। लेकिन अचानक आई तेज बारिश और ओलावृष्टि ने पूरी फसल को बर्बाद कर दिया।
अफरोज खान ने कहा: “हमने पूरी मेहनत और उम्मीद के साथ खेती की थी, लेकिन एक ही झटके में सब खत्म हो गया। अब समझ नहीं आ रहा आगे क्या करें।”
आधुनिक तकनीक अपनाकर बन रहे थे प्रेरणा
दोनों किसान आधुनिक कृषि तकनीकों का उपयोग कर रहे थे। उन्होंने ड्रिप इरिगेशन प्रणाली के माध्यम से खीरा की खेती की थी, जिससे पानी की बचत और उत्पादन में वृद्धि होती है।
करीब 35 दिनों की कड़ी मेहनत के बाद फसल तैयार होने की स्थिति में थी। उनके इस प्रयास से क्षेत्र के अन्य किसान भी प्रेरित हो रहे थे और नई तकनीकों को अपनाने की दिशा में सोच रहे थे।
अफरोज आलम ने कहा: “हम चाहते थे कि गांव के अन्य किसान भी नई तकनीक अपनाएं, लेकिन इस नुकसान से हिम्मत टूट गई है।”
खेतों में बर्बादी का मंजर
ओलावृष्टि के कारण खेतों में लगे सभी खीरे पूरी तरह नष्ट हो गए। फसल जमीन पर गिर गई और सड़ने लगी, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा।
इस घटना के बाद दोनों किसान काफी चिंतित हैं, क्योंकि उनकी पूरी पूंजी इस फसल में लगी थी। अब उन्हें अपनी आजीविका को लेकर चिंता सता रही है।
कृषि विभाग ने लिया जायजा
घटना की सूचना मिलते ही कृषि विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। बीटीएम पुष्पांजलि कुजूर और एटीएम कुलन समद ने खेतों का निरीक्षण किया और फसल क्षति का आकलन किया।
पुष्पांजलि कुजूर ने कहा: “हमने फसल का निरीक्षण किया है और रिपोर्ट तैयार की जा रही है। किसानों को प्रखंड प्रशासन के माध्यम से उचित मुआवजा दिलाने का प्रयास किया जाएगा।”
अधिकारियों ने किसानों को आश्वासन दिया कि उन्हें सरकारी योजनाओं के तहत राहत दिलाने की कोशिश की जाएगी।
मुआवजे की मांग और भविष्य की चिंता
किसानों ने सरकार से जल्द से जल्द मुआवजा देने की मांग की है, ताकि वे अपनी आर्थिक स्थिति को संभाल सकें और दोबारा खेती की शुरुआत कर सकें।
उनका कहना है कि अगर समय पर सहायता नहीं मिली, तो उन्हें भारी आर्थिक संकट का सामना करना पड़ सकता है। यह घटना क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी एक चेतावनी है कि प्राकृतिक आपदाओं का जोखिम हमेशा बना रहता है।
न्यूज़ देखो: प्रकृति की मार से जूझते किसान को चाहिए मजबूत सहारा
अघरमा की यह घटना दिखाती है कि किस तरह एक प्राकृतिक आपदा किसानों की महीनों की मेहनत को पलभर में खत्म कर सकती है। आधुनिक तकनीक अपनाने के बावजूद किसान जोखिम से सुरक्षित नहीं हैं। ऐसे में प्रशासन की जिम्मेदारी है कि समय पर राहत और मुआवजा देकर किसानों को संभाला जाए। क्या सरकार इस दिशा में त्वरित कदम उठाएगी, यह देखना अहम होगा। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
किसान मजबूत तो देश मजबूत
किसान हमारे देश की रीढ़ हैं, और उनकी मेहनत ही हमारी थाली तक भोजन पहुंचाती है। ऐसे में जब वे संकट में हों, तो समाज और सरकार दोनों का दायित्व बनता है कि उनके साथ खड़े रहें।
आज जरूरत है कि हम किसानों की समस्याओं को समझें और उनके समर्थन में आवाज उठाएं। प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए मजबूत व्यवस्था और त्वरित सहायता बेहद जरूरी है।

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