स्थानीय स्वशासन को मजबूती देने की ऐतिहासिक पहल सराहनीय: बबलू सिंह

स्थानीय स्वशासन को मजबूती देने की ऐतिहासिक पहल सराहनीय: बबलू सिंह

author Yashwant Kumar
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#हुसैनाबाद #पेसा_नियमावली : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्णय को जनजातीय स्वशासन के लिए बताया मील का पत्थर।

हुसैनाबाद में झारखंड सरकार द्वारा पेसा नियमावली को मंजूरी दिए जाने पर सकारात्मक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। झामुमो किसान मोर्चा के पलामू जिलाध्यक्ष बशिष्ठ कुमार सिंह उर्फ बबलू सिंह ने इसे जनजातीय समाज के अधिकारों को मजबूत करने वाला ऐतिहासिक निर्णय बताया। उन्होंने कहा कि यह कदम ग्रामसभा को वास्तविक शक्ति देकर लोकतंत्र को जमीनी स्तर पर सशक्त करता है। पेसा नियमावली की स्वीकृति झारखंड में स्वशासन और जनभागीदारी की दिशा में निर्णायक पहल मानी जा रही है।

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  • पेसा नियमावली को मंजूरी मिलने पर झामुमो नेता ने जताया आभार।
  • मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को बताया झारखंडी अस्मिता का सच्चा प्रतिनिधि।
  • ग्रामसभा को निर्णायक अधिकार मिलने से लोकतंत्र मजबूत होने का दावा।
  • स्थानीय संसाधनों पर समुदाय का अधिकार होगा और सशक्त।
  • जनजातीय सुशासन को नई दिशा मिलने की जताई उम्मीद।

हुसैनाबाद, पलामू में झारखंड सरकार के पेसा नियमावली को मंजूरी देने के फैसले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज है। झामुमो किसान मोर्चा के पलामू जिलाध्यक्ष बशिष्ठ कुमार सिंह उर्फ बबलू सिंह ने इस फैसले का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के प्रति आभार प्रकट किया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय केवल एक प्रशासनिक कदम नहीं, बल्कि जनजातीय समाज के संवैधानिक अधिकारों की पुनर्स्थापना है।

बबलू सिंह ने कहा कि पेसा नियमावली की स्वीकृति यह प्रमाणित करती है कि राज्य सरकार आदिवासी समाज और ग्राम स्वशासन के अधिकारों को लेकर गंभीर और प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से आदिवासी बहुल क्षेत्रों में ग्रामसभा को वास्तविक अधिकारों की प्रतीक्षा थी, जिसे अब पूरा किया गया है।

ग्रामसभा को मिला निर्णायक अधिकार

झामुमो नेता ने कहा कि पेसा नियमावली के लागू होने से ग्रामसभा को निर्णायक भूमिका मिलेगी। इससे पंचायत स्तर पर योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता बढ़ेगी और जनता की सीधी भागीदारी सुनिश्चित होगी।

बशिष्ठ कुमार सिंह उर्फ बबलू सिंह ने कहा: “ग्रामसभा को अधिकार देकर सरकार ने लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत किया है, जिससे विकास की रफ्तार भी तेज होगी।”

उन्होंने यह भी कहा कि अब विकास योजनाएं कागजों तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि गांवों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप लागू होंगी।

जनजातीय सुशासन को मिलेगी नई दिशा

बबलू सिंह ने कहा कि पेसा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन से जल, जंगल और जमीन जैसे स्थानीय संसाधनों पर समुदाय का अधिकार मजबूत होगा। इससे जनजातीय क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी और सुशासन की नई शुरुआत होगी।

उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज के लिए यह नियमावली सम्मान और स्वाभिमान से जुड़ा विषय है, क्योंकि इससे उनकी परंपरागत व्यवस्था और निर्णय प्रक्रिया को संवैधानिक मान्यता मिलती है।

हेमंत सोरेन को बताया झारखंडी अस्मिता का मुख्यमंत्री

झामुमो किसान मोर्चा के जिलाध्यक्ष ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की प्रशंसा करते हुए कहा कि वे सच्चे अर्थों में झारखंडी अस्मिता के मुख्यमंत्री हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा लिए गए फैसले झारखंड की जनता की भावनाओं के अनुरूप हैं।

बबलू सिंह ने कहा: “जनहित में लिए गए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्णय न केवल झारखंड, बल्कि देश के अन्य राज्यों के लिए भी अनुकरणीय हैं।”

उन्होंने विश्वास जताया कि पेसा नियमावली का प्रभावी क्रियान्वयन झारखंड को देश में जनजातीय स्वशासन का आदर्श मॉडल बनाएगा।

ग्रामीण लोकतंत्र को मिलेगी मजबूती

बबलू सिंह ने यह भी कहा कि इस निर्णय से ग्रामीण लोकतंत्र मजबूत होगा और शासन व्यवस्था में जनता की भागीदारी बढ़ेगी। इससे सामाजिक न्याय, समान विकास और पारदर्शिता को बढ़ावा मिलेगा।

उन्होंने कहा कि झामुमो किसान मोर्चा पेसा नियमावली के सही क्रियान्वयन के लिए गांव-गांव जाकर जागरूकता अभियान भी चलाएगा, ताकि लोग अपने अधिकारों को समझ सकें और उनका उपयोग कर सकें।

न्यूज़ देखो: झारखंड में स्वशासन की नई दिशा

पेसा नियमावली को मंजूरी झारखंड में ग्राम स्वशासन और जनजातीय अधिकारों के लिए बड़ा कदम है। यह फैसला बताता है कि राज्य सरकार जमीनी लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। अब असली चुनौती इसके प्रभावी क्रियान्वयन की होगी, ताकि इसका लाभ वास्तव में ग्रामसभा और आम लोगों तक पहुंचे। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

अधिकारों की समझ से सशक्त होगा समाज

पेसा नियमावली जैसे निर्णय तभी सफल होंगे, जब लोग अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होंगे। ग्रामसभा की भूमिका को समझना और उसमें सक्रिय भागीदारी निभाना समय की जरूरत है।
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Written by

हुसैनाबाद, पलामू

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