#मेदिनीनगर #नगर_निगम : मेयर और डिप्टी मेयर चैंबर पर खर्च को लेकर विवाद गहराया।
मेदिनीनगर नगर निगम में मेयर और डिप्टी मेयर चैंबर की सजावट पर प्रस्तावित खर्च को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। झामुमो नेता सन्नी शुक्ला ने करीब 10 लाख रुपये के टेंडर पर सवाल उठाते हुए इसे जनता के टैक्स के पैसों की फिजूलखर्ची बताया। उन्होंने कहा कि शहर की मूलभूत समस्याओं को नजरअंदाज कर जनप्रतिनिधियों के कमरों की सजावट को प्राथमिकता देना गलत संदेश देता है।
- सन्नी शुक्ला ने मेयर और डिप्टी मेयर चैंबर पर खर्च पर उठाए सवाल।
- दो चैंबरों की सजावट के लिए करीब 10 लाख रुपये के टेंडर पर विवाद।
- झामुमो नेता ने इसे जनता के टैक्स की फिजूलखर्ची बताया।
- शहर में पानी, सड़क और सफाई की समस्याओं का मुद्दा उठाया।
- निगम के 35 पार्षदों से प्रस्ताव का विरोध करने की अपील।
- गरीबों के प्रधानमंत्री आवास से तुलना कर खर्च पर जताई आपत्ति।
मेदिनीनगर नगर निगम में मेयर और डिप्टी मेयर के चैंबर की सजावट के लिए प्रस्तावित खर्च को लेकर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। झामुमो नेता सन्नी शुक्ला ने इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए नगर निगम प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से जवाब मांगा है।
10 लाख के टेंडर पर उठे सवाल
सन्नी शुक्ला ने कहा कि मेयर और डिप्टी मेयर के केवल दो चैंबरों की सजावट पर लगभग 10 लाख रुपये खर्च करने का प्रस्ताव आम जनता के साथ अन्याय है।
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जब प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत गरीब परिवारों को पूरे घर के निर्माण के लिए लगभग 2 लाख रुपये दिए जाते हैं, तो आखिर एक कमरे में ऐसा क्या लगाया जाएगा कि उस पर 5 लाख रुपये खर्च करने की जरूरत पड़ रही है।
सन्नी शुक्ला ने कहा: “प्रधानमंत्री आवास के लिए गरीब जनता निगम के दफ्तरों के चक्कर काटती है, लेकिन जनप्रतिनिधियों के चैंबर की सजावट इमरजेंसी बन गई है।”
शहर की समस्याओं को लेकर जताई चिंता
झामुमो नेता ने कहा कि वर्तमान समय में मेदिनीनगर शहर पानी की समस्या, खराब सड़कों और सफाई व्यवस्था जैसी मूलभूत समस्याओं से जूझ रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि जनता की समस्याओं को प्राथमिकता देने के बजाय नगर निगम अपने आराम और सुविधाओं पर लाखों रुपये खर्च करने में लगा हुआ है।
उन्होंने कहा: “जनता टैक्स विकास के लिए देती है, किसी के आलीशान आरामगाह के लिए नहीं।”
प्रधानमंत्री की अपील का भी किया जिक्र
सन्नी शुक्ला ने बयान में प्रधानमंत्री द्वारा फिजूलखर्ची रोकने की अपील का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जहां देश में बचत और जिम्मेदार खर्च की बात की जा रही है, वहीं नगर निगम में जनप्रतिनिधियों के कमरों की सजावट पर लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
उन्होंने इसे जनता की भावनाओं के खिलाफ बताया।
पार्षदों से की अपील
सन्नी शुक्ला ने नगर निगम के सभी 35 पार्षदों से अपील की कि वे जनता की आवाज बनें और ऐसे प्रस्तावों का समर्थन न करें, जिनसे जनता के टैक्स के पैसों का गलत इस्तेमाल हो।
उन्होंने कहा कि पार्षदों को अपने वार्ड की सड़क, पानी, सफाई और अन्य जरूरी समस्याओं को प्राथमिकता देनी चाहिए।
सन्नी शुक्ला ने कहा: “जनता ने पार्षदों को समस्याओं के समाधान के लिए चुना है, न कि सत्ता के कमरों की सजावट पर मुहर लगाने के लिए।”
राजनीतिक माहौल हुआ गर्म
इस बयान के बाद नगर निगम की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। अब लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि निगम प्रशासन और संबंधित जनप्रतिनिधि इस मुद्दे पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।
शहर में भी इस खर्च को लेकर चर्चा का माहौल बना हुआ है और लोग नगर निगम की प्राथमिकताओं पर सवाल उठा रहे हैं।
न्यूज़ देखो: जनता की जरूरतें पहले या सत्ता के कमरे?
नगर निगम जैसी संस्थाओं का पहला दायित्व जनता की मूलभूत समस्याओं का समाधान करना होता है। ऐसे समय में जब शहर पानी, सड़क और सफाई जैसी समस्याओं से जूझ रहा हो, तब जनप्रतिनिधियों के चैंबर पर भारी खर्च सवाल खड़े करता है। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि जनता के टैक्स का पैसा पारदर्शिता और प्राथमिक जरूरतों पर ही खर्च हो। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
जनता के पैसों का उपयोग जनता के हित में हो
लोकतंत्र में हर खर्च जनता के भरोसे से जुड़ा होता है।
विकास तभी सार्थक है जब उसका लाभ आम नागरिकों तक पहुंचे।
जनप्रतिनिधियों और प्रशासन को जनता की प्राथमिकताओं को सबसे ऊपर रखना चाहिए।
अपनी राय जरूर रखें, खबर साझा करें और जिम्मेदार प्रशासन की मांग को मजबूत बनाएं।

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