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मनिका नरबलि कांड में ऐतिहासिक फैसला, दोहरे हत्या के आरोपी को उम्रकैद और छह लाख जुर्माना

#मनिका #लातेहार #न्याय_निर्णय : वर्ष 2019 के चर्चित नरबलि कांड में अदालत ने दोषी को कठोरतम सजा सुनाई।

लातेहार जिले के मनिका थाना क्षेत्र में वर्ष 2019 में हुए दोहरे नरबलि कांड में अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वितीय संजय कुमार दुबे की अदालत ने आरोपी सुनील उरांव को दो नाबालिगों की हत्या का दोषी पाते हुए सश्रम उम्रकैद और भारी जुर्माने की सजा दी। यह फैसला वर्षों तक चले विचारण के बाद आया है। न्यायालय के इस निर्णय से पीड़ित परिवारों को न्याय की अनुभूति हुई है।

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  • दोहरे नरबलि कांड में आरोपी को उम्रकैद।
  • कुल नौ लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया।
  • दो नाबालिगों की हत्या और शव छुपाने का मामला।
  • अदालत में 10 गवाहों की हुई गवाही।
  • वर्ष 2019 का अत्यंत चर्चित मामला।

लातेहार जिले के मनिका थाना क्षेत्र अंतर्गत माइल सेमर हट गांव में वर्ष 2019 में सामने आया नरबलि का मामला पूरे झारखंड में दहशत और आक्रोश का विषय बना था। इस जघन्य अपराध में दो नाबालिग बच्चों की हत्या कर शव छुपा दिए गए थे। शुक्रवार को इस मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वितीय संजय कुमार दुबे की अदालत ने अपना बहुप्रतीक्षित फैसला सुनाया।

अदालत का ऐतिहासिक निर्णय

अदालत ने आरोपी सुनील उरांव, पिता रावण उरांव, निवासी ग्राम माइल सेमर हट, को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत दोषी ठहराते हुए अधिकतम सश्रम उम्रकैद की सजा सुनाई। इसके साथ ही अदालत ने आरोपी पर छह लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में उसे अतिरिक्त तीन वर्षों का साधारण कारावास भुगतना होगा।

इसके अलावा शव छुपाने के अपराध में भादवि की धारा 201 के तहत आरोपी को सात वर्षों का साधारण कारावास और तीन लाख रुपये का जुर्माना सुनाया गया है। इस जुर्माने का भुगतान न करने पर एक वर्ष का अतिरिक्त साधारण कारावास भी भुगतना होगा।

क्या था पूरा मामला

यह मामला सत्रवाद संख्या 183/2019 के तहत अदालत में विचाराधीन था। 11 जुलाई 2019 को सूचक वीरेंद्र उरांव ने मनिका थाना कांड संख्या 26/2019 दर्ज कराया था। शिकायत के अनुसार दो नाबालिग बच्चे—निर्मल उरांव और शीला कुमारी—दो दिनों से लापता थे।

जांच के दौरान दोनों बच्चों के शव आरोपी सुनील उरांव के घर के आंगन में बालू के ढेर में छुपाए हुए मिले। शव मिलने की स्थिति अत्यंत भयावह थी, जिससे पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई थी।

गवाहों की अहम भूमिका

अपर जिला लोक अभियोजक शिव शंकर राम ने अदालत में बताया कि अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 10 गवाहों को प्रस्तुत किया गया। अधिकांश गवाहों ने आरोपी की संलिप्तता की पुष्टि की।

महत्वपूर्ण गवाह बिहारी उरांव ने अदालत में बयान दिया कि उसकी बेटी शीला कुमारी यह कहकर घर से निकली थी कि वह मोबाइल चार्ज करने सुनील उरांव के घर जा रही है, लेकिन इसके बाद वह कभी लौटकर नहीं आई।

कैसे हुआ अपराध का खुलासा

सूचक वीरेंद्र उरांव किसी काम से आरोपी के घर पहुंचे थे। उस समय आरोपी अपने आंगन में स्नान कर रहा था। घर में खून की बूंदें देखकर जब उससे पूछताछ की गई, तो उसने कहा कि उसने देवता को मुर्गा की बलि दी है।

लेकिन वीरेंद्र उरांव की नजर आंगन में रखे बालू के ढेर पर गई, जहां से मानव हाथ की उंगलियां दिखाई दे रही थीं। शक गहराने पर वे गांव पहुंचे और ग्रामीणों को जानकारी दी। ग्रामीणों और परिजनों के साथ जब बालू हटाया गया, तो दोनों बच्चों की सिरकटी लाशें बरामद हुईं।

सिर की बरामदगी और पुलिस कार्रवाई

पुलिस के पहुंचने के बाद आरोपी ने पूछताछ में स्वीकार किया कि उसने शीला कुमारी का सिर अपने घर के बाहर स्थित देव स्थल के पास गाड़ दिया था, जिसे पुलिस ने खुदाई कर बरामद किया। वहीं निर्मल उरांव का सिर आरोपी की निशानदेही पर लेस्लीगंज थाना क्षेत्र से बरामद किया गया।

पुलिस जांच में आरोपी ने स्वीकार किया कि उसने अच्छी फसल और घर में अनहोनी से बचाव के लिए अपने देवता की पूजा के नाम पर दोनों नाबालिगों की नरबलि दी थी।

जांच और न्यायिक प्रक्रिया

पुलिस ने मामले की गहन जांच कर 5 अक्टूबर 2019 को अदालत में आरोप पत्र समर्पित किया था। आरोपी के विरुद्ध 9 जुलाई 2020 को आरोप गठन किया गया। लंबे समय तक चले विचारण के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी पाते हुए फैसला सुरक्षित रखा और शुक्रवार को सजा का ऐलान किया।

पीड़ित परिवारों को मिला न्याय

अदालत का फैसला सुनते ही न्यायालय कक्ष में मौजूद पीड़ित परिवारों की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। उन्होंने कहा कि वर्षों की पीड़ा और इंतजार के बाद उन्हें आज न्याय मिला है।

न्यूज़ देखो: अंधविश्वास के खिलाफ कड़ा संदेश

मनिका नरबलि कांड में आया यह फैसला अंधविश्वास और अमानवीय कृत्यों के खिलाफ एक मजबूत संदेश है। अदालत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी आस्था या विश्वास के नाम पर निर्दोषों की हत्या को समाज और कानून स्वीकार नहीं करेगा। यह निर्णय भविष्य में ऐसे अपराधों पर रोक लगाने की दिशा में अहम माना जा रहा है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

अंधविश्वास नहीं, कानून पर भरोसा करें

यह मामला समाज को सोचने पर मजबूर करता है कि अंधश्रद्धा किस हद तक मानवता को कुचल सकती है। जागरूक बनें, ऐसे अपराधों के खिलाफ आवाज उठाएं और कानून पर भरोसा रखें। अपनी राय कमेंट करें, खबर साझा करें और समाज में चेतना फैलाने में अपनी भूमिका निभाएं।

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