Latehar

ओरसा घाटी में भीषण बस हादसा, इलाज व्यवस्था पर संकट, कई मौतों की आशंका से क्षेत्र में हड़कंप

#महुआडांड़ #बस_हादसा : ओरसा पाठ घाटी में पलटी यात्रियों से भरी बस, स्वास्थ्य व्यवस्था दबाव में।

लातेहार जिले के महुआडांड़ प्रखंड स्थित ओरसा पाठ घाटी में रविवार को एक गंभीर सड़क हादसा हुआ, जब यात्रियों से भरी बस अनियंत्रित होकर पलट गई। बस छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले से झारखंड के लोध गांव जा रही थी, जिसमें शादी समारोह में शामिल होने जा रहे यात्री सवार थे। प्रारंभिक और अपुष्ट सूचनाओं के अनुसार हादसे में कई लोगों की मौत की आशंका है और बड़ी संख्या में यात्री घायल हुए हैं। घटना के बाद प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड में है, जबकि सीमित स्वास्थ्य संसाधनों के कारण इलाज व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है।

Join News देखो WhatsApp Channel
  • ओरसा पाठ घाटी, महुआडांड़ में भीषण सड़क हादसा।
  • बस बलरामपुर से लोध गांव जा रही थी।
  • शादी समारोह में शामिल होने जा रहे थे यात्री।
  • 50 से अधिक यात्री घायल, कई की हालत गंभीर।
  • सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र महुआडांड़ में इलाज जारी।

लातेहार जिले के महुआडांड़ क्षेत्र में रविवार को हुआ यह बस हादसा पूरे इलाके के लिए गहरी चिंता का विषय बन गया है। झारखंड–छत्तीसगढ़ सीमा पर स्थित ओरसा पाठ घाटी में यात्रियों से भरी बस के पलटते ही मौके पर अफरा-तफरी मच गई। यह घाटी क्षेत्र पहाड़ी और घुमावदार होने के कारण पहले से ही दुर्घटनाओं के लिए संवेदनशील माना जाता है।

जानकारी के अनुसार, दुर्घटनाग्रस्त बस छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले से झारखंड के महुआडांड़ थाना क्षेत्र अंतर्गत लोध ग्राम की ओर जा रही थी। बस में सवार अधिकांश यात्री एक ही क्षेत्र के बताए जा रहे हैं, जो सामूहिक रूप से शादी की मेहमानी में शामिल होने जा रहे थे। ओरसा घाटी के तीखे मोड़ों पर बस चालक का नियंत्रण बिगड़ गया और बस पलटते हुए सड़क किनारे जा गिरी।

हादसे के बाद मौके पर मची अफरा-तफरी

बस पलटते ही यात्रियों की चीख-पुकार गूंज उठी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कई यात्री बस के अंदर और नीचे दब गए थे। आसपास के ग्रामीणों ने बिना देरी किए घटनास्थल पर पहुंचकर राहत कार्य शुरू किया। स्थानीय लोगों ने प्रशासन के पहुंचने से पहले ही कई घायलों को बस से बाहर निकाला।

ग्रामीणों ने बताया कि दुर्घटना की आवाज दूर तक सुनाई दी, जिसके बाद लोग मौके पर दौड़े चले आए। कुछ घायलों की हालत बेहद गंभीर थी और उन्हें तत्काल चिकित्सा सहायता की आवश्यकता थी।

पुलिस और प्रशासन ने संभाली स्थिति

हादसे की सूचना मिलते ही महुआडांड़ थाना प्रभारी मनोज कुमार पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से रेस्क्यू अभियान शुरू कराया। बस के नीचे फंसे यात्रियों को बाहर निकालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।

पुलिस ने यातायात को नियंत्रित करते हुए घायलों को प्राथमिक उपचार के लिए अस्पताल भेजने की व्यवस्था की। प्रशासन की ओर से एंबुलेंस और अन्य संसाधन उपलब्ध कराए गए, हालांकि घाटी क्षेत्र होने के कारण राहत कार्य में समय लगा।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर बढ़ा दबाव

घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र महुआडांड़ लाया गया, जहां प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी अमित के नेतृत्व में डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की टीम इलाज में जुटी है। लेकिन घायलों की संख्या अधिक होने के कारण अस्पताल की सीमित व्यवस्था पर भारी दबाव देखने को मिला।

स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार डॉक्टरों की कमी के चलते कई घायलों का इलाज जमीन पर लिटाकर करना पड़ा। कुछ गंभीर रूप से घायल मरीजों को बेहतर इलाज के लिए रेफर करने की तैयारी भी की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग ने आसपास के स्वास्थ्य केंद्रों को भी सतर्क रहने का निर्देश दिया है।

मानवीय अपील, डॉक्टरों से सहयोग की मांग

इस भयावह हादसे के बाद उत्थान समिति, महुआडांड़ की ओर से एक मानवीय अपील जारी की गई है। समिति ने महुआडांड़ प्रखंड में कार्यरत सभी मान्यता-प्राप्त मेडिकल डॉक्टरों से आग्रह किया है कि वे सरकारी हॉस्पिटल, महुआडांड़ पहुंचकर घायल और आपातकालीन मरीजों के इलाज में सहयोग करें।

समिति ने कहा कि वर्तमान में सरकारी अस्पताल में डॉक्टरों की भारी कमी है, जिसके कारण विशेष रूप से गरीब और दूरदराज़ क्षेत्रों से आए मरीजों को गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। समय पर इलाज नहीं मिलने से कई मरीजों की हालत बिगड़ने का खतरा बना हुआ है।

मृतकों की संख्या पर सस्पेंस बरकरार

फिलहाल प्रशासन की ओर से मृतकों और घायलों की आधिकारिक संख्या की पुष्टि नहीं की गई है। प्रारंभिक सूचनाओं में कई लोगों की मौत की आशंका जताई जा रही है, लेकिन प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और आधिकारिक जानकारी का इंतजार करने की अपील की है।

मृतक

संवेदनशील घाटी में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

ओरसा पाठ घाटी में यह हादसा एक बार फिर पहाड़ी इलाकों में सड़क सुरक्षा की स्थिति पर सवाल खड़े करता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते घाटी क्षेत्र में सुरक्षा उपाय, संकेतक और निगरानी व्यवस्था मजबूत की जाती, तो शायद इस तरह की घटनाओं को रोका जा सकता था।

न्यूज़ देखो: हादसे ने उजागर की स्वास्थ्य और सड़क सुरक्षा की हकीकत

यह दुर्घटना न केवल एक सड़क हादसा है, बल्कि यह ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य संसाधनों और आपात व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को भी सामने लाती है। सीमित डॉक्टर, संसाधनों की कमी और संवेदनशील सड़कों पर लचर व्यवस्था चिंता का विषय है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस घटना से क्या सबक लेता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

संकट की घड़ी में एकजुटता ही सबसे बड़ी ताकत

ऐसे हादसों में समय पर सहयोग और संवेदनशीलता जीवन बचा सकती है।
मानवता के नाते आगे आएं, जरूरतमंदों की मदद करें और जागरूक बनें।
अपनी राय साझा करें, खबर को आगे बढ़ाएं और जनहित से जुड़े मुद्दों पर आवाज उठाएं।

📥 Download E-Paper

यह खबर आपके लिए कितनी महत्वपूर्ण थी?

रेटिंग देने के लिए किसी एक स्टार पर क्लिक करें!

इस खबर की औसत रेटिंग: 0 / 5. कुल वोट: 0

अभी तक कोई वोट नहीं! इस खबर को रेट करने वाले पहले व्यक्ति बनें।

चूंकि आपने इस खबर को उपयोगी पाया...

हमें सोशल मीडिया पर फॉलो करें!

IMG-20251223-WA0009
IMG-20250723-WA0070
आगे पढ़िए...

नीचे दिए बटन पर क्लिक करके हमें सोशल मीडिया पर फॉलो करें


Related News

ये खबर आपको कैसी लगी, अपनी प्रतिक्रिया दें

Back to top button
error: