25 मई तक वार्ता नहीं हुई तो 26 मई से बालमुकुंद फैक्ट्री का होगा गेट जाम, मजदूर संगठनों ने दी चेतावनी

25 मई तक वार्ता नहीं हुई तो 26 मई से बालमुकुंद फैक्ट्री का होगा गेट जाम, मजदूर संगठनों ने दी चेतावनी

author News देखो Team
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#गिरिडीह #मजदूर_धरना : छंटनीग्रस्त मजदूरों की बहाली को लेकर आंदोलन और तेज करने की घोषणा की गई।

टुंडी रोड स्थित बालमुकुंद फैक्ट्री के सामने असंगठित मजदूर मोर्चा द्वारा चलाया जा रहा अनिश्चितकालीन धरना नौवें दिन भी जारी रहा। धरनार्थी हटाए गए पांच मजदूरों को काम पर वापस रखने और अन्य मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि 25 मई तक मांगों पर वार्ता नहीं हुई तो 26 मई सुबह 5 बजे से फैक्ट्री गेट अनिश्चितकाल के लिए जाम कर दिया जाएगा। आंदोलन को लेकर जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों को लिखित सूचना भी भेज दी गई है।

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  • बालमुकुंद फैक्ट्री के खिलाफ नौवें दिन भी जारी रहा धरना।
  • हटाए गए पांच मजदूरों की बहाली की मांग को लेकर प्रदर्शन।
  • 26 मई से गेट जाम आंदोलन की दी गई चेतावनी।
  • आंदोलन की सूचना उपायुक्त, एसडीओ और थाना प्रभारी को भेजी गई।
  • धरनार्थियों ने फैक्ट्री पर अवैध बालू उठाव का भी लगाया आरोप।
  • आंदोलन में माले और असंगठित मजदूर मोर्चा के कई नेता रहे मौजूद।

बालमुकुंद फैक्ट्री के खिलाफ मजदूरों का आंदोलन लगातार लंबा खिंचता जा रहा है। टुंडी रोड स्थित फैक्ट्री के समक्ष असंगठित मजदूर मोर्चा द्वारा चलाया जा रहा अनिश्चितकालीन धरना नौवें दिन भी जारी रहा। धरनार्थी हटाए गए पांच मजदूरों को दोबारा काम पर रखने और अन्य मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। आंदोलनकारी नेताओं का कहना है कि अब तक न तो फैक्ट्री प्रबंधन ने वार्ता की पहल की है और न ही प्रशासन ने इस मामले में गंभीरता दिखाई है।

26 मई से गेट जाम आंदोलन का ऐलान

धरना स्थल पर आयोजित सभा में नेताओं ने कहा कि यदि 25 मई 2026 तक मजदूरों की मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं की गई तो 26 मई को सुबह 5 बजे से बालमुकुंद फैक्ट्री का गेट अनिश्चितकाल के लिए जाम कर दिया जाएगा।

नेताओं ने बताया कि इस संबंध में 20 मई 2026 को गिरिडीह उपायुक्त, अनुमंडल पदाधिकारी, कारखाना निरीक्षक और मुफस्सिल थाना प्रभारी को लिखित सूचना भेज दी गई है। साथ ही फैक्ट्री प्रबंधन और प्रबंधक को भी आंदोलन की जानकारी दे दी गई है।

मजदूरों की बहाली को लेकर जारी है आंदोलन

धरनार्थियों का कहना है कि फैक्ट्री प्रबंधन द्वारा पांच मजदूरों को हटाया जाना पूरी तरह अन्यायपूर्ण है। मजदूरों का आरोप है कि लंबे समय से काम कर रहे श्रमिकों को बिना उचित कारण के काम से बाहर कर दिया गया।

आंदोलनकारी संगठनों ने कहा कि जब तक हटाए गए मजदूरों को वापस काम पर नहीं रखा जाएगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। मजदूरों ने इसे अपने अधिकार और सम्मान की लड़ाई बताया।

अवैध बालू ढुलाई पर भी उठे सवाल

धरना स्थल पर नेताओं ने बालमुकुंद फैक्ट्री पर अवैध रूप से बालू उठाव कराने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ट्रैक्टरों के माध्यम से अवैध बालू ढुलाई की जा रही है और इस पर प्रशासन को तत्काल रोक लगानी चाहिए।

धरनार्थियों ने कहा कि वे इस मुद्दे पर भी लगातार नजर बनाए हुए हैं और यदि जरूरत पड़ी तो इसे लेकर अलग से आंदोलन किया जाएगा।

प्रशासन को पहले ही दी गई थी सूचना

असंगठित मजदूर मोर्चा ने बताया कि 14 मई 2026 से शुरू हुए इस अनिश्चितकालीन धरना कार्यक्रम की सूचना 9 मई 2026 को ही अनुमंडल पदाधिकारी, उपायुक्त और मुफस्सिल थाना प्रभारी को पत्र के माध्यम से दे दी गई थी।

18 मई 2026 को आयोजित आमसभा में असंगठित मजदूर मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष सह सिंदरी विधायक चंद्रदेव महतो, केंद्रीय सचिव निताय महतो, माले जिला सचिव अशोक पासवान, राज्य कमेटी सदस्य पूरन महतो और किशोरी अग्रवाल की मौजूदगी में आंदोलन को और तेज करने का निर्णय लिया गया।

कई नेता और मजदूर रहे मौजूद

धरना स्थल पर आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मजदूर और स्थानीय लोग शामिल हुए। कार्यक्रम में कन्हाई पांडे, नवीन पांडे, दीपक गोस्वामी, हूबलाल राय, भिखारी राय, सूदन कोल, अरबिंद टुडू, भीम कोल, लखन कोल, सुनील ठाकुर, बीरेंद्र चौधरी, मनोज चौधरी, महताब अंसारी और दिलीप राय मौजूद रहे।

धरनार्थियों ने एकजुट होकर कहा कि वे शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपने अधिकारों की लड़ाई जारी रखेंगे।

न्यूज़ देखो: लगातार बढ़ रहा आंदोलन प्रशासन के लिए चुनौती

बालमुकुंद फैक्ट्री के खिलाफ जारी आंदोलन अब प्रशासन और प्रबंधन दोनों के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। लगातार नौ दिनों से जारी धरना और अब गेट जाम आंदोलन की घोषणा से साफ है कि मजदूर संगठनों का रुख और सख्त हो गया है। यदि समय रहते वार्ता और समाधान की पहल नहीं हुई तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। प्रशासन की जिम्मेदारी है कि मजदूरों की मांगों और फैक्ट्री प्रबंधन दोनों पक्षों को सुनकर निष्पक्ष समाधान निकाला जाए। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

मजदूरों की समस्याओं का समाधान संवाद से ही संभव

किसी भी उद्योग की सफलता उसके मेहनतकश मजदूरों पर निर्भर करती है। यदि श्रमिक खुद को असुरक्षित और उपेक्षित महसूस करेंगे तो असंतोष बढ़ना स्वाभाविक है। इसलिए जरूरी है कि उद्योग प्रबंधन और प्रशासन समय रहते संवाद और समाधान का रास्ता अपनाएं।

लोकतांत्रिक आंदोलनों का उद्देश्य केवल विरोध नहीं बल्कि न्याय और अधिकारों की मांग भी होता है। शांतिपूर्ण संवाद और संवेदनशीलता ही ऐसे विवादों का स्थायी समाधान बन सकती है।

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