लावालौंग में 3000 एकड़ वन भूमि पर अवैध अफीम की खेती, पुलिस ने 880 एकड़ फसल नष्ट की

लावालौंग में 3000 एकड़ वन भूमि पर अवैध अफीम की खेती, पुलिस ने 880 एकड़ फसल नष्ट की

author Binod Kumar
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#लावालौंग #चतरा #अवैधअफीमखेती : वन भूमि पर फैली खेती से बढ़ी प्रशासनिक चिंता।

चतरा जिले के लावालौंग थाना क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध अफीम की खेती सामने आई है। अनुमान है कि करीब 3000 एकड़ से अधिक वन भूमि पर यह खेती फैली हुई है। पुलिस ने अब तक 880 एकड़ में लगी फसल को नष्ट करने की कार्रवाई की है। मामले ने पर्यावरण और कानून व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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  • लावालौंग थाना क्षेत्र में लगभग 3000 एकड़ वन भूमि पर अवैध खेती।
  • दुर्गम पहाड़ी और जंगली इलाकों में फैला नेटवर्क।
  • पुलिस ने अब तक 880 एकड़ में लगी फसल नष्ट की।
  • स्थानीय लोगों ने वन विभाग की भूमिका पर उठाए सवाल।
  • दोषियों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी।

चतरा जिले के लावालौंग थाना क्षेत्र में अवैध अफीम की खेती ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। जानकारी के अनुसार क्षेत्र के विभिन्न पंचायतों के कई गांवों की वन भूमि पर बड़े पैमाने पर अफीम की खेती की जा रही है। अनुमान है कि यह अवैध खेती करीब 3000 एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैली हुई है। इस कारण पर्यावरणीय संतुलन और कानून-व्यवस्था दोनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

दुर्गम जंगलों में फैला अवैध नेटवर्क

सूत्रों के मुताबिक यह खेती मुख्य रूप से दुर्गम पहाड़ी और घने जंगली इलाकों में की जा रही है, जहां सामान्य निगरानी करना चुनौतीपूर्ण है। इन क्षेत्रों तक पहुंचने के लिए कठिन रास्तों से गुजरना पड़ता है, जिसका फायदा अवैध कारोबार में संलिप्त लोग उठा रहे हैं।

क्षेत्र में फैली इस खेती को लेकर स्थानीय लोग दबी जुबान में लावालौंग को “मिनी अफगानिस्तान” तक कहने लगे हैं। हालांकि यह उपमा स्थिति की गंभीरता को दर्शाती है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर इसे चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।

पर्यावरण और कानून व्यवस्था पर असर

वन भूमि पर बड़े पैमाने पर अवैध खेती से न सिर्फ जंगलों की प्राकृतिक संरचना को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि इससे क्षेत्र में आपराधिक गतिविधियों के बढ़ने की आशंका भी बनी रहती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की खेती से मिट्टी की गुणवत्ता और जैव विविधता पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

स्थानीय ग्रामीणों ने वन विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते सख्त निगरानी की जाती तो इतनी बड़ी मात्रा में खेती संभव नहीं हो पाती। हालांकि इस संबंध में विभागीय स्तर पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

पुलिस की कार्रवाई जारी

थाना प्रभारी प्रशांत कुमार मिश्रा ने बताया कि पुलिस द्वारा लगातार अभियान चलाया जा रहा है।

थाना प्रभारी प्रशांत कुमार मिश्रा ने कहा: “अब तक करीब 880 एकड़ में लगी अफीम की खेती को नष्ट किया जा चुका है। दोषियों की पहचान कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है और अभियान आगे भी जारी रहेगा।”

पुलिस की ओर से नियमित रूप से छापेमारी और फसल विनष्ट करने की कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि आने वाले दिनों में निगरानी और कड़ी की जाएगी, ताकि शेष अवैध खेती को भी पूरी तरह समाप्त किया जा सके।

आगे की चुनौती

इतने बड़े क्षेत्र में फैली अवैध खेती को पूरी तरह खत्म करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है। इसके लिए पुलिस, वन विभाग और स्थानीय प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता मानी जा रही है। साथ ही ग्रामीणों को जागरूक कर वैकल्पिक आजीविका के साधन उपलब्ध कराना भी आवश्यक है, ताकि लोग इस अवैध गतिविधि से दूर रह सकें।

न्यूज़ देखो: सख्ती के साथ समाधान भी जरूरी

लावालौंग में सामने आया यह मामला बताता है कि अवैध अफीम की खेती सिर्फ कानून का मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक और पर्यावरणीय चुनौती भी है। कार्रवाई जरूरी है, लेकिन इसके साथ दीर्घकालिक रणनीति भी उतनी ही अहम होगी। क्या प्रशासन समन्वित प्रयासों से इस समस्या पर स्थायी नियंत्रण पा सकेगा? हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

जंगल बचेंगे तो भविष्य सुरक्षित रहेगा

वन भूमि हमारी साझा धरोहर है। अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने के साथ समाज को भी जागरूक होना होगा। प्रशासन की कार्रवाई के साथ नागरिक सहयोग भी जरूरी है। यदि आपके क्षेत्र में ऐसी गतिविधियां दिखें तो संबंधित अधिकारियों को सूचित करें। अपनी राय कमेंट में साझा करें और खबर को आगे बढ़ाकर जागरूकता फैलाएं।

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Written by

लावालोंग, चतरा

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