#गढ़वा #बहाली_रद्द : आयुष नियुक्ति में गड़बड़ी—जांच रिपोर्ट के आधार पर चयन निरस्त।
गढ़वा में योग प्रशिक्षकों की बहाली में अनियमितता पाए जाने के बाद नियुक्ति रद्द कर दी गई है। उपायुक्त के आदेश पर जांच के बाद यह कार्रवाई हुई। नए सिरे से चयन प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया गया है। आवेदकों ने इस निर्णय का स्वागत किया है।
- योग प्रशिक्षक बहाली रद्द करने का आदेश जारी।
- जांच में नियम विरुद्ध चयन की पुष्टि।
- उपायुक्त ने नए विज्ञापन का निर्देश दिया।
- शिकायत जनता दरबार में दर्ज हुई थी।
- आवेदकों ने निष्पक्ष कार्रवाई का स्वागत किया।
गढ़वा जिले में योग प्रशिक्षकों की बहाली में अनियमितता पाए जाने के बाद जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पूरी नियुक्ति प्रक्रिया को रद्द कर दिया है। यह कार्रवाई उपायुक्त के आदेश पर की गई, जिसमें जांच रिपोर्ट में चयन प्रक्रिया में गड़बड़ी की पुष्टि हुई।
यह मामला राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में योग प्रशिक्षकों की नियुक्ति से जुड़ा था।
शिकायत के बाद शुरू हुई जांच
जानकारी के अनुसार, इस बहाली को लेकर शशि भूषण मेहता, संजय कुमार पासवान सहित कई आवेदकों ने 18 नवंबर 2025 को जनता दरबार में शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायतकर्ताओं ने कहा: “बहाली प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई।”
अनुमंडल पदाधिकारी से कराई गई जांच
शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच अनुमंडल पदाधिकारी रंका से कराई गई। जांच प्रतिवेदन में स्पष्ट रूप से अनियमितताओं की पुष्टि की गई।
जांच रिपोर्ट में कहा गया कि चयन प्रक्रिया नियमों के विरुद्ध की गई थी।
नियुक्ति तत्काल प्रभाव से रद्द
जांच रिपोर्ट के आधार पर उपायुक्त ने विज्ञापन संख्या 01/2025 के तहत चयनित सभी पुरुष और महिला योग प्रशिक्षकों की नियुक्ति को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया।
नए सिरे से होगी बहाली
उपायुक्त ने निर्देश दिया है कि अब नियमानुसार योग प्रशिक्षकों की बहाली के लिए पुनः विज्ञापन जारी किया जाएगा।
विभाग को निर्देश
इस आदेश की प्रतिलिपि जिला आयुष चिकित्सा पदाधिकारी और सिविल सर्जन सह मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी को भेजते हुए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।
आवेदकों ने जताया आभार
इस कार्रवाई के बाद आवेदकों ने उपायुक्त के प्रति आभार व्यक्त करते हुए इसे निष्पक्ष जांच और न्यायपूर्ण कदम बताया।
एक आवेदक ने कहा: “यह निर्णय पारदर्शिता की दिशा में एक बड़ा कदम है।”
प्रशासनिक सख्ती का संदेश
यह कार्रवाई यह स्पष्ट संकेत देती है कि नियुक्तियों में किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
पारदर्शिता पर जोर
इस पूरे घटनाक्रम से यह भी सामने आता है कि पारदर्शी प्रक्रिया ही सही चयन की कुंजी है।
न्यूज़ देखो: गड़बड़ी पर सख्ती जरूरी
गढ़वा का यह मामला दिखाता है कि यदि शिकायतों की निष्पक्ष जांच हो, तो अनियमितताओं पर लगाम लगाई जा सकती है। अब देखना होगा कि नई बहाली प्रक्रिया कितनी पारदर्शी होती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
पारदर्शिता से ही मिलेगा न्याय
हर नियुक्ति प्रक्रिया निष्पक्ष होनी चाहिए।
जरूरी है कि योग्य उम्मीदवारों को अवसर मिले।
अनियमितता के खिलाफ आवाज उठाना जरूरी है।
आइए, हम पारदर्शी व्यवस्था की मांग करें।
अपनी राय कमेंट में साझा करें, खबर को शेयर करें और जागरूकता फैलाएं।

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