
#पटना #रेस्क्यू_अभियान : पटना में संयुक्त टीम ने 11 बच्चों को बचाया।
जिलाधिकारी पटना के निर्देश पर 06 जनवरी 2025 को पटना जंक्शन और आसपास के इलाकों में विशेष रेस्क्यू अभियान चलाया गया। इस अभियान का पर्यवेक्षण सहायक निदेशक बाल संरक्षण शैलेंद्र कुमार चौधरी ने किया। संयुक्त टीम ने नशापान करते और भिक्षावृत्ति में शामिल 10 बालकों और एक बालिका को सुरक्षित निकाला। बच्चों को पुनर्वास हेतु बाल गृह और बालिका गृह में आवासित कराया गया।
- जिलाधिकारी पटना डॉ त्यागराजन एस एम के निर्देश पर कार्रवाई।
- अभियान का पर्यवेक्षण सहायक निदेशक बाल संरक्षण शैलेंद्र कुमार चौधरी ने किया।
- पटना जंक्शन और आसपास से कुल 10 बालक और एक बालिका का रेस्क्यू।
- नशापान और भिक्षावृत्ति में शामिल बच्चों को सुरक्षित निकाला गया।
- रेस्क्यू किए गए बच्चों को बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
- सभी बच्चों को समयबद्ध तरीके से पुनर्वास केंद्रों में भेजा गया।
पटना में जिला प्रशासन द्वारा बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण को लेकर लगातार ठोस पहल की जा रही है। इसी कड़ी में बीते 06 जनवरी 2025 को पटना जंक्शन पर एक महत्वपूर्ण रेस्क्यू ड्राइव आयोजित किया गया। यह अभियान जिलाधिकारी पटना डॉ त्यागराजन एस एम के स्पष्ट निर्देश पर संचालित हुआ। इस मुहिम का मुख्य उद्देश्य सड़क पर असुरक्षित माहौल में रह रहे बच्चों को संरक्षण देना और उन्हें नशापान तथा भिक्षावृत्ति जैसी गतिविधियों से बाहर निकालना था। संयुक्त टीम के प्रयास से कुल 11 बच्चों और एक महिला का सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया गया। यह पहल सामाजिक दृष्टिकोण से बेहद अहम मानी जा रही है।
रेस्क्यू अभियान की पृष्ठभूमि
पटना जिले में बाल संरक्षण तंत्र को मजबूत करने के उद्देश्य से जिलाधिकारी द्वारा हाल ही में बाल संरक्षण एवं श्रम संसाधन विभाग की जिला स्तरीय बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में उन्होंने निर्देश दिया था कि सार्वजनिक स्थलों, विशेषकर रेलवे स्टेशनों के आसपास, लगातार निगरानी रखते हुए रेस्क्यू अभियान चलाए जाएं। इसी निर्देश के आलोक में पटना जंक्शन को केंद्रित कर यह विशेष ड्राइव प्लान किया गया।
सहायक निदेशक बाल संरक्षण शैलेंद्र कुमार चौधरी के पर्यवेक्षण में इस अभियान की पूरी रूपरेखा तैयार की गई। इसमें चाइल्ड हेल्प लाइन, मानव तस्करी रोधी इकाई, जीआरपी और आरपीएफ के अधिकारियों व कर्मियों की संयुक्त टीम का गठन किया गया, ताकि अभियान को प्रभावी और त्वरित बनाया जा सके।
किन परिस्थितियों से निकाले गए बच्चे
संयुक्त टीम ने पटना जंक्शन एवं उसके आसपास के क्षेत्रों में देर शाम से सघन तलाशी अभियान शुरू किया। इस दौरान ऐसे बच्चों की पहचान की गई जो खुले में नशापान करते पाए गए थे अथवा भिक्षावृत्ति में संलग्न थे। टीम के सदस्यों ने इन बच्चों से बातचीत कर उनकी वास्तविक स्थिति को समझा और उन्हें सुरक्षित वातावरण में ले जाया गया।
अभियान के दौरान कुल 10 बालकों और एक बालिका को रेस्क्यू किया गया। इसके अतिरिक्त दो छोटे बच्चों के साथ एक महिला को भी टीम द्वारा सुरक्षित निकाला गया। यह सभी बच्चे लंबे समय से सड़क किनारे बेहद कठिन और असुरक्षित परिस्थितियों में जीवन गुजार रहे थे, जहाँ ठंड, भूख और असामाजिक तत्वों का खतरा लगातार बना रहता है।
कानूनी प्रक्रिया का पालन
रेस्क्यू के तुरंत बाद सभी बच्चों को नियमानुसार बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया। समिति ने प्रत्येक बच्चे के मामले की समीक्षा की और उनके हित को ध्यान में रखते हुए आवश्यक निर्देश जारी किए। इसके बाद रेस्क्यू किए गए बालकों को बाल गृह में तथा बालिका को बालिका गृह में आवासित कराया गया, जहाँ उनकी देखभाल, भोजन, वस्त्र और चिकित्सा की समुचित व्यवस्था उपलब्ध है।
वहीं महिला और उनके साथ रेस्क्यू किए गए दो बच्चों को अस्थायी संरक्षण के लिए शांति कुटीर में ठहराया गया। प्रशासन द्वारा यह सुनिश्चित किया गया कि किसी भी बच्चे को दोबारा सड़क पर लौटने की मजबूरी न हो।
अधिकारियों का स्पष्ट संदेश
इस अभियान के संबंध में सहायक निदेशक बाल संरक्षण शैलेंद्र कुमार चौधरी ने बताया कि जिला प्रशासन बच्चों के भविष्य को लेकर बेहद गंभीर है। उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी पटना के निर्देश पर आगे भी इस तरह के अभियान निरंतर चलाए जाएंगे ताकि शहर को बालश्रम, नशापान और भिक्षावृत्ति से मुक्त बनाया जा सके।
जिलाधिकारी पटना डॉ त्यागराजन एस एम ने पूर्व की बैठक में कहा था: “पटना जिले में बच्चों का संरक्षण हमारी प्राथमिकता है। सार्वजनिक स्थलों पर बच्चे नशापान करते या भीख मांगते नजर न आएं, इसके लिए नियमित रेस्क्यू ड्राइव जरूरी है।”
उनके इस निर्देश ने संबंधित सभी विभागों को सक्रियता के साथ काम करने के लिए प्रेरित किया है। यही कारण है कि इतने कम समय में यह सफल कार्रवाई संभव हो सकी।
सामाजिक समरसता की दिशा में पहल
यह अभियान केवल कानूनी कार्रवाई भर नहीं है, बल्कि एक व्यापक सामाजिक सरोकार से जुड़ी मुहिम है। सड़क पर रहने वाले बच्चे अक्सर शिक्षा, स्वास्थ्य और पारिवारिक संरक्षण से वंचित हो जाते हैं। ऐसे में प्रशासनिक स्तर पर की गई यह पहल उनके जीवन में नई उम्मीद जगाने का कार्य करती है।
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि यदि मतदाता सूची पुनरीक्षण, बाल संरक्षण और महिला सशक्तिकरण जैसे अभियानों में इसी तरह की जनभागीदारी और प्रशासनिक तत्परता बनी रही तो पटना जैसे बड़े शहरों में भी सकारात्मक बदलाव साफ दिखाई देंगे।
संयुक्त टीम का योगदान
इस पूरे रेस्क्यू अभियान में चाइल्ड हेल्प लाइन के सदस्य, मानव तस्करी रोधी इकाई के कर्मी, जीआरपी और आरपीएफ के पदाधिकारी पूरी निष्ठा के साथ शामिल रहे। सभी ने आपसी समन्वय स्थापित कर बच्चों को सुरक्षित निकालने, उन्हें समझाने और पुनर्वास केंद्रों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अभियान की सफलता यह दर्शाती है कि जब कई विभाग एक साथ मिलकर कार्य करते हैं तो जटिल से जटिल समस्या का समाधान भी आसानी से किया जा सकता है।

न्यूज़ देखो: जिम्मेदार पहल से मिला नया जीवन
पटना जंक्शन पर चलाया गया यह रेस्क्यू अभियान प्रशासनिक संवेदनशीलता का सकारात्मक उदाहरण है। यह घटना बताती है कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर सरकारी तंत्र अब पहले से अधिक सक्रिय हुआ है। सार्वजनिक स्थलों पर असुरक्षित माहौल में रह रहे बच्चों के लिए आगे भी ठोस कार्ययोजना जरूरी है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
सजग समाज के निर्माण में भागीदार बनें
पटना जिले में चलाया गया यह अभियान हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि समाज के कमजोर वर्ग के प्रति हमारी जिम्मेदारी क्या है। ऐसे बच्चे जो सड़क पर भटक रहे हैं, उन्हें संरक्षण दिलाना केवल प्रशासन का ही नहीं, हम सबका कर्तव्य है। आप भी अपने आसपास नजर आने वाले असहाय बच्चों की सूचना चाइल्ड हेल्प लाइन या नजदीकी थाने को जरूर दें।
सजग रहें, सक्रिय बनें। जरूरतमंदों के हित में उठाए जा रहे कदमों का समर्थन करें। अपनी राय कमेंट करें, इस खबर को अधिक से अधिक लोगों तक साझा करें और बाल संरक्षण की इस मुहिम को मजबूत करने में सहयोगी बनें।





