लातेहार के जामडीह में 25 किलोमीटर दूर मतदान केंद्र, लोकतंत्र बना मजबूरी और अधिकार रहा अधूरा

लातेहार के जामडीह में 25 किलोमीटर दूर मतदान केंद्र, लोकतंत्र बना मजबूरी और अधिकार रहा अधूरा

author Ramesh Prasad
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#महुआडांड़ #लातेहार #मतदानसमस्या : जामडीह गांव के मतदाताओं को वोट देने के लिए 25 किमी दूर जाना पड़ता है।

लातेहार जिले के महुआडांड़ प्रखंड के ओरसा पंचायत स्थित जामडीह गांव में मतदाताओं को अपने मतदान अधिकार के लिए 20 से 25 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। करीब 1000 मतदाताओं वाला यह गांव वर्षों से बुनियादी मतदान सुविधा से वंचित है। इस कारण बुजुर्ग, महिलाएं और दिव्यांग मतदाता मतदान से दूर रह जाते हैं। यह स्थिति लोकतांत्रिक व्यवस्था की जमीनी हकीकत और प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करती है।

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  • जामडीह गांव के करीब 1000 मतदाता मतदान के लिए 20–25 किमी दूर जाने को मजबूर।
  • बुजुर्ग, महिलाएं और दिव्यांग मतदाता दूरी के कारण मतदान से वंचित।
  • वर्षों पुरानी समस्या के बावजूद प्रशासनिक पहल का अभाव
  • कागजों में पूरी व्यवस्था, लेकिन जमीनी स्तर पर लोकतंत्र कमजोर
  • ग्रामीणों ने उठाया सवाल — क्या मतदान अधिकार सुविधा नहीं, मजबूरी बन गया है

लातेहार जिले के महुआडांड़ प्रखंड अंतर्गत ओरसा पंचायत का जामडीह गांव आज भी बुनियादी लोकतांत्रिक सुविधा से वंचित है। यहां के करीब 1000 मतदाताओं को अपना वोट डालने के लिए 20 से 25 किलोमीटर दूर तक जाना पड़ता है। यह दूरी केवल भौगोलिक समस्या नहीं बल्कि प्रशासनिक उपेक्षा और व्यवस्था की खामियों का प्रतीक बन चुकी है।

ग्रामीणों का कहना है कि मतदान जैसे महत्वपूर्ण अधिकार के लिए इतनी लंबी दूरी तय करना उनके लिए बेहद कठिन होता है। खासकर बुजुर्ग, महिलाएं और दिव्यांग मतदाता इस समस्या से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। कई बार तो लोग चाहकर भी मतदान नहीं कर पाते, जिससे उनका लोकतांत्रिक अधिकार अधूरा रह जाता है।

25 किलोमीटर दूर मतदान केंद्र, बड़ी चुनौती

जामडीह गांव के मतदाताओं को वोट देने के लिए 20 से 25 किलोमीटर दूर स्थित मतदान केंद्र तक जाना पड़ता है। गांव में न तो उचित सड़क सुविधा है और न ही परिवहन के पर्याप्त साधन उपलब्ध हैं।

ऐसी स्थिति में मतदान के दिन ग्रामीणों को सुबह से ही लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। कई बार खराब मौसम या अन्य कारणों से यह यात्रा और भी कठिन हो जाती है।

ग्रामीणों का कहना है कि इतनी दूरी तय करना किसी सजा से कम नहीं है, खासकर उन लोगों के लिए जो शारीरिक रूप से कमजोर हैं।

बुजुर्ग और दिव्यांग मतदाता सबसे ज्यादा प्रभावित

इस समस्या का सबसे ज्यादा असर बुजुर्ग, महिलाएं और दिव्यांग मतदाताओं पर पड़ रहा है। लंबी दूरी और साधनों की कमी के कारण वे मतदान केंद्र तक पहुंच ही नहीं पाते।

ग्रामीणों के अनुसार कई बुजुर्ग मतदाता पिछले कई चुनावों से मतदान नहीं कर पा रहे हैं, क्योंकि उनके लिए इतनी दूरी तय करना संभव नहीं है।

एक ग्रामीण ने कहा: “हम लोग वोट देना चाहते हैं, लेकिन 20-25 किलोमीटर दूर जाना हमारे लिए बहुत मुश्किल है। कई लोग रास्ते में ही थक जाते हैं या फिर लौट जाते हैं।”

यह स्थिति लोकतंत्र की मूल भावना के खिलाफ है, जहां हर नागरिक को समान रूप से मतदान का अधिकार दिया गया है।

वर्षों पुरानी समस्या, समाधान अब तक नहीं

सबसे चिंताजनक बात यह है कि जामडीह गांव की यह समस्या नई नहीं है। ग्रामीणों के अनुसार यह समस्या कई वर्षों से बनी हुई है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई है।

कागजों में भले ही मतदान व्यवस्था पूरी दिखाई जाती हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां करती है। प्रशासन की अनदेखी के कारण यह समस्या लगातार बनी हुई है।

ग्रामीणों ने कई बार स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से इस समस्या के समाधान की मांग की, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

लोकतंत्र पर उठते सवाल

जामडीह गांव की स्थिति यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या लोकतंत्र केवल कागजों तक सीमित रह गया है। जब किसी व्यक्ति को अपने अधिकार का उपयोग करने के लिए इतनी कठिनाई का सामना करना पड़े, तो यह व्यवस्था की विफलता को दर्शाता है।

ग्रामीणों का कहना है कि मतदान अधिकार एक बुनियादी अधिकार है, जिसे आसानी से उपलब्ध होना चाहिए। लेकिन यहां यह अधिकार एक मजबूरी बनकर रह गया है।

ग्रामीणों ने सवाल उठाया: “जब वोट देने के लिए 25 किलोमीटर चलना पड़े, तो यह अधिकार नहीं बल्कि मजबूरी बन जाता है।”

प्रशासन से समाधान की उम्मीद

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जामडीह गांव के लिए नजदीक में मतदान केंद्र की व्यवस्था की जाए, ताकि सभी लोग आसानी से अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें।

उनका कहना है कि यदि प्रशासन इस दिशा में पहल करता है तो न केवल मतदान प्रतिशत बढ़ेगा, बल्कि लोकतंत्र की जड़ों को भी मजबूती मिलेगी।

न्यूज़ देखो: लोकतंत्र की असली परीक्षा जमीनी हकीकत में

जामडीह गांव की यह स्थिति बताती है कि लोकतंत्र केवल नारे और कागजों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे जमीनी स्तर पर मजबूत बनाना जरूरी है। जब नागरिक अपने मूल अधिकार का उपयोग नहीं कर पाते, तो यह व्यवस्था की बड़ी खामी को दर्शाता है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर कब और कैसे ठोस कदम उठाता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

अपने अधिकार के लिए जागरूक बनें और आवाज उठाएं

मतदान केवल एक अधिकार नहीं बल्कि हमारी जिम्मेदारी भी है। लेकिन यह भी जरूरी है कि यह अधिकार सभी के लिए सुलभ हो। यदि कहीं भी ऐसी समस्या है, तो उसे सामने लाना और समाधान की मांग करना हम सभी का कर्तव्य है।

अपने गांव, अपने क्षेत्र की समस्याओं को नजरअंदाज न करें। जागरूक बनें, सवाल उठाएं और प्रशासन तक अपनी आवाज पहुंचाएं।

अपनी राय कमेंट में जरूर साझा करें, इस खबर को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाएं और लोकतंत्र को मजबूत बनाने में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाएं।

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Written by

महुवाडांड़, लातेहार

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