ओवरलोडिंग बनी मौत का कारण, स्कूली बच्चों से भरा टेम्पो पलटा, एक छात्र की दर्दनाक मौत

ओवरलोडिंग बनी मौत का कारण, स्कूली बच्चों से भरा टेम्पो पलटा, एक छात्र की दर्दनाक मौत

author News देखो Team
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#महुआडांड़ #सड़क_हादसा : स्कूली बच्चों से भरा टेम्पो पलटने से एक की मौत।

लातेहार के महुआडांड़ में स्कूली बच्चों से भरा एक टेम्पो पलटने से दर्दनाक हादसा हो गया, जिसमें कक्षा सात के छात्र अंकुर मिंज की मौत हो गई और कई बच्चे घायल हो गए। प्राथमिक जांच में ओवरलोडिंग को मुख्य कारण माना गया है। घटना के बाद क्षेत्र में शोक और आक्रोश का माहौल है।

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  • महुआडांड़ में बच्चों से भरा ओवरलोड टेम्पो पलटने से हादसा।
  • कक्षा 7 के छात्र अंकुर मिंज की मौत, दर्जनों बच्चे घायल।
  • एक टेम्पो में करीब 30 बच्चे सवार, चालक के पास भी भीड़।
  • ग्रामीणों ने घायलों को पहुंचाया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र
  • पुलिस जांच में ओवरलोडिंग हादसे की मुख्य वजह सामने आई।

महुआडांड़ प्रखंड क्षेत्र में गुरुवार को एक दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। संत मिखाईल स्कूल, साले से छुट्टी के बाद घर लौट रहे बच्चों से भरा एक टेम्पो अनियंत्रित होकर पलट गया। इस हादसे में कक्षा सात के छात्र अंकुर मिंज (पिता– एलेस्युस मिंज, ग्राम अक्सी) की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कई अन्य छात्र-छात्राएं घायल हो गए। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है।

कैसे हुआ हादसा

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, स्कूल की छुट्टी के बाद लगभग 30 बच्चे एक ही टेम्पो में सवार होकर अपने-अपने गांव लौट रहे थे। जैसे ही वाहन साले बस्ती पार कर ग्राम मौनाडीह के पास मुख्य सड़क पर पहुंचा, चालक के पास भी 5-6 लोग बैठे होने के कारण वाहन का संतुलन बिगड़ गया।

टेम्पो अचानक अनियंत्रित होकर सड़क पर पलट गया। हादसा इतना अचानक हुआ कि बच्चों को संभलने का मौका तक नहीं मिला।

मौके पर मचा कोहराम

हादसे के बाद घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई। आसपास के ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे और मानवता का परिचय देते हुए घायल बच्चों को टेम्पो से बाहर निकाला। इसके बाद सभी घायलों को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र महुआडांड़ पहुंचाया गया।

घटना की सूचना मिलते ही बच्चों के परिजन भी अस्पताल पहुंचे। अस्पताल परिसर में गमगीन माहौल के बीच परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था।

घायल बच्चों की पहचान

इस हादसे में कई बच्चे घायल हुए हैं, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—

आर्तीक बाड़ा (पिता- पीटर बाड़ा), सोनू एक्का (पिता- एलियाजर एक्का), अवैश कुजुर (पिता- जोसेफ कुजूर), अनुज उरांव (पिता- कृष्णा उरांव), शुभम खलखो (पिता- रेमोन खलखो), अनुरूपा एक्का (पिता- फुलजेंस एक्का), नेहा टोप्पो (पिता- ईश्वर टोप्पो), प्रिज्मा केरकेट्टा (पिता- अविरल केरकेट्टा), एंजेल टोप्पो (पिता- सुनील टोप्पो), वर्तिका केरकेट्टा, अर्श मिंज, साक्षी टोप्पो सहित ग्राम अक्सी के कई अन्य बच्चे।

अन्य कई बच्चों को भी हल्की चोटें आई हैं, जिनका इलाज जारी है।

पुलिस जांच में ओवरलोडिंग बनी वजह

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि टेम्पो में क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाया गया था, जिससे हादसा हुआ।

पहले भी दी गई थी चेतावनी

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि इस क्षेत्र में स्कूली बच्चों को इसी तरह ओवरलोड वाहनों में लाया-ले जाया जाता है। कई बार इसको लेकर चेतावनी भी दी गई थी।

थाना प्रभारी मनोज कुमार द्वारा पहले भी संत जेवियर महाविद्यालय, संत जोसफ विद्यालय सहित अन्य शिक्षण संस्थानों में यातायात नियमों को लेकर जागरूकता अभियान चलाया गया था।

मनोज कुमार ने कहा: “वाहन जांच के दौरान कई बार ओवरलोडिंग करने वालों को चेतावनी दी गई थी, लेकिन लापरवाही जारी रही।”

जिम्मेदारी किसकी?

यह हादसा एक बार फिर कई गंभीर सवाल खड़े करता है—
क्या स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी नहीं बनती कि बच्चों के सुरक्षित परिवहन की व्यवस्था करे?
क्या अभिभावकों को भी इस खतरे के प्रति जागरूक नहीं होना चाहिए?
और क्या प्रशासन की सख्ती पर्याप्त है?

एक मासूम की मौत ने इन सभी सवालों को फिर से जिंदा कर दिया है।

क्षेत्र में शोक और आक्रोश

इस घटना के बाद पूरे महुआडांड़ क्षेत्र में शोक और आक्रोश का माहौल है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि स्कूली बच्चों के लिए सुरक्षित परिवहन व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

साथ ही ओवरलोडिंग करने वाले वाहन चालकों और जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई की मांग भी उठ रही है।

न्यूज़ देखो: कब रुकेगी लापरवाही से होने वाली मौतें

यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सिस्टम की लापरवाही का परिणाम है। ओवरलोडिंग जैसी समस्या पर लगातार चेतावनी के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हो पाती? प्रशासन, स्कूल और अभिभावकों—तीनों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। सवाल है कि क्या इस बार सख्ती होगी या फिर अगली घटना का इंतजार किया जाएगा? हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

अब समय है जागरूक होने का, नहीं तो हादसे दोहराए जाएंगे

हर दिन स्कूल जाने वाले बच्चे देश का भविष्य हैं, उनकी सुरक्षा से समझौता किसी भी कीमत पर नहीं होना चाहिए।

अगर हम आज भी ओवरलोडिंग जैसे खतरों को नजरअंदाज करते रहे, तो ऐसी घटनाएं रुकेंगी नहीं। जरूरत है मिलकर आवाज उठाने की और जिम्मेदारों को जवाबदेह बनाने की।

अपने बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दें, जोखिम भरे वाहनों का विरोध करें और इस खबर को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाएं। आपकी एक जागरूकता कई जिंदगियां बचा सकती है।

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