कड़ाके की ठंड में झारखंड विश्वनाथ मंदिर तीसीबार धाम बना जरूरतमंदों का सहारा, सैकड़ों को मिला कंबल

कड़ाके की ठंड में झारखंड विश्वनाथ मंदिर तीसीबार धाम बना जरूरतमंदों का सहारा, सैकड़ों को मिला कंबल

author Tirthraj Dubey
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#पाण्डु #सेवाऔरमानवता : पलामू जिले के पाण्डु प्रखंड स्थित झारखंड विश्वनाथ मंदिर तीसीबार धाम ने शीतलहर के बीच जरूरतमंदों को कंबल वितरित कर सामाजिक दायित्व की मिसाल पेश की।
  • झारखंड विश्वनाथ मंदिर तीसीबार धाम द्वारा कंबल वितरण कार्यक्रम का आयोजन।
  • असहाय बुजुर्गों, निर्धन महिलाओं और गरीब परिवारों को मिली राहत।
  • मंदिर प्रबंधक विनय कुमार दुबे ने सेवा को मंदिर की परंपरा बताया।
  • मंदिर देखरेखकर्ता सोना कुमार दुबे ने हर वर्ष सेवा कार्य जारी रहने की जानकारी दी।
  • पुजारी रामा शंकर पांडेय ने मानव सेवा को सच्ची ईश्वर सेवा बताया।
  • स्थानीय ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने पहल की जमकर सराहना की।

पलामू जिले के पाण्डु प्रखंड अंतर्गत तीसीबार पंचायत स्थित झारखंड विश्वनाथ मंदिर, तीसीबार धाम ने कड़ाके की ठंड के बीच मानवता और सेवा भावना की अनुकरणीय मिसाल पेश की है। शीतलहर और गिरते तापमान के कारण बढ़ती परेशानियों को देखते हुए मंदिर समिति की ओर से जरूरतमंदों के बीच कंबल वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस सेवा कार्य से सैकड़ों असहाय बुजुर्गों, निर्धन महिलाओं और गरीब परिवारों को बड़ी राहत मिली और उनके चेहरों पर मुस्कान देखने को मिली।

ठंड से राहत देने का संकल्प

मंदिर प्रबंधक विनय कुमार दुबे ने कार्यक्रम के दौरान बताया कि लगातार गिरते तापमान और शीतलहर को ध्यान में रखते हुए मंदिर समिति ने यह निर्णय लिया, ताकि कोई भी जरूरतमंद ठंड के कारण परेशान न हो।

विनय कुमार दुबे ने कहा: “झारखंड विश्वनाथ मंदिर केवल आस्था का केंद्र नहीं है, बल्कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने वाला संस्थान भी है। कमजोर और जरूरतमंद वर्गों की सेवा करना हमारी परंपरा रही है।”

उन्होंने कहा कि मंदिर समिति का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के हर उस व्यक्ति तक सहायता पहुंचाना है, जिसे इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है।

हर वर्ष जारी रहती है सेवा परंपरा

मंदिर की देखरेख कर रहे सोना कुमार दुबे ने जानकारी दी कि झारखंड विश्वनाथ मंदिर की ओर से हर वर्ष ठंड के मौसम में कंबल वितरण, जरूरतमंदों की सहायता और अन्य सेवा कार्य नियमित रूप से किए जाते हैं।

सोना कुमार दुबे ने बताया: “यह कार्यक्रम कोई एक दिन का आयोजन नहीं है। हर साल ठंड के मौसम में मंदिर परिवार जरूरतमंदों के लिए सेवा कार्य करता है और आगे भी यह परंपरा लगातार जारी रहेगी।”

उन्होंने कहा कि समाज के सहयोग से भविष्य में सेवा कार्यों का दायरा और बढ़ाया जाएगा।

मानव सेवा ही सच्ची ईश्वर सेवा

कार्यक्रम के दौरान मंदिर के पुजारी रामा शंकर पांडेय ने मानवता और सेवा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जरूरतमंदों की मदद करना ही सच्ची पूजा है।

रामा शंकर पांडेय ने कहा: “मानव सेवा ही सच्ची ईश्वर सेवा है। किसी जरूरतमंद के चेहरे पर मुस्कान लाना सबसे बड़ा पुण्य है।”

उनके इस संदेश ने उपस्थित लोगों को भावुक कर दिया और सेवा कार्यों में बढ़-चढ़कर भाग लेने के लिए प्रेरित किया।

मंदिर परिवार और ग्रामीणों की रही सक्रिय सहभागिता

कंबल वितरण कार्यक्रम के दौरान मंदिर परिवार के सभी सदस्य, स्थानीय ग्रामीण और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने सेवा कार्य में सहयोग किया और जरूरतमंदों तक कंबल पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाई। कार्यक्रम शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ।

समाज में सकारात्मक संदेश

स्थानीय लोगों ने झारखंड विश्वनाथ मंदिर तीसीबार धाम की इस पहल की जमकर सराहना की। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे सेवा कार्य समाज में सकारात्मक संदेश देते हैं और अन्य धार्मिक व सामाजिक संस्थाओं को भी प्रेरित करते हैं।

उनका मानना है कि जब धार्मिक स्थल सामाजिक सरोकारों से जुड़ते हैं, तब समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक भी सहायता पहुंच पाती है।

न्यूज़ देखो: आस्था के साथ सामाजिक जिम्मेदारी

झारखंड विश्वनाथ मंदिर तीसीबार धाम का यह सेवा कार्य दिखाता है कि धार्मिक संस्थाएं यदि सामाजिक जिम्मेदारी निभाएं, तो समाज में बड़ा बदलाव संभव है। ठंड के इस मौसम में कंबल वितरण जैसी पहल जरूरतमंदों के लिए संजीवनी साबित होती है।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

सेवा से ही बनता है संवेदनशील समाज

जब समाज के सक्षम लोग जरूरतमंदों का हाथ थामते हैं, तभी सच्चे अर्थों में मानवता जीवित रहती है। तीसीबार धाम की यह पहल हमें यह सिखाती है कि छोटा सा प्रयास भी किसी के लिए बड़ी राहत बन सकता है।
ऐसे सेवा कार्यों को प्रोत्साहित करें, अपनी राय साझा करें और इस खबर को आगे बढ़ाकर दूसरों को भी मानव सेवा के लिए प्रेरित करें।

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Written by

पांडु, पलामू

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