मैक्लुस्कीगंज में चार साल से अधूरा सड़क निर्माण बना संकट ग्रामीणों ने उठाए अनियमितता पर सवाल

मैक्लुस्कीगंज में चार साल से अधूरा सड़क निर्माण बना संकट ग्रामीणों ने उठाए अनियमितता पर सवाल

author Jitendra Giri
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#खलारी #सड़क_समस्या : मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना का कार्य अधूरा, ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ा।

खलारी प्रखंड के मैक्लुस्कीगंज क्षेत्र में मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत निर्माणाधीन सड़क चार वर्षों बाद भी अधूरी पड़ी है। मुन्ना अग्रवाल के घर से थाना और कोनका गांव तक जाने वाली इस सड़क में कई स्थानों पर पुल निर्माण अधूरा है। इससे आवागमन बाधित हो रहा है और ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ गया है। प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग की जा रही है।

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  • मैक्लुस्कीगंज क्षेत्र में चार किलोमीटर लंबी सड़क चार साल से अधूरी।
  • 7 सितंबर 2022 को संजय सेठ और समरीलाल ने किया था शिलान्यास।
  • तीन स्थानों पर पुल निर्माण अधूरा, सड़क खोदकर छोड़ी गई।
  • आंशिक पीसीसी सड़क में भी अनियमितता का आरोप।
  • स्कूली बच्चों और ग्रामीणों को आवागमन में भारी परेशानी।
  • ग्रामीणों ने प्रशासन से जांच और शीघ्र निर्माण की मांग की।

खलारी प्रखंड के मैक्लुस्कीगंज क्षेत्र में मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनने वाली सड़क अब ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण बन गई है। चार वर्षों से अधूरी पड़ी इस सड़क के कारण लोगों को रोजाना कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। सड़क निर्माण में हो रही देरी और अनियमितताओं को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है।

चार साल बाद भी अधूरा निर्माण

जानकारी के अनुसार, लगभग चार किलोमीटर लंबी यह सड़क मुन्ना अग्रवाल के घर से शुरू होकर मैक्लुस्कीगंज थाना, विद्युत स्टेशन कोनका गांव होते हुए मुख्य मार्ग तक जाती है। इस परियोजना का शिलान्यास 7 सितंबर 2022 को रांची सांसद संजय सेठ और कांके विधायक समरीलाल द्वारा किया गया था।

निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बावजूद सड़क का मजबूतीकरण और सुदृढ़ीकरण कार्य आज तक पूरा नहीं हो सका है। निर्माण कार्य की धीमी गति और लापरवाही ने ग्रामीणों को परेशान कर दिया है।

पुल निर्माण अधूरा, रास्ता बना खतरा

ग्रामीणों ने बताया कि सड़क निर्माण के दौरान तीन स्थानों पर पुल बनाने के लिए सड़क को खोद दिया गया, लेकिन उसे अधूरा छोड़ दिया गया है। पिछले दो महीनों से इन स्थानों पर आवागमन पूरी तरह बाधित है।

रात के समय स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, क्योंकि अंधेरे में इन गड्ढों का पता नहीं चल पाता, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। कई बार छोटे हादसे भी हो चुके हैं, जिससे लोगों में भय का माहौल है।

पीसीसी सड़क में भी अनियमितता का आरोप

ग्रामीणों का कहना है कि जहां-जहां पीसीसी सड़क बनाई गई है, वहां भी गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। निर्माण कार्य में मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है, जिससे सड़क की मजबूती पर संदेह पैदा हो गया है।

लोगों ने आरोप लगाया कि संवेदक और संबंधित विभाग की लापरवाही के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है, जिससे सरकारी योजना का उद्देश्य ही प्रभावित हो रहा है।

स्कूली बच्चों और आम लोगों को परेशानी

इस अधूरी सड़क का सबसे ज्यादा असर स्कूली बच्चों और दैनिक आवागमन करने वाले लोगों पर पड़ रहा है। बच्चों को स्कूल जाने के लिए वैकल्पिक और कठिन रास्तों का सहारा लेना पड़ रहा है।

बरसात या अंधेरे के समय स्थिति और खराब हो जाती है, जिससे अभिभावकों की चिंता भी बढ़ गई है। ग्रामीणों ने कहा कि अगर जल्द ही सड़क का निर्माण पूरा नहीं हुआ, तो समस्या और गंभीर हो सकती है।

ग्रामीणों का आक्रोश और प्रशासन से मांग

स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि संबंधित विभाग और जनप्रतिनिधि इस गंभीर समस्या को नजरअंदाज कर रहे हैं। कई बार शिकायत करने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द निर्माण कार्य को पूरा कराया जाए और अनियमितताओं की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए, ताकि आम लोगों को राहत मिल सके।

न्यूज़ देखो: योजनाओं की सुस्ती ने बढ़ाई जनता की परेशानी

मैक्लुस्कीगंज की यह स्थिति सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही को उजागर करती है। चार वर्षों तक एक सड़क का अधूरा रहना न केवल संसाधनों की बर्बादी है, बल्कि आम जनता के जीवन को भी प्रभावित करता है। प्रशासन को इस मामले में गंभीरता दिखाते हुए त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह बनाना होगा। क्या अब इस सड़क का निर्माण जल्द पूरा होगा, यह बड़ा सवाल है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

विकास तभी सार्थक जब हर गांव तक पहुंचे सुविधा

ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क जैसी बुनियादी सुविधा का अधूरा रहना विकास की असल तस्वीर को सामने लाता है। अगर योजनाएं समय पर पूरी नहीं होंगी, तो आम लोगों का भरोसा भी कमजोर पड़ेगा।

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Written by

खलारी, रांची

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