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इंद मेला सामाजिक एकता और भाईचारे की जीवंत मिसाल, सिमिरिया में रंगारंग सांस्कृतिक आयोजन में उमड़ा जनसैलाब

#बांसजोर #सांस्कृतिक_उत्सव : सिमिरिया में इंद मेला के अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम, परंपरा और एकता का संदेश।

बांसजोर प्रखंड के सिमिरिया गांव में युवा क्लब संघ द्वारा इंद मेला सह सांस्कृतिक कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में झामुमो जिलाध्यक्ष अनिल कंडुलना मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए, जिनका पारंपरिक ढोल-नगाड़ों के साथ स्वागत किया गया। मेला समिति और महिला मंडल समूह ने अतिथियों का स्वागत गीत और पारंपरिक सम्मान के साथ अभिनंदन किया। इंद मेला को सामाजिक एकता, सांस्कृतिक विरासत और भाईचारे का प्रतीक बताते हुए वक्ताओं ने इसकी महत्ता रेखांकित की।

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  • बांसजोर प्रखंड के सिमिरिया गांव में इंद मेला सह सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित।
  • युवा क्लब संघ द्वारा आयोजन, झामुमो जिलाध्यक्ष अनिल कंडुलना रहे मुख्य अतिथि।
  • ढोल-नगाड़े, स्वागत गान और सामूहिक फीता काटकर उद्घाटन
  • लोकप्रिय कलाकारों द्वारा भक्ति वंदना और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां
  • हजारों दर्शक और मेला प्रेमी कार्यक्रम में हुए शामिल।

बांसजोर प्रखंड क्षेत्र के सिमिरिया गांव में आयोजित इंद मेला सह सांस्कृतिक कार्यक्रम ने पूरे क्षेत्र को उत्सवमय माहौल में बदल दिया। युवा क्लब संघ द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में परंपरा, संस्कृति और सामाजिक एकता का अद्भुत संगम देखने को मिला। मुख्य अतिथि झारखंड मुक्ति मोर्चा के जिला अध्यक्ष अनिल कंडुलना सहित अन्य अतिथियों का पारंपरिक ढोल-नगाड़ों की थाप पर नाचते-गाते मंच तक लाया गया, जिससे कार्यक्रम की शुरुआत से ही उल्लास का वातावरण बन गया।

पारंपरिक स्वागत और विधिवत उद्घाटन

कार्यक्रम में महिला मंडल समूह द्वारा स्वागत गान प्रस्तुत किया गया, वहीं मेला समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने अतिथियों को शॉल ओढ़ाकर और बुके भेंट कर सम्मानित किया। इंद मेला सह जतरा सांस्कृतिक कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि और आयोजन समिति के सदस्यों द्वारा सामूहिक रूप से फीता काटकर किया गया। उद्घाटन के बाद मंच से पूरे क्षेत्रवासियों को मेला की शुभकामनाएं दी गईं।

भक्ति वंदना से हुई कार्यक्रम की शुरुआत

सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरुआत क्षेत्र के लोकप्रिय गायक रुपेश बड़ाइक और जगदीश बड़ाइक द्वारा प्रस्तुत भक्ति वंदना से हुई। इसके बाद एक से बढ़कर एक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। लोकगीत, पारंपरिक नृत्य और संगीत ने इंद मेला की सांस्कृतिक पहचान को और सशक्त किया।

इंद मेला हमारी संस्कृति और परंपरा का प्रतीक: अनिल कंडुलना

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि झामुमो जिला अध्यक्ष अनिल कंडुलना ने कहा:

अनिल कंडुलना ने कहा: “इंद मेला सामाजिक एकता, सांस्कृतिक उत्सव और भाईचारे का प्रतीक है। यह सिर्फ मेला नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, परंपरा और पूर्वजों की अमूल्य देन है।”

उन्होंने ग्रामीणों से आपसी सहयोग और सौहार्द बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि हमारी संस्कृति और परंपरा गांवों में बसती है और यही हमारी असली पहचान है। इंद मेला हमें विविधता में एकता का संदेश देता है और समाज को जोड़ने का काम करता है।

गांव की माटी से जुड़ी है परंपरा

अनिल कंडुलना ने आगे कहा कि इस तरह के आयोजन हमारी माटी और मूल संस्कृति से जुड़े होते हैं।

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उन्होंने कहा: “यह मेला केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि हमारे विश्वासों और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है। ऐसे आयोजनों से आपसी प्रेम, भाईचारा और सामाजिक समरसता मजबूत होती है।”

उन्होंने भरोसा दिलाया कि झामुमो पार्टी और वे स्वयं क्षेत्र के विकास और सामाजिक आयोजनों में हमेशा सहयोग के लिए तत्पर रहेंगे। ग्रामीणों से अपील की गई कि क्षेत्र से जुड़ी किसी भी समस्या के लिए वे बेझिझक संपर्क करें।

हजारों दर्शकों की मौजूदगी से सफल रहा आयोजन

इंद मेला सह सांस्कृतिक कार्यक्रम में हजारों की संख्या में दर्शक, ग्रामीण और मेला प्रेमी शामिल हुए। पूरे दिन और देर शाम तक चले कार्यक्रम में लोगों ने पारंपरिक संस्कृति और मनोरंजन का भरपूर आनंद लिया। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी वर्गों के लोग मेले में उत्साह के साथ शामिल नजर आए।

मंच संचालन और स्थानीय सहभागिता

कार्यक्रम का मंच संचालन कृष्णा बड़ाइक और विषम्बर बड़ाइक ने संयुक्त रूप से किया। आयोजन को सफल बनाने में स्थानीय युवाओं और मेला समिति की सक्रिय भूमिका रही। मौके पर दिलेश्वर साहू, मुकेश बड़ाइक, शंकर बड़ाइक, राम बड़ाइक, पाहन मतियास समद, झामुमो नेता रितेश बड़ाइक, दिलीप बा, सुरसेन समद, डोमनिक तिर्की, विक्की बड़ाइक सहित झामुमो प्रखंड समिति के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

ग्रामीण संस्कृति और एकता का जीवंत उदाहरण

इंद मेला ने यह साबित किया कि ग्रामीण समाज में आज भी परंपरा और संस्कृति की जड़ें मजबूत हैं। इस तरह के आयोजन न केवल मनोरंजन का माध्यम हैं, बल्कि सामाजिक एकता, सामूहिकता और आपसी विश्वास को भी मजबूत करते हैं। सिमिरिया में आयोजित यह मेला पूरे बांसजोर प्रखंड के लिए एक सकारात्मक संदेश बनकर सामने आया।

न्यूज़ देखो: संस्कृति से जुड़कर ही मजबूत होता समाज

सिमिरिया का इंद मेला यह दर्शाता है कि सांस्कृतिक आयोजन गांवों की आत्मा होते हैं। झामुमो जिलाध्यक्ष अनिल कंडुलना का संदेश सामाजिक सौहार्द और परंपरा के संरक्षण पर केंद्रित रहा। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ते हैं और समाज में एकता की भावना को मजबूत करते हैं। अब आवश्यकता है कि प्रशासन और समाज मिलकर इन परंपराओं को संरक्षित और प्रोत्साहित करें।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

परंपरा से भविष्य तक, संस्कृति ही हमारी पहचान

जब गांव एकजुट होकर अपनी संस्कृति का उत्सव मनाते हैं, तब समाज मजबूत बनता है।
इंद मेला जैसी परंपराएं हमें जोड़ती हैं और आपसी प्रेम का संदेश देती हैं।

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Birendra Tiwari

सिमडेगा

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