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सलडेगा में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की पहल, सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में नए सत्र के लिए नामांकन शुरू

#सलडेगा #शिक्षा_समाचार : संस्कारयुक्त और अनुशासित वातावरण में कक्षा अरुण से दशम तक प्रवेश प्रक्रिया प्रारंभ।

सिमडेगा जिले के सलडेगा स्थित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में नए शैक्षणिक सत्र के लिए नामांकन प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। विद्यालय प्रबंधन द्वारा अभिभावकों से समय पर संपर्क कर बच्चों का नामांकन सुनिश्चित करने की अपील की गई है। हिन्दी माध्यम से संचालित यह विद्यालय कक्षा अरुण से लेकर कक्षा दशम तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करता है। क्षेत्र में विद्यालय की पहचान अनुशासन, संस्कार और शैक्षणिक गुणवत्ता के लिए है।

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  • सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, सलडेगा में नए सत्र का नामांकन शुरू।
  • हिन्दी माध्यम में कक्षा अरुण से दशम तक शिक्षा व्यवस्था।
  • प्रधानाचार्य जितेंद्र कुमार पाठक ने अभिभावकों से की अपील।
  • संस्कारयुक्त व अनुशासित वातावरण विद्यालय की पहचान।
  • अनुभवी आचार्य-आचार्याओं द्वारा शिक्षण व्यवस्था।
  • बच्चों के बौद्धिक, शारीरिक व नैतिक विकास पर समान जोर।

सलडेगा क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण और संस्कार आधारित शिक्षा के लिए पहचाना जाने वाला सरस्वती शिशु विद्या मंदिर एक बार फिर नए शैक्षणिक सत्र के लिए तैयार है। विद्यालय में नामांकन प्रक्रिया शुरू होते ही अभिभावकों में उत्साह देखा जा रहा है। विद्यालय प्रबंधन का उद्देश्य बच्चों को केवल किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों से भी जोड़ना है।

प्रधानाचार्य की अभिभावकों से अपील

विद्यालय के प्रधानाचार्य जितेंद्र कुमार पाठक ने अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि बच्चों का भविष्य मजबूत नींव पर तभी खड़ा हो सकता है, जब उन्हें सही वातावरण और संस्कारयुक्त शिक्षा मिले। उन्होंने कहा कि इच्छुक अभिभावक समय रहते विद्यालय कार्यालय में संपर्क कर नामांकन प्रक्रिया पूरी करें।

सुव्यवस्थित शिक्षण व्यवस्था

विद्यालय में हिन्दी माध्यम से शिक्षा प्रदान की जाती है। कक्षा अरुण (नर्सरी स्तर) से लेकर कक्षा दशम तक सुव्यवस्थित शिक्षण व्यवस्था उपलब्ध है। यहां पढ़ाई के साथ-साथ अनुशासन, समयपालन और नैतिक मूल्यों पर विशेष ध्यान दिया जाता है, जिससे विद्यार्थी सर्वांगीण विकास की ओर अग्रसर हो सकें।

संस्कार और आधुनिक शिक्षा का संतुलन

विद्यालय परिवार ने जानकारी दी कि सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में विद्यार्थियों के बौद्धिक, शारीरिक, सांस्कृतिक एवं नैतिक विकास को समान महत्व दिया जाता है। अनुभवी और प्रशिक्षित आचार्य-आचार्याओं के मार्गदर्शन में बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति, परंपरा और जीवन मूल्यों की शिक्षा भी दी जाती है।

क्षेत्र में विशेष पहचान

अनुशासित वातावरण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण पद्धति और संस्कारयुक्त शिक्षा के कारण यह विद्यालय क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाए हुए है। यही कारण है कि हर वर्ष बड़ी संख्या में अभिभावक अपने बच्चों का नामांकन यहां कराना पसंद करते हैं।

प्रवेश संबंधी जानकारी

विद्यालय प्रबंधन ने बताया कि इच्छुक अभिभावक प्रवेश से संबंधित विस्तृत जानकारी के लिए विद्यालय कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से संपर्क कर सकते हैं। सभी प्रक्रियाएं निर्धारित नियमों के तहत पूरी की जा रही हैं।

न्यूज़ देखो: शिक्षा के साथ संस्कार की मजबूत नींव

सरस्वती शिशु विद्या मंदिर सलडेगा यह संदेश देता है कि शिक्षा केवल डिग्री तक सीमित नहीं होनी चाहिए। जब पढ़ाई के साथ संस्कार, अनुशासन और नैतिक मूल्य जुड़े हों, तभी समाज को जिम्मेदार नागरिक मिलते हैं। ऐसे शैक्षणिक संस्थान क्षेत्र की शैक्षणिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

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मजबूत शिक्षा से उज्ज्वल भविष्य

आज के प्रतिस्पर्धी दौर में बच्चों को सही मार्गदर्शन और सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण की आवश्यकता है।
संस्कार, अनुशासन और ज्ञान का संतुलन ही सच्ची शिक्षा है।
अपने बच्चों के भविष्य को मजबूत बनाने के लिए समय पर सही निर्णय लें।
इस जानकारी को अन्य अभिभावकों तक पहुंचाएं, अपनी राय साझा करें और शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाएं।

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Satyam Kumar Keshri

सिमडेगा नगर क्षेत्र

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