आईआईएम रांची के यंग चेंजमेकर प्रोग्राम में वैश्विक छात्रों का ग्रामीण भारत से साक्षात्कार

आईआईएम रांची के यंग चेंजमेकर प्रोग्राम में वैश्विक छात्रों का ग्रामीण भारत से साक्षात्कार

author News देखो Team
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#खूंटी #ग्रामीण_इमर्शन : लोहाजिमी गांव में अंतरराष्ट्रीय छात्रों ने जनजातीय जीवन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को समझा।

भारतीय प्रबंधन संस्थान रांची के यंग चेंजमेकर प्रोग्राम 4.0 के तहत विश्वभर से आए 100 हाई स्कूल छात्रों ने खूंटी जिले के तोरपा प्रखंड स्थित लोहाजिमी गांव में ग्रामीण इमर्शन का अनुभव लिया। इस पहल का उद्देश्य शहरी पृष्ठभूमि के छात्रों को ग्रामीण भारत की वास्तविकताओं, जनजातीय संस्कृति और जमीनी चुनौतियों से जोड़ना रहा। कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने गांव के सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक पक्षों को करीब से समझा। यह अनुभव भावी नेतृत्व में संवेदनशीलता और जिम्मेदारी विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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  • आईआईएम रांची के यंग चेंजमेकर प्रोग्राम 4.0 के तहत आयोजन।
  • दुनियाभर से आए 100 हाई स्कूल छात्र हुए शामिल।
  • लोहाजिमी गांव, तोरपा प्रखंड, खूंटी में ग्रामीण इमर्शन।
  • विधायक सुदीप गुड़िया ने जमीनी मुद्दों पर छात्रों को किया संबोधित।
  • जनजातीय संस्कृति, आंगनबाड़ी, लाख खेती और ऑर्गेनिक मशरूम उत्पादन का अवलोकन।

भारतीय प्रबंधन संस्थान रांची द्वारा संचालित यंग चेंजमेकर प्रोग्राम 4.0 – द इग्नाइट एडिशन के अंतर्गत एक अनोखी शैक्षणिक पहल देखने को मिली, जब देश-विदेश से आए 100 हाई स्कूल छात्रों ने झारखंड के खूंटी जिले में ग्रामीण जीवन को नजदीक से जाना। इस कार्यक्रम के माध्यम से छात्रों को किताबों और कक्षाओं से बाहर निकालकर वास्तविक सामाजिक परिवेश से जोड़ने का प्रयास किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत और उद्देश्य

कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत खूंटी विधायक सुदीप गुड़िया के संबोधन से हुई। उन्होंने छात्रों के समक्ष क्षेत्र की जमीनी चुनौतियों, विकास से जुड़े मुद्दों और ग्रामीण झारखंड की वास्तविक स्थिति पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ग्रामीण समाज को समझे बिना समावेशी विकास की कल्पना अधूरी है।

इस इमर्शन प्रोग्राम का मुख्य उद्देश्य शहरी और वैश्विक पृष्ठभूमि से आए छात्रों में ग्रामीण भारत के प्रति समझ, संवेदनशीलता और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करना रहा।

लोहाजिमी गांव में पारंपरिक स्वागत

तोरपा प्रखंड के लोहाजिमी गांव पहुंचने पर छात्रों का स्वागत पारंपरिक जनजातीय रीति-रिवाजों के साथ किया गया। ढोल-नगाड़ों, लोकगीतों और पारंपरिक अभिवादन ने छात्रों को यह एहसास कराया कि वे केवल पर्यटक नहीं, बल्कि कुछ समय के लिए गांव के समुदाय का हिस्सा हैं।

इस आत्मीय स्वागत ने छात्रों को गांव के लोगों से भावनात्मक रूप से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था और जीवनशैली से परिचय

इमर्शन के दौरान छात्रों ने गांव का भ्रमण कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विभिन्न पहलुओं को समझा। उन्होंने आंगनबाड़ी केंद्रों की कार्यप्रणाली देखी और बाल पोषण व प्रारंभिक शिक्षा की जमीनी हकीकत को जाना।

इसके साथ ही छात्रों ने लाख की खेती, ऑर्गेनिक मशरूम उत्पादन, और अन्य आजीविका आधारित गतिविधियों का अवलोकन किया। ग्रामीणों से सीधा संवाद कर उन्होंने यह समझा कि सीमित संसाधनों के बावजूद किस तरह नवाचार और परंपरा के सहारे आजीविका चलाई जा रही है।

जनजातीय संस्कृति और लोक परंपराएं

लोहाजिमी गांव की जनजातीय संस्कृति छात्रों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रही। लोक परंपराएं, सामाजिक संबंधों की मजबूती और सामुदायिक जीवनशैली ने छात्रों को यह सोचने पर मजबूर किया कि विकास केवल भौतिक सुविधाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक ताने-बाने से भी गहराई से जुड़ा है।

छात्रों ने महसूस किया कि सामूहिकता और प्रकृति के साथ संतुलन ग्रामीण जीवन की बड़ी ताकत है।

नेतृत्व और एंपैथी विकसित करने की पहल

कार्यक्रम का मूल उद्देश्य छात्रों को उनके कम्फर्ट ज़ोन से बाहर लाकर एंपैथी, नेतृत्व क्षमता और जमीनी समझ को मजबूत करना रहा। इस अनुभव के माध्यम से छात्रों को यह सीख मिली कि भावी नीति निर्धारण, प्रबंधन और नेतृत्व में समाज के अंतिम पंक्ति के व्यक्ति की समझ कितनी आवश्यक है।

न्यूज़ देखो: शिक्षा से संवेदनशील नेतृत्व की ओर

आईआईएम रांची की यह पहल दर्शाती है कि प्रबंधन शिक्षा केवल कॉर्पोरेट कौशल तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। ग्रामीण इमर्शन जैसे कार्यक्रम भावी नेताओं को जमीन से जोड़ते हैं और सामाजिक जिम्मेदारी का बोध कराते हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ऐसे अनुभव छात्रों की सोच और भविष्य की दिशा को किस तरह प्रभावित करते हैं।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

अनुभव से बदलती सोच, समाज से जुड़ता नेतृत्व

ग्रामीण भारत को समझना देश के भविष्य को समझने जैसा है।
जब युवा नेतृत्व जमीनी सच्चाइयों से जुड़ता है, तभी समावेशी विकास संभव होता है।
ऐसी पहलों को प्रोत्साहित करना हम सभी की जिम्मेदारी है।
इस खबर पर अपनी राय साझा करें, इसे आगे बढ़ाएं और शिक्षा में बदलाव की इस सोच को फैलाएं।

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