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बेको में 15 फरवरी को इस्लाही इज्तिमा का आयोजन, मुस्लिम महिलाओं के लिए विशेष दीन-इस्लाह कार्यक्रम

#बगोदर #इस्लाही_इज्तिमा : जुमला अंजुमन कमेटी की पहल पर विशेष आयोजन।

गिरिडीह जिले के बगोदर प्रखंड अंतर्गत बेको गांव में 15 फरवरी को इस्लाही इज्तिमा का आयोजन किया जाएगा। जुमला अंजुमन कमेटी की पहल पर होने वाला यह कार्यक्रम विशेष रूप से मुस्लिम महिलाओं के लिए निर्धारित है। आयोजन में उलेमा-ए-कराम दीन-इस्लाह, सामाजिक जागरूकता और नैतिक शिक्षा पर मार्गदर्शन देंगे। कार्यक्रम को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में हैं और दूर-दराज के क्षेत्रों से अकीदतमंदों के पहुंचने की संभावना है।

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  • 15 फरवरी (रविवार) को बेको, बगोदर प्रखंड में आयोजन।
  • जुमला अंजुमन कमेटी के तत्वावधान में होगा कार्यक्रम।
  • मुस्लिम महिलाओं के लिए विशेष रूप से रखा गया इज्तिमा।
  • उलेमा-ए-कराम देंगे दीन-इस्लाह और नैतिक शिक्षा पर तकरीर।
  • दूर-दराज के गांवों से बड़ी संख्या में पहुंचेंगे अकीदतमंद।

गिरिडीह जिले के बगोदर प्रखंड स्थित बेको गांव में 15 फरवरी (रविवार) को इस्लाही इज्तिमा का भव्य आयोजन किया जाएगा। जुमला अंजुमन कमेटी द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम विशेष रूप से मुस्लिम महिलाओं के लिए निर्धारित किया गया है। आयोजकों के अनुसार, कार्यक्रम में धार्मिक मार्गदर्शन के साथ-साथ सामाजिक और नैतिक विषयों पर भी विस्तार से चर्चा होगी। आयोजन को लेकर गांव और आसपास के क्षेत्रों में उत्साह का माहौल है तथा तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं।

जुमला अंजुमन कमेटी की पहल

इस कार्यक्रम का आयोजन जुमला अंजुमन कमेटी के तत्वावधान में किया जा रहा है। कमेटी के सदस्य बीते कई दिनों से कार्यक्रम की तैयारी में जुटे हुए हैं। आयोजन स्थल की साफ-सफाई, पंडाल निर्माण, बैठने की समुचित व्यवस्था और अन्य आवश्यक सुविधाओं को सुनिश्चित करने के लिए अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

बेको पश्चिमी के पंचायत समिति सदस्य प्रतिनिधि इस्तियाक अंसारी ने बताया कि यह इज्तिमा क्षेत्र की महिलाओं को धार्मिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

इस्तियाक अंसारी ने कहा: “यह कार्यक्रम खास तौर पर मुस्लिम महिलाओं के लिए रखा गया है, ताकि वे दीन-इस्लाह और सामाजिक जिम्मेदारियों के बारे में सही मार्गदर्शन प्राप्त कर सकें।”

धार्मिक और सामाजिक मार्गदर्शन पर जोर

आयोजकों के अनुसार, इज्तिमा में उलेमा-ए-कराम दीन-इस्लाह, नैतिक मूल्यों, पारिवारिक जीवन, शिक्षा और सामाजिक जागरूकता जैसे विषयों पर तकरीर पेश करेंगे। महिलाओं को इस्लामी शिक्षाओं के साथ-साथ समाज में उनकी भूमिका और जिम्मेदारियों के बारे में भी विस्तार से बताया जाएगा।

कार्यक्रम का उद्देश्य केवल धार्मिक प्रवचन तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं में सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास और सामाजिक चेतना को मजबूत करना भी है। स्थानीय स्तर पर इस पहल को एक रचनात्मक प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

दूर-दराज से पहुंचेगी अकीदतमंदों की भीड़

आयोजकों ने जानकारी दी है कि इस इज्तिमा में आसपास के गांवों के अलावा दूर-दराज के इलाकों से भी बड़ी संख्या में अकीदतमंदों के पहुंचने की संभावना है। कार्यक्रम को सफल और व्यवस्थित बनाने के लिए व्यापक तैयारियां की जा रही हैं।

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बैठने की पर्याप्त व्यवस्था, पेयजल, साफ-सफाई और सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। कमेटी के सदस्य स्वयंसेवकों के साथ मिलकर व्यवस्थाओं की निगरानी कर रहे हैं ताकि कार्यक्रम शांतिपूर्ण और सफलतापूर्वक संपन्न हो सके।

स्थानीय स्तर पर उत्साह का माहौल

बेको और आसपास के क्षेत्रों में इस आयोजन को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है। स्थानीय लोग इसे सामाजिक और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मान रहे हैं। कई परिवारों ने अपनी भागीदारी की पुष्टि की है और महिलाएं भी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए तैयारी कर रही हैं।

कमेटी के सदस्यों का कहना है कि इस प्रकार के आयोजन समाज में सकारात्मक संदेश देते हैं और सामुदायिक एकता को मजबूत करते हैं। कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सभी लोग मिलकर सहयोग कर रहे हैं।

न्यूज़ देखो: महिला सशक्तिकरण और धार्मिक जागरूकता की पहल

बेको में आयोजित होने वाला यह इस्लाही इज्तिमा केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता का भी मंच बन सकता है। महिलाओं के लिए विशेष रूप से आयोजित इस पहल से यह संकेत मिलता है कि समाज में शिक्षा और मार्गदर्शन की आवश्यकता को समझा जा रहा है। ऐसे आयोजनों में व्यवस्थाओं की पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। अब देखने वाली बात होगी कि यह पहल भविष्य में कितनी नियमित और व्यापक रूप लेती है।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

जागरूक समाज की ओर बढ़ता कदम

धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रम तभी सार्थक होते हैं, जब वे समाज में सकारात्मक बदलाव का मार्ग प्रशस्त करें। महिलाओं की भागीदारी और उनकी जागरूकता किसी भी समुदाय की मजबूती का आधार होती है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से यदि शिक्षा, नैतिकता और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश व्यापक स्तर पर पहुंचे, तो यह पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणादायक होगा।

आप भी अपने क्षेत्र में हो रहे सकारात्मक आयोजनों से जुड़ें, भागीदारी निभाएं और समाज को मजबूत बनाने में योगदान दें। अपनी राय कमेंट में साझा करें, खबर को दूसरों तक पहुंचाएं और जागरूकता की इस पहल का हिस्सा बनें।

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Saroj Verma

दुमका/देवघर

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