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पत्रकार को थाना में बंद कर पिटाई करना अनुचित: रामनिवास तिवारी

#पलामू #पत्रकार_उत्पीड़न : हंसडीहा थाना में पत्रकार से मारपीट के आरोप पर कड़ी प्रतिक्रिया, निलंबन की मांग।

दुमका जिले के हंसडीहा थाना में एक वरिष्ठ पत्रकार के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आने के बाद पत्रकार संगठनों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। आर्यावर्त श्रमजीवी पत्रकार संघ के केंद्रीय उपाध्यक्ष रामनिवास तिवारी ने इसे लोकतंत्र और स्वतंत्र पत्रकारिता पर सीधा हमला बताया है। उन्होंने दुमका एसपी से तत्काल कार्रवाई की मांग करते हुए थाना प्रभारी को निलंबित करने का आग्रह किया है। यह मामला मीडिया की स्वतंत्रता और पुलिस आचरण पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

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  • वरिष्ठ पत्रकार मृत्युंजय पांडेय के साथ हंसडीहा थाना में मारपीट का आरोप।
  • आर्यावर्त श्रमजीवी पत्रकार संघ ने घटना की कड़ी निंदा की।
  • केंद्रीय उपाध्यक्ष रामनिवास तिवारी ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताया।
  • 72 घंटे के भीतर कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी।
  • दुमका एसपी से थाना प्रभारी के निलंबन की मांग।

दुमका जिले के हंसडीहा थाना में एक वरिष्ठ पत्रकार के साथ कथित रूप से मारपीट किए जाने का मामला अब राज्यस्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। घटना को लेकर पत्रकार संगठनों में गहरा आक्रोश है और इसे स्वतंत्र पत्रकारिता पर सीधा हमला बताया जा रहा है। विश्रामपुर, पलामू से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में आर्यावर्त श्रमजीवी पत्रकार संघ के केंद्रीय उपाध्यक्ष रामनिवास तिवारी ने इस पूरे मामले को अत्यंत गंभीर और शर्मनाक करार दिया है।

थाना में न्याय की जगह मारपीट पर सवाल

रामनिवास तिवारी ने कहा कि थाना वह स्थान होता है जहां आम नागरिक और पत्रकार न्याय की उम्मीद लेकर जाते हैं। यदि उसी स्थान पर किसी पत्रकार के साथ जबरन मारपीट की जाती है, तो यह न केवल कानून व्यवस्था पर सवाल है बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों का भी हनन है। उन्होंने कहा कि दुमका जिले के वरिष्ठ पत्रकार मृत्युंजय पांडेय के साथ हंसडीहा थाना प्रभारी और उनके चालक द्वारा थाना परिसर में मारपीट किए जाने का आरोप बेहद चिंताजनक है।

लोकतंत्र और प्रेस स्वतंत्रता पर हमला

रामनिवास तिवारी ने इस घटना को लोकतंत्र पर हमला बताते हुए कहा:

रामनिवास तिवारी ने कहा: “जब देश के सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश पत्रकारों की स्वतंत्रता की बात करते हैं, ताकि वे निर्भीक होकर सच सामने ला सकें, तब इस तरह की घटनाएं पूरी व्यवस्था को कटघरे में खड़ा करती हैं।”

उन्होंने कहा कि पत्रकार समाज का आईना होते हैं और यदि पत्रकार ही सुरक्षित नहीं रहेंगे, तो आम जनता की आवाज कैसे सामने आएगी।

एसपी से त्वरित कार्रवाई की मांग

आर्यावर्त श्रमजीवी पत्रकार संघ की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में दुमका के पुलिस अधीक्षक से स्पष्ट रूप से मांग की गई है कि हंसडीहा थाना प्रभारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। रामनिवास तिवारी ने कहा कि यदि पुलिस विभाग अपने ही कर्मियों के गलत आचरण पर कार्रवाई नहीं करता है, तो इससे जनता का भरोसा व्यवस्था से उठ जाएगा।

72 घंटे का अल्टीमेटम, आंदोलन की चेतावनी

रामनिवास तिवारी ने साफ शब्दों में कहा कि यदि 72 घंटे के भीतर हंसडीहा थाना प्रभारी के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं होती है, तो आर्यावर्त श्रमजीवी पत्रकार संघ राज्यव्यापी आंदोलन शुरू करने को बाध्य होगा। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन केवल एक पत्रकार के लिए नहीं, बल्कि पूरे पत्रकार समाज की सुरक्षा और सम्मान के लिए होगा।

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पत्रकार संगठनों में आक्रोश

इस घटना के बाद विभिन्न पत्रकार संगठनों में नाराजगी देखी जा रही है। पत्रकारों का कहना है कि पुलिस और प्रशासन का कर्तव्य है कि वे पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करें, न कि उन्हें डराने या प्रताड़ित करने का कार्य करें। कई वरिष्ठ पत्रकारों ने भी इस मामले में निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

पुलिस–मीडिया संबंधों पर उठे सवाल

यह घटना पुलिस और मीडिया के बीच संबंधों पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करती है। लोकतंत्र में मीडिया को चौथा स्तंभ माना जाता है और पुलिस प्रशासन को मीडिया के साथ सहयोगात्मक रवैया अपनाना चाहिए। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह घटना पुलिस की कार्यशैली और संवेदनशीलता पर गहरा धब्बा मानी जाएगी।

न्याय की उम्मीद और आगे की राह

अब सभी की निगाहें दुमका पुलिस प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है। क्या आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी, या मामला केवल औपचारिकताओं में सिमट जाएगा—यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। पत्रकार संगठनों का कहना है कि यदि समय रहते न्याय नहीं मिला, तो यह मामला और बड़ा रूप ले सकता है।

न्यूज़ देखो: प्रेस की आज़ादी पर बड़ा सवाल

हंसडीहा थाना का यह मामला बताता है कि जमीनी स्तर पर पत्रकारों की सुरक्षा अभी भी एक गंभीर मुद्दा बनी हुई है। यदि आरोप सही हैं, तो यह पुलिसिया सत्ता के दुरुपयोग का उदाहरण होगा। प्रशासन के लिए यह एक कसौटी है कि वह कानून से ऊपर किसी को नहीं मानता। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

सच की आवाज़ दबे नहीं

स्वतंत्र पत्रकारिता लोकतंत्र की रीढ़ है।
पत्रकारों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना समाज और प्रशासन दोनों की जिम्मेदारी है।
यदि आप भी मानते हैं कि सच बोलने वालों को संरक्षण मिलना चाहिए, तो अपनी आवाज उठाएं।
इस खबर को साझा करें, अपनी राय कमेंट में दें और पत्रकारों के साथ एकजुटता दिखाएं।

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Ram Niwas Tiwary

बिश्रामपुर, पलामू

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