
#रायडीह #जयपालसिंहमुंडा : झारखंड आंदोलनकारी मोर्चा के तत्वावधान में रायडीह प्रखंड कार्यालय परिसर में मरांग गोमके को नमन, संघर्ष की विरासत को आगे बढ़ाने का आह्वान।
रायडीह प्रखंड कार्यालय परिसर में शनिवार को झारखंड आंदोलनकारी मोर्चा के तत्वावधान में महान आदिवासी नेता, स्वतंत्रता सेनानी एवं झारखंड आंदोलन के अग्रदूत मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा की जयंती श्रद्धा, सम्मान और संकल्प के साथ मनाई गई। कार्यक्रम में झारखंड आंदोलन से जुड़े सक्रिय एवं चिन्हित आंदोलनकारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे और अपने पुरखों के संघर्ष को याद करते हुए संगठन की एकजुटता बनाए रखने का संकल्प लिया।
- रायडीह प्रखंड कार्यालय परिसर में आयोजित हुआ जयंती समारोह।
- जयपाल सिंह मुंडा के चित्र पर पुष्पांजलि व माल्यार्पण।
- आंदोलनकारियों ने एकजुटता और संघर्ष की विरासत को आगे बढ़ाने का लिया संकल्प।
- फरवरी 2026 में महाजुटान सह वनभोज कार्यक्रम की घोषणा।
- सैकड़ों झारखंड आंदोलनकारियों की रही उपस्थिति।
शनिवार को आयोजित इस कार्यक्रम की शुरुआत मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर एवं माल्यार्पण के साथ की गई। उपस्थित आंदोलनकारियों ने एक स्वर में अपने महान नेता को नमन किया और झारखंड आंदोलन की एकजुटता को मजबूत बनाए रखने का संकल्प दोहराया।
स्वतंत्रता संग्राम से संविधान सभा तक का योगदान
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला मुख्य संयोजक मनोज कुमार भगत ने कहा:
मनोज कुमार भगत ने कहा कि जयपाल सिंह मुंडा देश के स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े रहे और भारतीय हॉकी टीम को ओलंपिक में स्वर्ण पदक दिलाकर देश का नाम विश्व पटल पर रोशन किया। वे संविधान सभा के सदस्य भी रहे और उनके विचार व योगदान आज भी हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
उन्होंने कहा कि जयपाल सिंह मुंडा झारखंड अलग राज्य आंदोलन के अग्रणी नेता थे और उनके संघर्षों की बदौलत ही झारखंड आंदोलन को नई दिशा मिली।
महाजुटान सह वनभोज कार्यक्रम की घोषणा
मनोज कुमार भगत ने जानकारी दी कि 8 फरवरी 2026 को घाघरा के देवाकी पर्यटक स्थल पर एक विशाल महाजुटान सह वनभोज कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इस कार्यक्रम में झारखंड राज्य के परिवहन सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री दीपक बिरुवा, अनुसूचित जाति-जनजाति कल्याण मंत्री चमरा लिंडा, विधायक भूषण बड़ा एवं विधायक नमन विक्सल कोंगाड़ी को आमंत्रित किया गया है। उन्होंने सभी आंदोलनकारियों से एकजुट होकर इस कार्यक्रम को सफल बनाने की अपील की।
आदिवासी अधिकारों की प्रभावी पैरवी
वहीं जिला अध्यक्ष अशोक कुमार भगत ने अपने संबोधन में कहा:
अशोक कुमार भगत ने कहा कि जयपाल सिंह मुंडा संविधान सभा में एक प्रखर आदिवासी एवं मूलवासी नेता थे। उन्होंने झारखंड-बिहार सहित पूरे देश के आदिवासियों के अधिकारों की प्रभावी पैरवी की, जिसके परिणामस्वरूप संविधान में पाँचवीं और छठी अनुसूची जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्थाएँ शामिल हुईं।
उन्होंने कहा कि जयपाल सिंह मुंडा के संघर्ष और विचारों के कारण ही झारखंड अलग राज्य आंदोलन को मजबूती मिली और वर्ष 2000 में झारखंड राज्य का गठन संभव हो सका।
शहीद आंदोलनकारियों को दी गई श्रद्धांजलि
कार्यक्रम के दौरान झारखंड अलग राज्य आंदोलन के दौरान शहीद हुए सभी आंदोलनकारियों को भी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। वक्ताओं ने कहा कि दिवंगत आंदोलनकारी नेताओं की जयंती और स्मृति दिवस मनाना अत्यंत आवश्यक है, ताकि आने वाली पीढ़ी अपने इतिहास और संघर्ष से जुड़ी रहे।
बड़ी संख्या में आंदोलनकारियों की उपस्थिति
इस अवसर पर मुख्य रूप से जिला मुख्य संयोजक मनोज कुमार भगत, जिला अध्यक्ष अशोक कुमार भगत, प्रखंड अध्यक्ष दुर्गा उरांव, कोषाध्यक्ष बुधराम उरांव, संगठन सचिव गंदीरा उरांव, आमला उरांव, सीताराम उरांव, सुषमा मिंज, सतेंद्र उरांव, बीरु साहू, चंद्रमोहन सिंह, जयदेव उरांव, सिमोन तिर्की, लोकनाथ उरांव, शशिकांत बेक, आशा देवी सहित सैकड़ों झारखंड आंदोलनकारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का मंच संचालन दुर्गा उरांव ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन आमला उरांव द्वारा किया गया।
न्यूज़ देखो : संघर्ष, सम्मान और संकल्प की विरासत
रायडीह में आयोजित यह कार्यक्रम केवल जयंती समारोह नहीं, बल्कि झारखंड आंदोलन की विरासत को याद करने और उसे आगे बढ़ाने का संकल्प था। मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा के विचार आज भी आदिवासी अधिकार, सामाजिक न्याय और राज्य की पहचान के लिए मार्गदर्शक हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
जयपाल सिंह मुंडा अमर रहें
संघर्ष से अधिकार और अधिकार से पहचान—मरांग गोमके का यही संदेश आज भी प्रासंगिक है।






