
#गिरिडीह #डुमरी #केंद्रीय_बजट_2026 : विधायक जयराम कुमार महतो ने बजट को झारखंड के लिए निराशाजनक बताया।
डुमरी विधायक जयराम कुमार महतो ने केंद्रीय बजट 2026-27 पर प्रतिक्रिया देते हुए झारखंड की व्यापक अनदेखी का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि खनिज संपदा देने में अग्रणी राज्य होने के बावजूद झारखंड को स्वास्थ्य, शिक्षा और पर्यटन जैसे अहम क्षेत्रों में अपेक्षित हिस्सेदारी नहीं मिली। हालांकि शिक्षा बजट में वृद्धि को उन्होंने सराहनीय बताया, लेकिन राज्य को किसी भी नए राष्ट्रीय संस्थान या पर्यटन परियोजना से बाहर रखना दुर्भाग्यपूर्ण बताया। विधायक के बयान के बाद बजट में क्षेत्रीय संतुलन को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
- डुमरी विधायक जयराम कुमार महतो ने केंद्रीय बजट पर जताई नाराजगी।
- खनिज संपदा देने के बावजूद झारखंड की अनदेखी का आरोप।
- AIIMS की जगह निमहांस देने को बताया अपर्याप्त।
- शिक्षा बजट में 1.39 लाख करोड़ रुपये आवंटन की सराहना।
- नए राष्ट्रीय संस्थानों में झारखंड को जगह नहीं मिलने पर सवाल।
- पर्यटन योजनाओं में पारसनाथ, जोन्हा, इटखोरी को शामिल न करने पर आपत्ति।
केंद्रीय बजट 2026-27 को लेकर झारखंड में मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इसी कड़ी में डुमरी के विधायक जयराम कुमार महतो ने बजट को झारखंड के लिए निराशाजनक करार दिया है। उन्होंने कहा कि देश को सबसे ज्यादा खनिज देने वाले राज्यों में शामिल झारखंड के साथ न्याय नहीं किया गया। विधायक के अनुसार बजट में कुछ सकारात्मक पहलू जरूर हैं, लेकिन राज्य की मूल जरूरतों को नजरअंदाज किया गया है।
खनिज देने वाला राज्य, फिर भी उपेक्षा
डुमरी विधायक ने कहा कि झारखंड देश को सबसे ज्यादा खनिज संपदा प्रदान करता है, जिससे राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को बड़ा लाभ होता है। इसके बावजूद केंद्रीय बजट में झारखंड को वह महत्व नहीं दिया गया, जिसका वह हकदार है।
जयराम कुमार महतो ने कहा:
जयराम कुमार महतो ने कहा: “आज केंद्रीय बजट ने झारखंड को बेहद निराश किया है। देश को सबसे ज्यादा खनिज देने वाले प्रदेश झारखंड की अनदेखी न्यायसंगत नहीं है।”
उनका कहना है कि खनन से होने वाले मुनाफे का एक बड़ा हिस्सा झारखंड के विकास में लौटना चाहिए था, लेकिन बजट में इसका स्पष्ट प्रतिबिंब नहीं दिखता।
स्वास्थ्य क्षेत्र में AIIMS की जरूरत, मिला निमहांस
स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर विधायक ने विशेष चिंता जताई। उन्होंने कहा कि झारखंड को लंबे समय से AIIMS जैसे उच्चस्तरीय संस्थान की जरूरत थी, ताकि राज्य के लोगों को बेहतर और सुलभ इलाज मिल सके।
विधायक ने कहा कि बजट में झारखंड को मनोचिकित्सक संस्थान निमहांस दिया गया, जो मानसिक स्वास्थ्य के लिहाज से महत्वपूर्ण जरूर है, लेकिन राज्य की व्यापक स्वास्थ्य जरूरतों को पूरा नहीं करता। उन्होंने इसे प्राथमिकताओं में असंतुलन का उदाहरण बताया।
शिक्षा बजट में बढ़ोतरी को बताया सकारात्मक
हालांकि विधायक ने बजट की आलोचना की, लेकिन उन्होंने शिक्षा क्षेत्र में किए गए प्रावधानों की सराहना भी की। केंद्रीय बजट 2026-27 में शिक्षा के लिए 1,39,289 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है, जो पिछले वर्ष के 1.28 लाख करोड़ रुपये की तुलना में करीब 8 से 9 प्रतिशत अधिक है।
जयराम कुमार महतो ने कहा:
जयराम कुमार महतो ने कहा: “शिक्षा क्षेत्र को अब तक की सबसे बड़ी राशि मिलना सराहनीय है।”
उनका मानना है कि शिक्षा में निवेश से देश के भविष्य को मजबूती मिलेगी, लेकिन इसका लाभ सभी राज्यों तक समान रूप से पहुंचना चाहिए।
नए राष्ट्रीय संस्थानों में झारखंड को जगह नहीं
शिक्षा बजट के तहत देश में तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIAS), तीन नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (NIPER) और एक नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन (NID) स्थापित करने की घोषणा की गई है।
विधायक ने कहा कि ये घोषणाएं सुनने में भले ही आकर्षक लगती हों, लेकिन इनमें से एक भी संस्थान झारखंड को नहीं दिया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब झारखंड जैसे राज्य को इन संस्थानों की सख्त जरूरत है, तो उसे लगातार नजरअंदाज क्यों किया जा रहा है।
पर्यटन की असीम संभावनाएं, फिर भी बजट में जगह नहीं
जयराम कुमार महतो ने झारखंड की पर्यटन क्षमता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि राज्य में प्राकृतिक, धार्मिक और ऐतिहासिक पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं, लेकिन बजट में इसका लाभ झारखंड को नहीं मिला।
बजट में पूर्वोदय राज्यों में 5 पर्यटन स्थलों के विकास और 4000 ई-बसों के प्रावधान का उल्लेख है। इसके अलावा अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, असम, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में बौद्ध सर्किट के विकास की योजना प्रस्तावित की गई है।
जोन्हा, पारसनाथ और इटखोरी की अनदेखी पर सवाल
विधायक ने कहा कि रांची जिले के जोन्हा को बौद्ध सर्किट से जोड़ा जाना चाहिए था। इसके साथ ही पारसनाथ, जो कि देश-विदेश में प्रसिद्ध धार्मिक और पर्यटन स्थल है, उसे भी इन योजनाओं में शामिल किया जाना चाहिए था।
उन्होंने यह भी कहा कि चतरा जिले का इटखोरी, जो एक प्रमुख ऐतिहासिक और प्राचीन पुरातात्विक स्थल है, उसे भी बजट में पर्यटन विकास की योजनाओं में शामिल किया जाना जरूरी था।
जयराम कुमार महतो ने कहा:
जयराम कुमार महतो ने कहा: “झारखंड में पर्यटन की असीम संभावनाएं हैं, लेकिन इस बजट में पर्यटन विकास से भी झारखंड को अछूता रखा गया है।”
क्षेत्रीय संतुलन पर उठे सवाल
विधायक के अनुसार बजट में कुछ राज्यों और क्षेत्रों पर विशेष फोकस किया गया है, जबकि झारखंड जैसे संसाधन-संपन्न राज्य को अपेक्षित लाभ नहीं मिला। इससे क्षेत्रीय संतुलन और समान विकास के दावों पर सवाल खड़े होते हैं।
उन्होंने कहा कि झारखंड के लोगों को उम्मीद थी कि इस बार का बजट राज्य की बुनियादी जरूरतों को प्राथमिकता देगा, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।
न्यूज़ देखो: विकास में संतुलन की जरूरत
डुमरी विधायक का बयान यह संकेत देता है कि केंद्रीय बजट को लेकर झारखंड में असंतोष है। शिक्षा में बढ़ा आवंटन सकारात्मक कदम है, लेकिन स्वास्थ्य, पर्यटन और राष्ट्रीय संस्थानों में राज्य की अनदेखी गंभीर सवाल खड़े करती है। यदि खनिज देने वाले राज्यों को विकास योजनाओं में समान भागीदारी नहीं मिली, तो असंतुलन और गहराएगा। अब यह देखना अहम होगा कि केंद्र सरकार इन आपत्तियों पर क्या रुख अपनाती है।
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झारखंड के हक की बात अब और मजबूती से
झारखंड की पहचान केवल खनिज से नहीं, बल्कि उसकी संस्कृति, पर्यटन और मानव संसाधन से भी है। जब विकास योजनाओं में राज्य की अनदेखी होती है, तो सवाल उठाना जरूरी हो जाता है। लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों की आवाज ही जनता की उम्मीद बनती है।
जरूरी है कि झारखंड के विकास से जुड़े मुद्दों पर खुली चर्चा हो और राज्य को उसका वाजिब हक मिले।
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