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झारखंड नगर निकाय चुनाव में आज नाम वापसी की आखिरी तारीख, कल प्रत्याशियों को मिलेगा चुनाव चिन्ह

#झारखंड #नगरनिकायचुनाव : स्क्रूटनी के बाद आज नाम वापसी, 23 फरवरी को मतदान होगा।

झारखंड में नगर निकाय चुनाव की प्रक्रिया तेज हो गई है। शुक्रवार को नाम वापसी की अंतिम तिथि है, जिसके बाद प्रत्याशियों की अंतिम सूची तय होगी। शनिवार को राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से चुनाव चिन्ह आवंटित किए जाएंगे। 23 फरवरी को मतदान और 27 फरवरी को मतगणना होगी।

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  • आज शुक्रवार नाम वापसी की अंतिम तिथि निर्धारित।
  • शनिवार को चुनाव चिन्ह का आवंटन किया जाएगा।
  • 23 फरवरी को 48 नगर निकायों में मतदान।
  • 27 फरवरी को घोषित होंगे चुनाव परिणाम।
  • महापौर/अध्यक्ष के लिए 598 उम्मीदवार, पार्षद के लिए 5,957 प्रत्याशी मैदान में।

झारखंड में नगर निकाय चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो चुकी हैं। स्क्रूटनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद शुक्रवार को नाम वापसी की अंतिम तिथि निर्धारित की गई है। इस चरण के बाद यह स्पष्ट हो जाएगा कि महापौर, अध्यक्ष और पार्षद पद के लिए कितने प्रत्याशी अंतिम रूप से चुनाव मैदान में रहेंगे। राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार सभी जिलों में प्रशासनिक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

नाम वापसी के बाद तय होगी अंतिम तस्वीर

नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होते ही प्रत्याशियों की अधिकृत अंतिम सूची जारी की जाएगी। कई स्थानों पर आपसी समझौते और रणनीतिक समीकरणों के चलते कुछ प्रत्याशी नाम वापस ले सकते हैं, जिससे सीधी टक्कर की स्थिति भी बन सकती है। चुनावी गणित में यह दिन बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव राधेश्याम प्रसाद ने जानकारी देते हुए बताया कि पार्षद, महापौर और अध्यक्ष पद के लिए कुल 50-50 चुनाव चिन्ह निर्धारित किए गए हैं। शनिवार को संबंधित जिलों में प्रत्याशियों को प्रतीक चिन्ह आवंटित किया जाएगा।

राधेश्याम प्रसाद ने कहा:

“एक ही बैलेट पेपर में निर्वाचन क्षेत्र के सभी प्रत्याशियों के नाम, फोटो और चुनाव चिन्ह रहेगा। पार्षद पद के लिए उजला और महापौर व अध्यक्ष पद के लिए पिंक रंग का बैलेट पेपर रहेगा।”

बैलेट पेपर और चुनाव चिन्ह की व्यवस्था

इस बार चुनाव प्रक्रिया को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। पार्षद पद के लिए सफेद रंग का बैलेट पेपर रहेगा, जबकि महापौर और अध्यक्ष पद के लिए गुलाबी रंग का बैलेट पेपर उपयोग में लाया जाएगा। प्रत्येक बैलेट पेपर पर प्रत्याशियों का नाम, फोटो और आवंटित चुनाव चिन्ह अंकित होगा।

राज्य निर्वाचन आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि एक बार आवंटित किया गया चुनाव चिन्ह अंतिम माना जाएगा। किसी भी प्रकार के बदलाव के लिए आयोग की पूर्व स्वीकृति अनिवार्य होगी।

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माचिस की डिब्बी से लोटा तक होंगे प्रतीक चिन्ह

नगर निकाय चुनाव में इस बार कई रोचक चुनाव चिन्ह देखने को मिलेंगे। आयोग द्वारा जारी सूची में माचिस की डिब्बी, लोटा, एयर कंडीशनर, हवाई जहाज, सिलाई मशीन, अलमारी, कुर्सी, टेबल, बाल्टी, ताला-चाबी, गैस सिलेंडर, नारियल, सेब जैसे प्रतीक चिन्ह शामिल हैं।

पार्षद और महापौर/अध्यक्ष पद के लिए अलग-अलग प्रतीक चिन्ह निर्धारित किए गए हैं, ताकि मतदाताओं को पहचान में आसानी हो। खासकर गैर-दलीय चुनाव में प्रतीक चिन्ह मतदाताओं के लिए पहचान का मुख्य आधार बनता है।

23 फरवरी को मतदान, 27 को मतगणना

राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार, झारखंड के 48 नगर निकायों में 23 फरवरी को सुबह सात बजे से मतदान शुरू होगा। मतदान प्रक्रिया शांतिपूर्ण और निष्पक्ष ढंग से संपन्न कराने के लिए प्रशासनिक स्तर पर तैयारी की जा रही है। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी विशेष निर्देश जारी किए गए हैं।

27 फरवरी को मतगणना की जाएगी और उसी दिन चुनाव परिणाम घोषित किए जाएंगे। चुनावी आंकड़ों के अनुसार, स्क्रूटनी के बाद महापौर और अध्यक्ष पद के लिए कुल 598 अभ्यर्थी मैदान में हैं, जिनमें 251 महिला उम्मीदवार शामिल हैं। वहीं पार्षद पद के लिए 5,957 प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं, जिनमें 2,978 महिला प्रत्याशी हैं। यह आंकड़े स्थानीय निकायों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को भी दर्शाते हैं।

महिला भागीदारी में बढ़ोतरी

इस चुनाव में महिला प्रत्याशियों की बड़ी संख्या स्थानीय लोकतंत्र में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी को दर्शाती है। महापौर, अध्यक्ष और पार्षद पदों पर महिलाओं की मजबूत उपस्थिति स्थानीय शासन व्यवस्था को नई दिशा दे सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि शहरी विकास, स्वच्छता, जलापूर्ति, सड़क, प्रकाश व्यवस्था और जनसेवा से जुड़े मुद्दों पर इस बार चुनावी बहस अधिक केंद्रित रहेगी।

न्यूज़ देखो: लोकतंत्र का स्थानीय पर्व

नगर निकाय चुनाव केवल प्रतिनिधि चुनने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि स्थानीय विकास की दिशा तय करने का अवसर है। नाम वापसी और चुनाव चिन्ह आवंटन के बाद मुकाबला और स्पष्ट होगा। महिला भागीदारी और बड़ी संख्या में उम्मीदवारों की उपस्थिति लोकतंत्र की जीवंतता को दर्शाती है। अब देखना होगा कि मतदाता किसे जिम्मेदारी सौंपते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

जागरूक मतदाता, मजबूत नगर निकाय

शहरों का विकास केवल सरकार के भरोसे नहीं, बल्कि जागरूक नागरिकों की भागीदारी से संभव है। मतदान केवल अधिकार नहीं, जिम्मेदारी भी है।

23 फरवरी को मतदान जरूर करें, सोच-समझकर अपने प्रतिनिधि चुनें। अपनी राय कमेंट में साझा करें और इस खबर को आगे बढ़ाकर दूसरों को भी जागरूक बनाएं।

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